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दिन भर घूम-घूम कर खोजते हैं निराश्रित, अनाथ और बीमारों को, 60 को मिलाया फैमिली से और 496 को दिलाया आसरा

72 संस्थाओं से जुड़े सूरत के धर्मेश भाई कहते हैं- जिनसे कोई रिश्ता नहीं, उनके लिए कुछ करना ही सच्ची मानवता है

Dainik Bhaskar

Apr 09, 2018, 02:00 AM IST
धर्मेश भाई (बाएं) गामी लोगों को संस्था में भेजने से पहले पुलिस से बकायदा अनुमति लेते हैं। धर्मेश भाई (बाएं) गामी लोगों को संस्था में भेजने से पहले पुलिस से बकायदा अनुमति लेते हैं।

सूरत. पूरे शहर में घूम-घूमकर 39 वर्षीय धर्मेश भाई रोज निराश्रित लोगों को ढूंढ़ते हैं। वह पिछले 6 साल में 496 निराश्रित लोगों को अलग-अलग संस्थाओं में आश्रय दिला चुके हैं। इनमें से 60 लोगों को उनके परिवार से भी मिला चुके हैं। धर्मेश अपने खर्च से पूरा काम करते हैं। मानसिक रूप से अक्षम, अनाथ, गंभीर बीमारियों से पीड़ितों के पास जाते हैं, उनसे बातचीत करते हैं। उनकी तकलीफ जानने की कोशिश करते हैं। उसके बाद उसे संस्था के पास पहुंचाते हैं, जहां उसकी देखभाल की जाती है।

यहां से हुई थी शुरूआत

निराश्रित व्यक्ति को संस्था तक पहुंचाने के पहले धर्मेश भाई पुलिस की अनुमति लेते हैं। धर्मेश भाई का कहना है कि उनके पास उस हर व्यक्ति की जानकारी है, जिन्हें उन्होंने आश्रय दिलाया है। समय-समय पर वह उनसे मिलते भी रहते हैं। सिर्फ सूरत ही नहीं नवसारी, बारडोली, वलसाड समेत पूरे दक्षिण गुजरात में निराश्रित लोगों की मदद करते हैं। इस काम में पांच लोग उनका सहयोग करते हैं। 82 साल के श्याम सुंदर शर्मा 3 साल से सिविल अस्पताल के कैंपस में उधर-उधर भटक कर जिंदगी गुजार रहे थे।

UP के रहने वाले हैं

मूलरूप से उत्तर प्रदेश के बनारस जिले के रहने वाले श्याम सुंदर शर्मा के परिवार में कोई नहीं है। धर्मेश को जब इस की जानकारी मिली तो उन्होंने श्याम सुंदर से बात की, उसके बाद उन्हें सूरत के गोथान स्थित मानव सेवा वृद्धाश्रम में दाखिल कराया। धर्मेश उनका हालचाल जानने के लिए जाते रहते हैं। इसी तरह अन्य बेसहारा वृद्ध लोगों को भी वह वृद्धाश्रम में दाखिल करवाया है।

खयाल: बीमार जानवरों का भी इलाज कराते हैं धर्मेश
धर्मेश गामी भारतीय गोरक्षा मंच के प्रमुख हैं। इसके अलावा कैंसर और एचआईवी पीड़ितों के लिए काम कर रही संस्थाएं, अनाथालय, वृद्धाश्रम समेत 72 संस्थाओं से भी वह जुड़े हुए हैं। निराश्रित व्यक्तियों के अलावा धर्मेश घायल, बीमार और बेसहारा पशुओं की भी देखभाल करते हैं। धर्मेश अपने परिवार के साथ 17 साल से भटार में किराए के घर में रहते हैं। उन्होंने कहा कि जिंदगी में परिवार ही सबकुछ नहीं होता, जिनसे कोई रिश्ता नहीं उनके लिए कुछ करना ही सच्ची मानवता है।

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धर्मेश भाई (बाएं) गामी लोगों को संस्था में भेजने से पहले पुलिस से बकायदा अनुमति लेते हैं।धर्मेश भाई (बाएं) गामी लोगों को संस्था में भेजने से पहले पुलिस से बकायदा अनुमति लेते हैं।
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