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कबाड़ हुई बसों को मोबाइल स्कूल में तब्दील कर रहा ये राज्य, नमक श्रमिकों के बच्चों के लिए उठाया कदम

तंबू स्कूल की जगह लेंगी ऐसी बस, बैठ सकेंगे 24 बच्चे।

Danik Bhaskar | Jun 04, 2018, 08:42 PM IST
रण में नए सत्र से अगरिया बच्चो रण में नए सत्र से अगरिया बच्चो

सुरेन्द्र नगर (गुजरात). सामान्य सी नजर आ रही ये बस स्कूल में तब्दील होने वाली है। टीवी-पंखे-डिश-सोलर और कार्पेट फर्श सरीखी सुविधाओं से युक्त इस चलित स्कूल में 24 बच्चे एक साथ बैठ सकेंगे। ये चलित स्कूल नमक श्रमिकों के बच्चों के तंबू स्कूल की जगह लेंगे। शुरूआती में एक बस को चलित स्कूल में तब्दील किया जा रहा है। इस पर सुझावों के बाद ऐसे स्कूलों की संख्या बढ़ाई जाएगी। अभी पुरानी हो चुकी राज्य पथ परिवहन निगम की 25 बसों को चलित स्कूल में तब्दील करने का फैसला लिया गया है। इनमें नमक श्रमिकों के बच्चों के आंगनवाड़ी केन्द्र और स्कूल लगेंगे। इनमें सीढ़ी भी लगेगी ताकि बच्चों को बस क्लास में जाने और उतरने में दिक्कत न हो।

ऐसे ये बसें बनेंगी आलीशान क्लासरूम

- बस की सभी सीटों को हटाकर लकड़ी की फ्लोरिंग लगाई जाएगी।

- कार्पेट भी। 12 मीटर लंबाई में 24 बच्चों के बैठने की व्यवस्था। 12 पंखे ताकि गर्मी न सताए।

- बस के ऊपर सोलर पैनल लगे होंगे। टीवी-डिश को चलाने के लिए सोलर पैनल से मदद मिलेगी।

- डिश एंटीना के माध्यम से बच्चों को शैक्षणिक कार्यक्रम का प्रसारण दिखाया जाएगा।

- बस को पूरी तरह लॉक करना संभव होगा। इंजन नहीं होगा इस तरह तैयार होने वाली बस स्कूल में।

- इन्हें ट्रैक्टर के माध्यम से निर्धारित स्थल पर पहुंचाया जाएगा। बस स्कूल में पहले शौचालय की भी व्यवस्था करने की तैयारी थी लेकिन बस पर पानी चढ़ाने में दिक्कत के चलते इसको ड्रॉप किया गया। अब बस के बाहर अलग से शौचालय का प्रबंध किया जाएगा।

सोलर एनर्जी से चलेगी बस, डिश भी लगेगी

- अगरिया (नमक श्रमिक) हित रक्षक मंच के हरणेशभाई पंड्या ने बताया, शिक्षा मंत्री भूपेन्द्र सिंह चूडास्मा के पास नमक उद्योग का भी प्रभार है। इसलिए वह नमक श्रमिकों के बच्चों की शिक्षा की समस्याओं से वाकिफ थे। उनके सक्रिय सहयोग से यह व्यवस्था संभव होने जा रही है। बस स्कूल में पीटीसी-बीए-बीएड के साथ-साथ बाल दोस्त भी टीचिंग करेंगे।

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