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3 दिनों तक ट्रेन पलटाने की कोशिश हुई, RPF-GRP को भनक तक नहीं

Dainik Bhaskar

May 29, 2018, 04:15 PM IST

संदिग्धों द्वारा ट्रैक पर रखी वस्तुएं चपटी हो गईं, गनीमत रही कि कोई ट्रेन पटरी से नहीं उतरी।

पटरी पर कुछ रखा था संदिग्धों ने पटरी पर कुछ रखा था संदिग्धों ने
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लवकुश मिश्रा-सूरत। ट्रेन पलटाने की साजिशों को रोकने की रेलवे की सारी कोशिशें बेकार हो चुकी हैं। शुक्रवार, शनिवार और रविवा को दिन के उजाले में 10 संदिग्ध तीन ट्रेनों को पलटाने की कोशिशें करते रहे, लेकिन न तो आरपीएफ को पता चला और न ही जीआरपी को। हैरान करने वाली बात यह है कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए रोज 10 जवान गश्त लगाते हैं। भास्कर ने किया स्टिंग...

भास्कर रिपोर्टर ने उधना और भेस्तान के बीच 3 किलोमीटर की दूरी पर तीन दिन तक लगातार नजर रखा तो पाया कि ये शरारती तत्व दिल्ली-मुंबई मेन लाइन पर अप और डाउन दोनों दिशाओं में आने-जाने वाली ट्रेनों को पलटाने के लिए ट्रैक पर पत्थर, मेटल के टुकड़े रख रहे हैं। तीनों ट्रेनों में से अगर एक भी पलट जाती या दुर्घटनाग्रस्त हो जाती तो सैकड़ों यात्रियों की जान-माल को नुकसान पहुंच सकता था। पिछले चार साल में ट्रेन को पलटाने और क्षतिग्रस्त करने की पांच बड़ी घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन इन पर रोक नहीं लगाई जा सकी है। पत्थरबाजी की घटनाएं तो आए दिन होती रहती हैं। रेलवे ने ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए आरपीएफ और जीआरपी के जवानों को गश्त पर लगाया है, लेकिन कुछ नहीं हो रहा है। जवान शाम 6 से सुबह 6 बजे तक गश्त लगाते हैं, जबकि शरारती तत्व दिन में ही खेल कर रहे हैं।

क्या देखा भास्कर ने

शुक्रवार शाम 5.35 बजे डाउन लाइन से नंदनवन रोड ओवर ब्रिज के ही पास मुंबई सेंट्रल-अहमदाबाद डबल डेकर ट्रेन तेज रफ्तार में गुजर रही थी। चार संदिग्ध वहां पहुंचे। इनमें से लाल रंग की टी-शर्ट पहने एक शरारती तत्व ट्रैक को देख रहा था। ट्रेन के आने से पहले उसने ट्रैक पर कोई वस्तु रखी। दो अन्य नाबालिग संदिग्ध ट्रैक पर यहां से वहां चक्कर लगा रहे थे। ये ट्रैक की रेकी कर रहे थे। जब उन्हें आभास हुआ कि कोई उनकी तस्वीर ले रहे हैं तो उन्होंने मुंह पर रुमाल बांध लिया और उसके पीछे लग गए। बाद में चले गए।

10 साल कैद का प्रावधान पर आज तक किसी को नहीं हुई

रेलवे अधिनियम के अनुसार अगर कोई व्यक्ति ट्रेन में यात्रा कर रहे यात्री को दुर्भावनापूर्ण तरीके से चोटिल करता है या चोटिल करने का प्रयास करता है, या फिर ट्रैक से छेड़छाड़ करता है तो उसे 10 वर्ष का कारावास या उम्र कैद की सजा हो सकती है। पिछले तीन साल से उधना-भेस्तान के बीच ऐसी घटनाएं लगातार हो रही हैं। रेलवे पुलिस कभी-कभी संदिग्धों को पकड़ती भी है, लेकिन आज तक किसी को सजा नहीं दिला पाई है।

अहमदाबाद डबल डेकर: रिपोर्टर को देख भागे

शनिवार शाम 5.13 बजे डाउन लाइन पर बांद्रा से जोधपुर और दिल्ली जा रही 12480 सूर्यनगरी एक्सप्रेस शाम 5.22 बजे सूरत पहुंचने वाली थी। उससे लगभग 8 किमी पहले उधना से भेस्तान के बीच नंदनवन रोड ओवर ब्रिज के पास लगभग 6 संदिग्ध ट्रैक किनारे मुंह पर रुमाल बांधे दिखे। ये लाल रंग की कुछ संदिग्ध मेटल का टुकड़ा डाउन दिशा की रेल लाइन पर रख रहे हैं। तेज रफ्तार से ट्रेन आगे बढ़ रही है। ट्रेन के नजदीक आते ही सफेद और नीले रंगे की शर्ट पहने दो युवक तेजी से भाग कर लाइन पार कर जाते हैं। इसके बाद ट्रेन के गुजर जाने के बाद सभी आकर उस मेटल के टुकड़े को देखते हैं, जिसे ट्रैक पर रखा था। मेटल का टुकड़ा पूरी तरह से चपटा हो चुका था।

बांद्रा-हरिद्वार: ट्रेन सुरक्षित गुजरी तो फिर देखने गए

शनिवार शाम 5:30 बजे नंदनवन रोड ओवर ब्रिज के पास बांद्रा-हरिद्वार एक्सप्रेस के गुजरने के पहले तीन संदिग्ध अप लाइन की तरफ आगे बढ़ते दिखे। यह ट्रेन मुंबई की तरफ जा रही थी। तीनों संदिग्ध ट्रैक पर गए और वहां सफेद थैले में से निकालकर कोई वस्तु रखी। ट्रेन इस वस्तु के ऊपर से गुजर गई। ट्रेन के जाने के बाद ये संदिग्ध ट्रैक पर रखी गई वस्तु देखने पहुंचे, जो पहिए के नीचे आकर ध्वस्त हो चुकी थी। ये संदिग्ध अक्सर ऐसा करते हैं। इन्हें न तो आरपीएफ का डर था और ना ही जीआरपी का।

चार साल में ट्रेन को क्षति पहुंचाने की छह बड़ी घटनाएं

-2015 में सूरत और किम स्टेशन के बीच रेल ट्रैक पर एक बड़ा पत्थर रखा गया था, जिससे जयपुर एक्सप्रेस टकरा गई थी। पुलिस ने अनजान व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज किया था।

-2016 में भेस्तान के पास अप लाइन पर रात के वक्त कुछ अराजक तत्वों ने रेल पटरी पर लोहे का रॉड रख दिया था। इससे बांद्रा टर्मिनस-भगत की कोठी एक्सप्रेस टकरा गई थी।

-2017 में सूरत-अंकलेश्वर के बीच सायन स्टेशन के पास 20 अप्रैल को रेल ट्रैक पर पेड़ का टुकड़ा रखा। मुंबई से अहमदाबाद जा रही ट्रेन के ड्राइवर ने इसे देखा था।

-2017 में सूरत से सटे उत्राण स्टेशन के पास उत्कलनगर में 28 दिसंबर को ट्रैक पर लोहे का टुकड़ा रखा गया। अहिंसा एक्सप्रेस के इंजन का केटल टकरा गया था।

-2017 में सूरत-उधना के बीच अहमदाबाद-नागपुर एक्सप्रेस पर 28 अप्रैल को रात 9.30 बजे पत्थरबाजी की गई। इस घटना में गाड़ी का बी 1 एसी कोच की खिड़की का कांच टूट गया था।

-2018 में उधना के पास 17 मार्च की देर रात ट्रैक पर तीन मीटर लंबा रेल पीस रखा गया था। इससे गोल्डन टेंपल डिरेल होने से बाल-बाल बची थी। हालांकि आरोपी पकड़ा गया था।

RPF के पास जवाब नहीं

आखिर कौन हैं ये लोग? ट्रेन को पलटाने की कोशिश करने वाले आखिर ये लोग कौन हैं? जीआरपी और आरपीएफ तो ठीक से जवाब नहीं दे पा रही हैं। शक है कि ये बुटलेगर या शरारती तत्व हो सकते हैं।

हो सकता है वे ट्रैक पार कर रहे हों

अगर इस तरह की कोई घटना हो रही है तो वाकई यह ट्रेनों के साथ खिलवाड़ हो रहा है। हम उस स्थान पर स्टाफ डेप्लॉय करेंगे और औचक जांच करवाएंगे। इन शरारती तत्वों को निश्चित ही पकड़ेंगे। कभी-कभी कुछ लोग इस तरह की मस्ती करते हैं। हो सकता है वे रेल ट्रैक के उस पार जा रहे हों। फिलहाल इसकी जांच की जाएगी कि ट्रैक पर ये कैसे सक्रिय थे। -राकेश पांडेय, मंडल सहायक सुरक्षा आयुक्त

ट्रेक पर संदिग्धों की हलचल। ट्रेक पर संदिग्धों की हलचल।
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इस तरह से पटरी के आसपास होते हैं सक्रिय। इस तरह से पटरी के आसपास होते हैं सक्रिय।
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तीन दिनों तक होती रही ट्रेन पलटाने की कोशिश। तीन दिनों तक होती रही ट्रेन पलटाने की कोशिश।
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Train to try to de-rail
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पटरी पर कुछ रखा था संदिग्धों नेपटरी पर कुछ रखा था संदिग्धों ने
ट्रेक पर संदिग्धों की हलचल।ट्रेक पर संदिग्धों की हलचल।
इस तरह से पटरी के आसपास होते हैं सक्रिय।इस तरह से पटरी के आसपास होते हैं सक्रिय।
तीन दिनों तक होती रही ट्रेन पलटाने की कोशिश।तीन दिनों तक होती रही ट्रेन पलटाने की कोशिश।
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