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दो माएं लेकिन दर्द एक सा..बच्चों की साइकिलों को ऐसे निहार रहीं माएं मानों यही उनके जिगर के टुकड़े हों

दो दिन पहले कार में लॉक हो गए थे बच्चे, एक साथ बुझ गए दो घरों के चिराग, हर शाम एक साथ साइकिल चलाते थे दोनों

Bhaskar News | Last Modified - May 16, 2018, 08:50 AM IST

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    हेलीश की मां जेनी और विराज की मां फेनी

    सूरत. इन दोनों मांओं का दर्द एक जैसा है। दोनों ने ही दो दिन पहले अपने-अपने इकलौते चिराग को खोया है। एक व्यक्ति के कार अनलॉक न करने की गलती ने विराज और हेलीश की जान ले ली थी। दोनों मासूम रोज साथ खेलते थे। साथ साइकिल चलाते। दोस्ती ऐसी कि कई बार एक-दूसरे के घर चले जाते, साथ ही नहाते-खाते। पूरी सोसाइटी इनकी तारीफ करती। अब दोनों इस दुनिया में नहीं हैं। हेलीश की मां जेनी और विराज की मां फेनी अपने बच्चों की यादों से लिपटी हुई हैं। साइकिलों को ऐसे निहार रहीं, चूम रहीं, मानों यही उनके चिराग हैं, आंसू थमते नहीं। एक ही बात कहतीं-मेरे लाल को कोई तो ला दो। ये था पूरा मामला...

    शहर के डिंडोली की मानसी रेजिडेंसी में रहने वाले दो परिवारों ने सोमवार को एक साथ अपने इकलौते चिराग खो दिए। दोपहर साढ़े 12 बजे घर से नमकीन लाने निकले दोनों बच्चे बाहर खड़ी कार में बैठ गए। इनके बैठते ही कार का गेट लॉक हो गया। धूप में तपती बंद कार में कई घंटे लॉक रहने के बाद तपिश और घुटन के चलते दोनों बच्चों की सांसें थम गईं।

    डेढ़ बजे से परिजन और सोसाइटी के लोग बच्चों को तलाश रहे थे। पुलिस को भी सूचना दे दी थी। शाम 7 बजे कार के पास कुत्तों के भौंकने पर पता चला कि दोनों अंदर लॉक हैं। कांच तोड़कर दोनों को अस्पताल ले गए, जहां मृत घोषित कर दिया गया। दोनों की चमड़ी झुलस गई थी, फफोले पड़ चुके थे। मानसी रेजिडेंसी के मकान नंबर 67 में रहने वाले निखिल जरीवाला ने 4 वर्षीय विराज और मकान नंबर 62 के महेश रुपावाला ने 5 वर्षीय हेलीश को इस घटना में खो दिया। विराज जूनियर केजी में और हेलीश सीनियर केजी में पढ़ता था और 7 जुलाई को उसका बर्थडे था।

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    विराज के पिता निखिल जरीवाला घर में निढाल पड़े हुए हैं। दो दिन से वह गुमसुम हैं। इकलौते बेटे के गम में उन्होंने खाना-पीना तक छोड़ दिया है।
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    बच्चे विराज और हेलीश
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