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बूंद-बूंद के लिए तरस रहे 74 गांव के लोग, रोज 5 किमी पैदल चलकर पानी खोज रहीं महिलाएं

जंगल क्षेत्रों में बनाए गए चेक डैम सूख चुके हैं

Danik Bhaskar | Apr 29, 2018, 05:34 AM IST
ुजरात के सबसे अधिक हरियाली वाले सूरत, नवसारी आैर तापी जिले के आदिवासी बहुल गांवों में पानी की समस्या भयानक स्तर तक पहुंच चुकी है। ुजरात के सबसे अधिक हरियाली वाले सूरत, नवसारी आैर तापी जिले के आदिवासी बहुल गांवों में पानी की समस्या भयानक स्तर तक पहुंच चुकी है।

सूरत. सूरत जिले के साथ दक्षिण गुजरात के कई इलाके पानी की भीषण समस्या से जूझ रहे हैं। सूरत के उमरपाडा तहसील के 10 गांव के लोग पानी के लिए तरस रहे हैं। हालात ये हैं कि महिला, पुरुष, बच्चे सुबह से ही पानी की तलाश में घर से निकल जाते हैं। पांच-पांच किलोमीटर पैदल चल कर पानी खोजते हैं, उसके बाद कहीं जाकर पीने के लिए कुछ लीटर पानी मिल पाता है। महिलाएं गड्ढों में उतर कर गंदे पानी भरने को मजबूर हैं।

आदिवासी इलाकों की हालत सबसे ज्यादा खराब है। वन क्षेत्रों में बनाए गए चेकडैम सूख चुके हैं। पहाड़ी इलाका होने से नदी में भी पानी नहीं बचा है। तापी जिले में उच्छल, सोनगढ़ ओटा, मलंगदेव, द्रोण इलाके के करीब 11 गांव पानी की किल्लत का सामना कर रहे हैं। नवसारी जिले के वांसदा तहसील में कटाशवाण, बोरियापाडा, जूज, वानारसी समेत 52 गांवों में पानी की किल्लत है। लोग पीने के लिए झरने से गिरती बूंद को भी संभाल कर ले जा रहे हैं।

हमें पीने के लिए पानी नहीं मिल रहा जानवरों को कहां से पिलाएं

वांसदा इलाके में लोगों का कहना है कि मवेशियों के लिए भी पानी नहीं है। सुरेश गामित का कहना है कि पीने के लिए पानी नहीं मिल रहा है, तो मवेशियों के लिए पानी कहां से पिलाएं। साइकिल पर और सिर पर मटका उठा कर लोग नदी तक जाते हैं और जितना पानी बचा है, उसमें से पानी लेकर आते हैं।

विधानसभा में उठाएंगे मुद्दा

वांसदा के विधायक अनंत पटेल ने बताया कि 52 गांव में पानी की किल्लत का सामना लोग कर रहे हैं। यांत्रिक विभाग ने बताया कि हैंडपंप योजना सरकार ने बंद कर दी है। इस साल नए पंप नहीं बन सकते। जिन गांव में पानी की योजना है, वहां पर बिजली नहीं है। कई जगहों पर भूगर्भ जल सूख चुका है। पानी के संकट के सामने सरकार की आंख खोलने के लिए जल संकट यात्रा निकाली गई थी। इस मुद्दे को विधानसभा में उठाएंगे।

महिलाओं को गड्‌ढों में उतरकर पानी तलाश करना पड़ रहा है। महिलाओं को गड्‌ढों में उतरकर पानी तलाश करना पड़ रहा है।