मुगल शासन में शुरू हुआ था काम, शहर की पहचान बना और अब 40 फीसदी तक घटा / मुगल शासन में शुरू हुआ था काम, शहर की पहचान बना और अब 40 फीसदी तक घटा

Bhaskar News

May 26, 2018, 06:43 AM IST

जीएसटी के पहले हर माह 90 करोड़ का था टर्नओवर, अब 55 करोड़ ही रह गया, सरकार भी नहीं कर रही मदद

सूरत में जारी उद्योग की छोटी-बड़ी 5 हजार यूनिटें हैं, जिनमें 2 लाख कारीगर कार्यरत हैं। सूरत में जारी उद्योग की छोटी-बड़ी 5 हजार यूनिटें हैं, जिनमें 2 लाख कारीगर कार्यरत हैं।

सूरत. लूम्स, एम्ब्रॉयडरी उद्योग के बाद अब सूरत की पहचान रहा जरी उद्योग भी संकट में है। अब जरी का कारोबार 40 प्रतिशत तक गिर गया है। जुलाई 2017 में जीएसटी लागू होने के पहले जरी उद्योग का टर्नओवर 90 करोड़ प्रति माह था, जो अब घटकर 55 करोड़ प्रति माह तक पहुंच गया है। लागत ज्यादा और डिमांड कम होने की वजह से जरी के व्यापारियों को 12 घंटे के बजाए 6 से 8 घंटे जरी कारखाने चलाने पड़ रहे हैं।

- जरी के रॉ मटेरियल के दाम 20 फीसदी बढ़ जाने से लागत बढ़ गई, पर डिमांड में कमी आ रही है। इसमें प्रयोग होने वाले कॉपर का रेट 550 रुपए प्रति किलो से बढ़कर 617, चांदी का रेट प्रति किलो 36 हजार से बढ़कर 40 हजार हो गया है।

- इसके अलावा पॉलिस्टर यार्न का रेट भी 230 से बढ़कर 275 रुपए हो गया है। केमिकल का रेट भी 6 माह में 20 फीसदी बढ़ गया है। इस बीच 10 फीसदी मजदूरी भी बढ़ी है।

- जरी उद्योग में 400 कारोबारियों के जरी के छोटी-बड़ी 5 हजार यूनिटें हैं, जिनमें 2 लाख कारीगर कार्यरत हैं। इनमें 1.40 लाख महिलाएं है।

- अगर यह उद्योग बंद होगा तो इन पर बेरोजगारी का संकट आ जाएगा। रियल जरी पर 5 फीसदी जीएसटी है, लेकिन इमिटेशन जरी पर अलग-अलग एचएसए कोड में 5 और 12 फीसदी जीएसटी लगता है।

- ट्रेडिशनल जरी पर न्यूनतम जीएसटी रेट लगाने की डिमांड भी की जा रही है। रियल और ट्रेडिशनल जरी के लिए सूरत का मौसम बेहद अनुकूल है।

मुगल शासन में शुरू हुआ था काम

- ट्रेडिशनल जरी को 2010 में सरकार ने जिओ ग्राफिक्स इंडिकेशन नंबर 171 दिया था। 90% सूरत के राणा समाज के लोग कार्यरत हैं।

- इसके अलावा कनबी समाज के भी लोग हैं। मुगल शासन में लोग मक्कई पुल से हज के लिए जहाज से मक्का जाते थे। तब वे जरी के वैल्यू एडिशन वाले कपड़े पहनना पसंद करते थे।

राहत नहीं दी तो लुप्त हो जाएगी जरी

- ऑल इंडिया फेडरेशन ऑफ जरी इंडस्ट्री के अध्यक्ष शांतिलाल जरीवाला ने बताया कि एमएसएमई सेक्टर के जरी उद्योग को राज्य और केंद्र सरकार से किसी भी प्रकार की कोई मदद नहीं मिल रही है।

- सरकार से पैकेज जारी करने की मांग करेंगे। जरी उद्योग की मशीनें सूरत में ही बनती हैं। जरी गुड्स सोसायटी के सेक्रेटरी बिपिन जरीवाला ने बताया कि फ्रांस में भी जरी का कारोबार होता है।

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सूरत में जारी उद्योग की छोटी-बड़ी 5 हजार यूनिटें हैं, जिनमें 2 लाख कारीगर कार्यरत हैं।सूरत में जारी उद्योग की छोटी-बड़ी 5 हजार यूनिटें हैं, जिनमें 2 लाख कारीगर कार्यरत हैं।
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