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विश्व पर्यावरण दिवस: 5 हजार पेड़ लगाकर घर को बना दिया जंगल

मानवसर्जित इस जंगल में 40 प्रकार के पक्षियों का बसेरा है, 250 छायादार पेड़ हैं।

Dainik Bhaskar

Jun 05, 2018, 12:43 PM IST
ये है स्नेहल पटेल का बनाया हुआ अनोखा जंगल। ये है स्नेहल पटेल का बनाया हुआ अनोखा जंगल।

सूरत। जैसे-जैसे सूरत शहर का विकास हो रहा है, वैसे-वैसे शहर से पेड़ों की संख्या भी लगातार कम होते जा रही है। पक्षी बसेरे के लिए पेड़ों की तलाश कर रहे हैं। ऐसे में यहां के एक पर्यावरण प्रेमी ने आज से 20 साल पहले जो रोपे लगाए थे, वे आज एक जंगल के रूप में सबके सामने हैं। इस जंगल में रहकर वे खुद को गौरवान्वित महसूस करते हैं। घायल पक्षियों का इलाज करते हैं…

ये हैं स्नेहल पटेल, जिन्हें कांक्रीट के जंगल में रहना पसंद नहीं था। इसलिए उन्होंने खेती की जमीन पर अपना आशियाना बनाया। 20 साल पहले उन्होंने जो रोपे लगाए थे, उसने आज जंगल का रूप ले लिया है। इसमें कई घने पेड़ भी हैं, जिस पर 40 प्रजाति के पक्षियों का बसेरा है। गवियर के पास उन्होंने अपना घर भी बना रखा है, जहां वे घायल पक्षियों को आसरा देकर उनका इलाज भी करते हैं।

10 हजार बाल्टी पानी बचाते हैं

इस अनाेखे घर में पवनचक्की और सोलर ऊर्जा से उत्पन्न होने वाली बिजली का उपयोग होता है। इतना ही नहीं, बारिश के पानी का संग्रह करते हैं। पानी का रिसाइकलिंग के लिए अलग से व्यवस्था कर रखी है। जिससे वे एक साल में 10 हजार बाल्टी बचाते हैं। इसे फिल्टर कर उसका साल भर उपयोग भी करते हैं। घर में रेन हार्वेस्टिंग सिस्टम फिट कर रखा है। इसके अलावा गार्डन में एक कुआं भी बनवा रखा है। घर के फर्स्ट फ्लोर पर लेक है, जिसमें पानी स्टोर किया जाता है। पूरे घर में तीन स्तर पर पानी का फिल्ट्रेशन किया जाता है। बाकी बचा पानी पाइप के माध्यम से फिर जमीन पर चला जाता है।

20 साल पहले के रोपे आज छायादार पेड़

स्नेहल पटेल बताते हैं कि आज जंगल लगातार कम हो रहे हैं, पक्षियों को अपना बसेरा बनाने में काफी तकलीफ हो रही है। 20 साल पहले मुझे जंगल बनाने का विचार आया, तो मैंने कुछ रोपे लगाए, जिसने आज एक जंगल का रूप ले लिया है। यह मिनी फारेस्ट 10 हजार वर्गमीटर इलाके में फैला हुआ है। प्राणियों के लिए यह एक अभयारण से कम नहीं है।

तालाब में मछली और कछुए

पानी में रहने वाले प्राणियों के लिए स्नेहल पटेल ने एक तालाब भी बनाया है, जिसमें मछलियां और कछुए हैं। नेचर क्लब द्वारा यहां घायल पशु-पक्षियों को लाया जाता है, जिसका यहां इलाज भी होता है। उन्हें यहां जंगल का ही वातावरण मिलता है।

70 प्रकार के विभिन्न पेड़

पक्षियों एवं विभिन्न प्रजाति के प्राणियों के खाने-पीने और रहने की सुविधा के साथ उन्हें घनी छांव भी मिले, इसकी यहां पूरी व्यवस्था है। मानवसर्जित इस जंगल में 70 प्रकार के पेड़ और रोपे लगाए गए हैं। जिसमें बड़, पीपल, नीम आदि के पेड़ हैं। यहां 40 प्रजाति के पक्षी और 30 प्रजाति के कीट-पतंगे हैं। मौसम के साथ पक्षी और पतंगे बदलते रहते हैं। हर मौसम में अलग-अलग तरह के पक्षी यहां देखने को मिलते हैं। इसमें किंग फिशर, कोरमोरंट, जल कुकड़ी, तोते, उल्लू प्रमुख हैं।

16 हजार वर्गमीटर क्षेत्र में फैला है मानवसर्जित फारेस्ट। 16 हजार वर्गमीटर क्षेत्र में फैला है मानवसर्जित फारेस्ट।
10 हजार बाल्टी पानी भी बचाया जा रहा है। 10 हजार बाल्टी पानी भी बचाया जा रहा है।
मानवसर्जित जंगल। मानवसर्जित जंगल।
20 साल पहले जो रोपे लगाए थे, आज बन गए हैं जंगल। 20 साल पहले जो रोपे लगाए थे, आज बन गए हैं जंगल।
तालाब में मछली और कछुओं का संसार। तालाब में मछली और कछुओं का संसार।
कई जलचर प्राणी का आशियाना। कई जलचर प्राणी का आशियाना।
तालाब की शोभा बढ़ाते कछुए। तालाब की शोभा बढ़ाते कछुए।
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ये है स्नेहल पटेल का बनाया हुआ अनोखा जंगल।ये है स्नेहल पटेल का बनाया हुआ अनोखा जंगल।
16 हजार वर्गमीटर क्षेत्र में फैला है मानवसर्जित फारेस्ट।16 हजार वर्गमीटर क्षेत्र में फैला है मानवसर्जित फारेस्ट।
10 हजार बाल्टी पानी भी बचाया जा रहा है।10 हजार बाल्टी पानी भी बचाया जा रहा है।
मानवसर्जित जंगल।मानवसर्जित जंगल।
20 साल पहले जो रोपे लगाए थे, आज बन गए हैं जंगल।20 साल पहले जो रोपे लगाए थे, आज बन गए हैं जंगल।
तालाब में मछली और कछुओं का संसार।तालाब में मछली और कछुओं का संसार।
कई जलचर प्राणी का आशियाना।कई जलचर प्राणी का आशियाना।
तालाब की शोभा बढ़ाते कछुए।तालाब की शोभा बढ़ाते कछुए।
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