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बस ने भाई को रौंदा, तो उसने बस रुकवाई, तब दिखी पुलिस की निर्दयता

भाई की मौत का कारण बनी बस को रुकवाने पर पुलिस मृतक के भाई के बाल पकड़कर थाने ले गई।

Danik Bhaskar | Jun 06, 2018, 03:09 PM IST
मृतक के भाई का बाल पकड़कर खींचती हुई पुलिस। मृतक के भाई का बाल पकड़कर खींचती हुई पुलिस।

सूरत। 4 जून को सरथाणा में सिटी बस ने एक युवक को अपनी चपेट में ले लिया था, जिससे उसकी घटनास्थल पर ही मौत हो गई। मृतक के भाई ने विरोधस्वरूप बस को रोकना चाहा, तो पुलिस ने निर्दयता दिखाते हुए उसके बाल पकड़कर थाने ले गई। युवक को रौंदकर ड्राइवर भाग निकला…

वराछा हीराबाग डॉक्टर हाउस के सामने पुल के नीचे रहने वाले रोहित हरेशभाई देवीपूजक (18) की शादी 5 महीने पहले ही हुई थी। पिछले कुछ दिनों से वह बीमार था। अस्पताल जाने के लिए उसके पास पैसे नहीं थे। इसलिए वह पत्नी लक्ष्मी के साथ 4 जून को किसी रिश्तेदार के पास गया। रुपए लेकर जब वह पत्नी के साथ सरथाणा के दीपकमल मॉल के सामने बीआरटीएस बस से हीराबाग जाने के लिए बस स्टॉप पर जा रहा था। तब उसकी पत्नी ने बीआरटीएस का रास्ता पार कर लिया, पति पीछे था, उसने पति से कहा-संभलकर आना, बस आ रही है। पति संभलता, इसके पहले तेजी से आती हुई बस ने उसे अपनी चपेट में ले लिया। इससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया, फिर घटनास्थल पर ही उसकी मौत हो गई। इसके बाद बस का ड्राइवर वहां से भाग खड़ा हुआ।

युवक की मौत से लोग हुए क्रुद्ध

रोहित भाई को रौंदने से वहां उपस्थित नागरिकों में नाराजगी देखी गई। क्रुद्ध भीड़ ने बस पर पत्थरबाजी की। इसके दूसरे दिन मृतक के परिवार वालों ने विरोधस्वरूप सिटी बस को रोकना चाहा, जिससे ट्रॉफिक जाम हो गया। इसकी सूचना मिलते ही पुलिस घटनास्थल पर पहुंची। इस दौरान मामला बिगड़ गया, तो पुलिस ने मृतक के भाई के बाल पकड़कर उसे थाने ले जाने की कोशिश की। आखिर में पुलिस मृतक के भाई समेत तीन लोगों को पुलिस थाने ले गई।

29 दिनों में 5 मौतें

शहर में सिटी बस से जब भी किसी की मौत होती है, तो पालिका के अधिकारियों द्वारा स्पीड ब्रेकर लगाने और बसों की स्पीड कम करने की घोषणा की जाती है, किंतु कुछ दिनों बाद यह घोषणा केवल एक औपचारिकता बनकर रह जाती है। दुर्घटनाओं को रोकने के लिए पालिका द्वारा कोई सख्त कदम नहीं उठाया जाता है। पिछले 29 दिनों में सिटी बसों से 5 लोगों की मौत हो चुकी है, लगता है शायद पालिका के अधिकारियों को छठी मौत का इंतजार है।

पुलिस की निर्दयता। पुलिस की निर्दयता।
सिटी बस को रोकने की कोशिश। सिटी बस को रोकने की कोशिश।
सिटी बस ने रोहित को रौंदा। सिटी बस ने रोहित को रौंदा।