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मुस्लिम पिता ने बेटी की इच्छा पूरी करने के लिए शादी में निकाली धूमधाम से बरात

रूढ़िग्रस्त समाज को अनदेखा करते हुए पिता ने कहा कि आखिर हम कब तक बेटियों को उपेक्षित समझेंगे।

Dainik Bhaskar

Mar 31, 2018, 03:40 PM IST
मुस्लिम पिता ने बेटी की इच्छा पूरी करते हुए शादी में बरात धूमधाम से निकाली। मुस्लिम पिता ने बेटी की इच्छा पूरी करते हुए शादी में बरात धूमधाम से निकाली।

वडोदरा। जिले की डेसर तहसील के धनतेज गांव में रहने वाले इस्ताकभाई यार महंमद मकराणी ने हालोल की निजी कंपनी में काम करते हैं। उनकी तीन बेटियों में से बड़ी महजबीन LLB की पढ़ाई कर रही है। बेटी की शादी तय हो गई, तो बेटी की इच्छा थी कि उसकी शादी में बरात धूमधाम से निकलनी चाहिए। बेटी की इस इच्छा को पिता ने पूरी कर दी। लोग जी भरकर नाचे….

बेटी महजबीन की शादी की तैयारियां देखकर गांव वाले अचंभित रह गए। जब डीजे के साथ बरात निकली, तो लोगों ने जी भरकर डांस किया। डीजे के साथ दो घोडाें की बग्घी पर सवार दुल्हन को देखकर हर कोई हतप्रभ था। इस बरात को देखकर मुस्लिम समाज के कुछ लोग नाराज भी थे। तब दुल्हन ने कहा कि हम बेटी हैं, तो हमारा अपराध क्या है? मेरी इच्छा थी कि मेरी शादी में बरात धूमधाम से निकलनी चाहिए, पिता ने मेरी इस चाहत को पूरा कर दिया। लोग क्या कहेंगे, इसकी मुझे चिंता नहीं है।

क्या कहा बेटी के पिता ने

इस पर बेटी के पिता इस्ताकभाई मकराणी ने कहा कि इस्लाम के अनुसार यह ठीक नहीं है, दोस्तों ने मुझे ऐसा न करने के लिए कहा, किंतु मेरी बेटी की इच्छा थी, जो मैंने पूरी की। मैंने अपनी बेटी को बेटा माना और उसकी बरात निकाली। कितने ही परिवार आज भी ऐसे हैं, जहां बेटियों को तुच्छ माना जाता है। ऐसे परिवारों के लिए मेरा ये पैगाम है कि बेटा और बेटी में भेदभाव न करें। अब मुझे लोग क्या कहते हैं, मुझे इसकी परवाह नहीं है।

कृषि मंत्री ने दी शुभेच्छा

बेटी की बरात धूमधाम से निकलने की बात थोड़़ी ही देर में चारों तरफ फैल गई। कुछ लोगों ने इसकी आलोचना की, तो कई लोगों ने इसे समाज में बेटियों की इज्जत न करने वालों पर कटाक्ष बताया। इसके अलावा राज्य के कृषि मंत्री जयद्रथ सिंह परमार ने इस परिवार को अपनी शुभेच्छाएं दी।

परंपराग्रस्त समाज को अनदेखा कर पिता ने बेटी की बरात धूमधाम से निकाली। परंपराग्रस्त समाज को अनदेखा कर पिता ने बेटी की बरात धूमधाम से निकाली।
बेटी प्यार का सागर  है, पिता ने इसे चरितार्थ कर दिखाया। बेटी प्यार का सागर है, पिता ने इसे चरितार्थ कर दिखाया।
परंपराग्रस्त समाज को अनदेखा कर पिता ने बेटी की बरात धूमधाम से निकाली। परंपराग्रस्त समाज को अनदेखा कर पिता ने बेटी की बरात धूमधाम से निकाली।
बेटी प्यार का सागर  है, पिता ने इसे चरितार्थ कर दिखाया। बेटी प्यार का सागर है, पिता ने इसे चरितार्थ कर दिखाया।
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मुस्लिम पिता ने बेटी की इच्छा पूरी करते हुए शादी में बरात धूमधाम से निकाली।मुस्लिम पिता ने बेटी की इच्छा पूरी करते हुए शादी में बरात धूमधाम से निकाली।
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बेटी प्यार का सागर  है, पिता ने इसे चरितार्थ कर दिखाया।बेटी प्यार का सागर है, पिता ने इसे चरितार्थ कर दिखाया।
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