वडोदरा

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गाय-भैंस का दूध दुहने वाली महिला बनी IPS, किरण बेदी हैं प्रेरणा

हवा के एक झोंके ने बदल दी किस्मत, दे गया साहस और मैं बन गई पुलिस अधिकारी।

Dainik Bhaskar

Mar 08, 2018, 05:29 PM IST
गाय-भैंस का दूध दुहने वाली महिला बनी आईपीए। गाय-भैंस का दूध दुहने वाली महिला बनी आईपीए।

वडोदरा। राजस्थान के खोबला जेवड़ा बुदानिया गांव में खेतों में काम करते-करते और गाय-भैंस का दूध दुहने वाली महिला IPS होने के बोद डीसीपी क्राइम जोन-4 की अधिकारी सरोज कुमारी ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर महिलाओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा है कि अपना ध्येय कभी न छोड़ें। जिंदगी में चाहे, जितनी भी मुश्किलें आए, तो भी अपने ध्येय से ध्यान मत हटाना। सफलता मिलेगी ही। आप अपने सपने साकार कर सकती हैं…

किरण बेदी की स्टोरी पढ़कर सरोज कुमारी को लगा कि मैं भी उनकी तरह बन सकती हूं। पर खेतों में काम करना फिर गाय-भैंस का दूध दुहना जैसे कामों को करने वाली कभी इतने महत्वपूर्ण पद तक कैसे पहुंच सकती है। लेकिन मैंने किरण बेदी से प्रेरणा ली और संकल्प किया कि मुझे भी इनकी तरह बनना है। ध्येय सामने था, आवश्यकता थी लगन की, जिससे मैंने पूरे जोश के साथ आगे बढ़ पाई।

हवा का एक झोंका आया, दे गया प्रेरणा

एक दिन मैं अपने माता-पिता के साथ खेत में काम कर रही थी, तभी हवा के एक झोंके के साथ मेरे हाथ में आई अखबार की एक कटिंग, जिस पर किरण बेदी की स्टोरी थी। मैंने वह कटिंग अपने भाई को बताई, तो उसने कहा कि तुम भी किरण बेदी की तरह महिला पुलिस अधिकारी बन सकती हो। बस मैंने तय कर लिया कि अब पुलिस की अधिकारी बनकर ही दम लूंगी। आखिर मेरा सपना साकार हुआ। मुझे इस बात का गर्व भी है।

जिस माहौल से आई हूं, वहां तो आईपीएस बनना मुश्किल है

वर्ष 2011 बेच की गुजरात केडर की आईपीएस अधिकारी सरोज कुमारी ने बताया कि मैं जिस गांव और समाज से आई हूं, वहां आईपीएस बनना मुश्किल था। मेरे पिता आर्मी में थे, परंतु वे 1987 में ही सेवानिवृत्त हो गए थे। उस समय उनकी पेंशन के 700 रुपए और खेती से होने वाली आय में हम चार भाई-बहन का गुजारा होता था। ऐसे में हमारी पढ़ाई का खर्च निकालना भी मुश्किल होता था। इसके बाद भी मां सुवादेवी ने और पिता द्वारा दिए गए मनोबल से मेरा आईपीएस बनने का सपना पूरा हो गया है। आज जब मैं अपने अतीत को याद करती हूं, तो आंखें गीली हो जाती हैं।

सहेलियाें की शादी 10-12वीं पढ़ने के बाद ही हो गई

मेरे साथ की सहेलियों की शादी दसवीं या बारहवीं पास करने के बाद हो जाती थी। ऐसे में 12 वीं पास करने के बाद भी मेरी भी शादी का दबाव बढ़ने लगा। पर मेरे माता-पिता ने भी तय कर लिया था कि मुझे आईपीएस बनाना है। जब मैं आईपीएस हुई, तो पूरे गांव के लोगों को खूब आश्चर्य हुआ। वे बताती हैं कि गरीबी के कारण पढ़ाई नहीं हो सकती, यह कहना पूरी तरह से गलत है। यदि आपने ध्येय तय कर लिया है, तो आगे ही बढ़ना है।

हवा का एक झोंका आया और बदल गई किस्मत। हवा का एक झोंका आया और बदल गई किस्मत।
अपने अतीत को याद करती हूं, तो आंखें गीली हो जाती है। अपने अतीत को याद करती हूं, तो आंखें गीली हो जाती है।
मेरे सपने को साकार करने में माता-पिता ने भी खूब संघर्ष किया। मेरे सपने को साकार करने में माता-पिता ने भी खूब संघर्ष किया।
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गाय-भैंस का दूध दुहने वाली महिला बनी आईपीए।गाय-भैंस का दूध दुहने वाली महिला बनी आईपीए।
हवा का एक झोंका आया और बदल गई किस्मत।हवा का एक झोंका आया और बदल गई किस्मत।
अपने अतीत को याद करती हूं, तो आंखें गीली हो जाती है।अपने अतीत को याद करती हूं, तो आंखें गीली हो जाती है।
मेरे सपने को साकार करने में माता-पिता ने भी खूब संघर्ष किया।मेरे सपने को साकार करने में माता-पिता ने भी खूब संघर्ष किया।
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