--Advertisement--

इस जर्मन युवती को अपना कल्चर अच्छा नहीं लगा, आ गई भारत

जर्मन युवती वडोदरा में खेलती है खो-खो, कहती है कि इतना अच्छा देश छोड़कर लोग विदेश क्यों जाते हैं।

Danik Bhaskar | Sep 04, 2018, 06:22 PM IST
खो-खो खेलती अनामी होबर सोफरे खो-खो खेलती अनामी होबर सोफरे

वडोदरा। जब वह 8 साल की थी, तो माता-पिता को छोड़कर भारत आ गई। भारत उसे इतना अच्छा लगा कि वह यहीं की होकर रह गई। अब वह भारतीय होकर खुद पर गर्व करती है। कहती है कि मैं भारत से खूब प्यार करती हूं। यहां के लोग संस्कारी हैं। वे अतिथि को ईश्वर मानते हैं। अनजाने से भी हंसकर बातें करते हैं। यहां खो-खो खेलकर मुझे लगता है कि मैं भारत की संस्कृति को जी रही हूं। खुली हवा में रहना अच्छा लगता है…

अनामी होबर सोफरे कहती हैं कि यहां मैं रनिंग करती थी, तब मेरे ट्रेनर ने मुझे कहा कि तुम खो-खो खेलो। मुझे खुली हवा में रहना अच्छा लगता है। यहां में रनिंग के साथ-साथ खोे-खो खेलती हूं। आज की पीढ़ी जिस तरह से गेजेट मेंं डूबी हुई है, उससे मैं यही कहना चाहती हूं कि घर के अंदर बैठकर गेजेट खेलने से मोटापा बढ़ता है। इसके साथ-साथ मानसिक रूप से बीमार भी हो जाते हैं।

भरुच से आई हैं खो-खो खेलने

सीबीएसई क्लस्टर 13 खो-खो खेलने भरुच से आई मूल रूप से जर्मनी की रहने वाली अनामी ने बताया कि बीआरजी ग्रुप संचालित गुजरात पब्लिक स्कूल में 31 अगस्त से 3 सितम्बर तक सीबीएसई क्लस्टर 13 की खो-खो स्पर्धा का आयोजन हुआ। इसमें गुजरात दीव-दमन और दादरा नगर हवेली से सीबीएसई की 35 टीमों के 450 स्टूडेंट्स ने भाग लिया।