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लाइफस्टाइल डेस्क. किडनी का प्रमुख काम शरीर में रक्त को फिल्टर करना तो होता ही है, लेकिन यह कई तरह के उपयोगी हार्मोंस भी रिलीज करती हैं। किडनी पानी और सोडियम, पौटेशियम व फॉस्फोरस जैसे जरूरी मिनरल्स का रक्त में संतुलन बनाने का काम भी करती हैं। किडनी से जुड़ी बीमारियों के लक्षण अक्सर लोग शुरुआती चरण में पहचान नहीं पाते और वक्त के साथ बीमारी गंभीर होती चली जाती है। इसे क्रोनिक किडनी डिजीज (सीकेडी) कहा जाता है। वर्ल्ड किडनी डे के मौके पर मेदांता- द मेडिसिटी नेफ्रोलोजी डिपार्टमेंट के डायरेक्टर डॉ. श्याम बिहारी बंसल से जानें इस बीमारी के कारण और बचाव के तरीके।
सीकेडी होने पर क्या होगा?
किन्हें हैं ज्यादा ख़तरा?
ऐसे लोग क्या करें?
किडनी के रोगों से बचाव या किडनी के मरीजों के लिए खानपान में सावधानी रखना सबसे ज्यादा जरूरी है। इसमें खासकर नमक और पोटैशियम के सेवन पर नियंत्रण रखना आवश्यक होता है। इसके मरीज को एक दिन में 4-5 ग्राम यानी एक छोटी चम्मच से ज्यादा नमक का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए। चटनी, अचार, नमकीन, पापड़ जैसी चीजों में नमक का काफी इस्तेमाल होता है। इसलिए इनका इस्तेमाल तो पूरी तरह बंद कर देना चाहिए। केले, आलू, मशरूम, खीरे जैसी चीजों में पोटैशियम की मात्रा काफी ज्यादा होती है। इसलिए इन चीजों का इस्तेमाल पूरी तरह बंद तो नहींं, लेकिन सीमित करना चाहिए।
फायदेमंद है व्यायाम
किडनी के मरीजों को सप्ताह में कम से कम 5 दिन 30-30 मिनट के लिए व्यायाम करना चाहिए। एरोबिक व्यायाम जैसे सैर, दौड़ना, साइकल चलाना और बाद में वेट के साथ रेज़िस्टेन्स ट्रेनिंग को शामिल किया जा सकता है। अगर व्यक्ति एरोबिक और रेज़िस्टेंस ट्रेनिंग जल्द शुरू कर दे तो मसल फंक्शन में सुधार होता है। इससे सीकेडी के मरीज़ के जीवन की गुणवत्ता में भी सुधार आता है।
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