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चीनी शोधकर्ताओं ने बताया- कोरोनावायरस लैब में नहीं बना, यह प्रकृति में हुए परिवर्तन की वजह से है

2 वर्ष पहले
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  • चीनी शोधकर्ताओं ने कोरोनावायरस (SARS-CoV-2) के जीनोम सिक्वेंस की एनालिसिस की
  • कोरोना को लैब में तैयार करने की खबरों को चीनी वैज्ञानिकों ने झूठा करार दिया

हेल्थ डेस्क. कोरोनावायरस की उत्पत्ति को लेकर चीनी शोधकर्ताओं ने नया खुलासा किया है। नेचर मेडिसिन जर्नल में प्रकाशित शोध के मुताबिक, महामारी साबित होने के बाद चीनी वैज्ञानिकों ने कोरोनावायरस (SARS-CoV-2) के जीनोम सिक्वेंस की एनालिसिस की। रिपोर्ट में सामने आया कि यह वायरस प्रकृति में हुए परिवर्तन का परिणाम है जो वुहान शहर से दुनियाभर में फैला। इसे न तो किसी लैब में तैयार किया गया है और न ऐसा कोई प्रमाण मिला है।

रिसर्च की बड़ी बातें
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) शोधकर्ता क्रिस्टियन एंडरसन के मुताबिक, नए कोरोनावायरस की जीनोम सिक्वेंस की मिलान अब तक के मौजूद डाटा से किया गया, जिससे साफ हुआ कि यह प्राकृतिक प्रक्रिया का परिणाम है। रिपोर्ट के मुताबिक, कोरोना का सम्बंध वायरस के एक ऐसे बड़े समूह से है जो दुनियाभर के लोगों को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है। 

2) शोधकर्ताओं के मुताबिक, जीनोम सिक्वेंस (जेनेटिक मैटेरियल) की जांच के दौरान वायरस के आवरण और इसमें मौजूद प्रोटीन (स्पाइक प्रोटीन) को जांचा गया। वायरस की इंसान और जानवरों की त्वचा को भेदने की क्षमता को भी पहचाना गया।

3) शोधकर्ताओं के मुताबिक, कोरोना में मौजूदा स्पाइक प्रोटीन इसके दूसरे वायरस की तुलना में ज्यादा पावरफुल है। यह इंसान की उन कोशिकाओं को टार्गेट करता है जो ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करती हैं। इसलिए यह इंसानों के लिए खासतौर पर खतरनाक है। क्रिस्टियन एंडरसन कहते हैं, कोरोना की संरचना भी इससे पिछले प्रकारों से अलग है। स्पाइक प्रोटीन और संरचना, यही दो बातें हैं जो इस वायरस को पावरफुल साबित करती हैं। 

4) शोधकर्ता एंडरसन के मुताबिक, इसकी उत्पत्ति के लिए दो स्थितियां जिम्मेदार हो सकती हैं। पहली, यह प्रकृति में बना लेकिन लंबे समय तक पड़ा रहा और इंसानों तक नहीं पहुंचा। जब इसने इंसान को संक्रमित किया तो तेजी से दुनियाभर में फैला। दूसरी वजह है इसमें मौजूद स्पाइक प्रोटीन। 

5)  शोधकर्ताओं के मुताबिक, अगर नया कोरोनावायरस किसी जानवर से इंसान में पहुंचता है तो आने वाले समय में खतरा ज्यादा बढ़ सकता है। जानवरों में मौजूद वायरस उनकी अगली पीढ़ी में जाएगा जो भविष्य फिर इंसान तक पहुंच सकता है।

6)  रिसर्च में सिडनी यूनिवर्सिटी (एडवर्ड होल्म्स), एडिनबर्ग यूनिवर्सिटी (एंड्रयू रैम्बाउट), ट्यूलेन यूनिवसिर्टी (रॉबर्ट एफ. गैरे) और कोलम्बिया यूनिवर्सिटी (डब्ल्यू लिप्किन) के शोधकर्ता शामिल हैं। चीनी सरकार के मुताबिक कोविड19 का मामला इंसान में मिलने के बाद इसे एक से दूसरे इंसान में फैलने की शुरुआत हुई। 

7) कोरोना के ही एक रूप सार्स से 2003 में महामारी फैली थी। दूसरी बार 2012 में सऊदी अरब में मेर्स की महामारी बढ़ते मामलों की वजह थी। 31 दिसम्बर 2019 को चीनी सरकार ने डब्ल्यूएचओ को वायरस के फैलने की जानकारी दी और इसका नाम SARS-CoV-2 रखा गया। 20 फरवरी 2020 तक इसके 167,500 नए मामले रिकॉर्ड किए गए।