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लहसुन, नमक के पानी और निमोनिया की दवा से नहीं मरता कोरोनावायरस, भ्रमित करने वाले सवालों का डब्ल्यूएचओ ने दिया जवाब

6 महीने पहलेलेखक: अंकित गुप्ता
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  • डब्ल्यूएचओ ने सोशल मीडिया पर चल रहे कोरोनावायरस से जुड़े सवालों के जवाब दिए, कहा- नमक के पानी से नाक धोने पर नहीं मरता वायरस
  • ‘चीन से आने वाले पार्सल या लेटर से नहीं फैल सकता कोरोनावायरस, माउथवॉश भी संक्रमण से बचाने की गारंटी नहीं’

हेल्थ डेस्क. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे लहसुन और निमोनिया की दवा से कोरोनावायरस के संक्रमण का इलाज करने का दावा कितना सच है, तिल के तेल से इंफेक्शन रोका जा सकता है या नहीं, सच-झूठ वाले ऐसे तमाम  दावों का जवाब विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने दिया है। डब्ल्यूएचओ ने  लोगों को भ्रमित कर रहे 10 सवाल चुने और उनके जवाब पब्लिक डोमेन में जारी किए हैं। कोरोनावायरस से चीन में अब तक 500 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी हैं, भारत में भी कई मामले सामने आ चुके हैं। पढ़ें, दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य संस्था डब्ल्यूएचओ ने क्या बताया..

डब्ल्यूएचओ : लहसुन फायदा पहुंचाता है और इसमें सूक्ष्मजीवों से होने वाले नुकसान से बचाने की खूबी है, लेकिन इसे खाने से वायरस का संक्रमण नहीं होगा, यह बात वैज्ञानिक तौर पर सिद्ध नहीं हो सकी है। 

डब्ल्यूएचओ : नहीं, यह तेल कोरोनावायरस को नहीं मारता। हालांकि, कुछ ऐसे रसायन हैं जो इसे मार सकते हैं। इनमें ब्लीचिंग, क्लोरिन युक्त डिस्इन्फेक्टेंट शामिल हैं, जिसका इस्तेमाल सफाई में किया जा सकता है। लेकिन अगर वायरस शरीर में पहुंच चुका है तो इनका असर वायरस पर नहीं होगा। इनका इस्तेमाल स्किन पर करना खतरनाक साबित हो सकता है। 

डब्ल्यूएचओ : नहीं। नमक के पानी से नाक धोने पर वायरस का संक्रमण रोका जा सकता है, अब तक इसका कोई प्रमाण नहीं मिला। कुछ मामलों में ऐसा करने से सर्दी-खांसी के मामलों में कमी जरूर आई है। रोजाना नाक साफ करने से जरूरी नहीं कि सांस लेने की प्रक्रिया को बाधित करने वाले संक्रमण को रोका जा सके।  

डब्ल्यूएचओ : हां, यह सुरक्षित है। चीन से आ रहे पार्सल या लेटर को छूने या इस्तेमाल करने से संक्रमण नहीं फैलता। रिसर्च से यह साबित हो चुका है कि कोरोनावायरस लंबे समय तक कागज या पैकेजिंग पर चिपकने के बाद जिंदा नहीं रहता। 

डब्ल्यूएचओ : अब तक ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला, जिससे ये साबित हो सके कि कुत्ते या बिल्ली जैसे पालतू जानवरों से कोरोनावायरस फैल सकता है। सबसे बेहतर तरीका है कि पालतू जानवरों को छूने के बाद साबुन से हाथ धोएं। इस तरह ई-कोलाई और सल्मोनेला जैसे बैक्टीरिया से भी बच सकते हैं, जो आमतौर पर इंसान और जानवरों के बीच फैलते हैं।

डब्ल्यूएचओ : नहीं। न्यूमोकोकल और हीमोफिलस इनफ्लूएंजा टाइप जैसी निमोनिया की वैक्सीन कोरोनावायरस से सुरक्षा नहीं करती हैं। शोधकर्ता नए कोरोनावायरस के लिए वैक्सीन विकसित करने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन अब तक कोई प्रभावी वैक्सीन नहीं तैयार हो पाई है। 

डब्ल्यूएचओ : नहीं। वैज्ञानिक तौर पर अब तक इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है। कुछ माउथवॉश ऐसे हैं जो लार से कीटाणु खत्म करते हैं, लेकिन इसका ये मतलब नहीं कि ये कोरोनावायरस के संक्रमण से बचाएंगे। 

डब्ल्यूएचओ : कोरोनावायरस किसी भी उम्र वर्ग के इंसान को संक्रमित कर सकता है। अगर कोई इंसान अस्थमा, डायबिटीज और हार्ट डिसीज से पीड़ित है तो उन्हें वायरस आसानी से संक्रमित कर सकता है और स्थिति गंभीर हो सकती है। सभी उम्र वर्ग के लोगों को इससे बचने के लिए जरूरी सावधानी बरतनी चाहिए। 

डब्ल्यूएचओ : एंटीबायोटिक्स केवल बैक्टीरिया से बचाती हैं, वायरस से नहीं। कोरोनावायरस से संक्रमित मरीज में बैक्टीरियल इंफेक्शन के लक्षण दिखने पर एहतियात के तौर पर एंटीबायोटिक्स दी जा सकती है। 

डब्ल्यूएचओ : अब तक कोई ऐसी दवा नहीं तैयार हो पाई है जो नए कोरोनावायरस से बचा सके या इससे संक्रमित मरीज का इलाज किया जा सके।

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