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रिसर्च / सांप और चमगादड़ नहीं पैंगोलिन है कोरोनावायरस के लिए जिम्मेदार, चीनी वैज्ञानिकों का नया दावा

Coronavirus; Scientists On Pangolin To Coronavirus Research By South China Agricultural University Team
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Coronavirus; Scientists On Pangolin To Coronavirus Research By South China Agricultural University Team

  • चीन की साउथ चाइना एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं 1 हजार जंगली जानवरों के सैंपल पर की रिसर्च
  • दावा; मरीजों से लिए गए सैंपल में मौजूद वायरस और पैंगोलिन का जीनोम सिक्वेंस 99 फीसदी तक एक जैसा है

दैनिक भास्कर

Feb 10, 2020, 02:41 PM IST

हेल्थ डेस्क. अब तक वुहान में कोरोनावायरस के संक्रमण की वजह चमगादड़ और सांप को माना जा रहा था लेकिन चीनी वैज्ञानिकों ने रिसर्च में एक नया खुलासा किया है। चीन की साउथ चाइना एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं कोरोनावायरस के लिए पैंगोलिन को जिम्मेदार ठहराया है। उनका दावा है कि इंसानों में संक्रमण फैलने की वजह पैंगोलिन है। यह चमगादड़ और इंसान के बीच की वो कड़ी है जिससे संक्रमण के मामले बढ़े। लेकिन दुनियाभर के विशेषज्ञों ने इस रिसर्च पर सवाल उठाए हैं, उनका कहना है, रिसर्च के नतीजे पर्याप्त नहीं हैं।

1 हजार जंगली जानवरों के सैंपल लिए गए

गुआंगझू की साउथ चाइना एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने इसे समझने के लिए 1 हजार जंगली जानवरों के सेंपल लिए। शोधकर्ता शेन योंगी और जिओ लिहुआ का दावा है कि मरीजों से लिए गए सैंपल में मौजूद कोनोरावायरस और पैंगोलिन का जीनोम सिक्वेंस (आनुवांशिक अनुक्रम) 99 फीसदी तक एक जैसा है। हालांकि शोधकर्ताओं ने इसके बारे में अधिक जानकारी नहीं साझा की है और न ही यह रिसर्च किसी जर्नल में प्रकाशित हुई है।

आईयूसीएन के मुताबिक, पैंगोलिन दुनिया का सबसे ज्यादा तस्करी किया जाने वाला प्राणी है

कौन है पैंगोलिन

  • पैंगोलिन एक स्तनधारी जीव है। इसके शरीर पर छोटी-छोटी स्केल मौजूद होती हैं जिससे यह अपनी रक्षा करता है। इसे एंटइीटर भी कहते हैं क्योंकि यह चीटिंयों को खाता है। 
  • विलुप्ति की कगार पर खड़े पैंगोलिन को दुनियाभर में संरक्षित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। साल दर साल इसकी संख्या में कमी आने वाली वजह इसकी तस्करी है। 
  • पैंगोलिन का प्रयोग चीन की चिकित्सा पद्धति में किया जाता है। इसकी मदद से स्किन और गठिया से जुड़ी दवाएं तैयार की जाती हैं। 
  • तेजी से गिरती पैंगोलिन की संख्या को रोकने के लिए चीन में इसकी तस्करी करने वालों पर कम से कम 10 साल की सजा का प्रावधान है।

चीन में पैंगोलिन की मांग क्यों
प्राकृतिक संसाधनों को संरक्षित करने वाले अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (आईयूसीएन) के मुताबिक, पैंगोलिन दुनिया का सबसे ज्यादा तस्करी किया जाने वाला प्राणी है। एशिया और अफ्रीका के जंगलों से इसे चुराकर तस्करी की जाती है। इन्हें खासतौर पर चीन और वियतनाम के बाजारों में बेचा जाता है। इनके शरीर पर मौजूद स्केल से दवाएं तैयार की जाती हैं और बचे हुए मांस को मीट के तौर पर ब्लैक मार्केट में बेचा जाता है।

रिसर्च पर उठे सवाल

  • चीनी वैज्ञानिकों की इस रिसर्च पर दुनिया के नामी विशेषज्ञों ने सवाल उठाए हैं। कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के वेटिनरी मेडिसिन साइंस के प्रोफेसर जेम्स वुड के मुताबिक, जीनोम सिक्वेंस के आधार पर वायरस की पुष्टि करना पर्याप्त नहीं है। 99 फीसदी जीनोम सिक्वेंसिंग की वजह अति संक्रमित माहौल भी हो सकता है। इस पर और अधिक रिसर्च की जरूरत है।
  • नॉटिंग्घम यूनिवर्सिटी के मॉलिक्युलर वायरोलॉजी के प्रोफेसर जोनाथन बेल कहते हैं, हमे और आनुवांशिक आंकड़ों की मदद से ये समझना होगा कि कैसे वायरस पैंगोलिन और इंसानों के बीच की कड़ी है, है भी या नहीं।

वायरस रोकने लिए तस्करी पर बैन जरूरी
चीन में जनवरी से जंगली जानवरों के व्यापार पर रोक लगा दी गई है। दुनियाभर के संरक्षणकर्ता ने हमेशा से ही जानवरों की तस्करी को लेकर हमेशा चीन पर सवाल उठाए हैं। वर्ल्ड एमिनल प्रोटेक्शन के हेड नील डिक्रूज के मुताबिक, अगर हम इंसानों को मौत में मुंह में पहुंचाने वाली बीमारी के मामलों को रोकना चाहते हैं तो सबसे पहले चीन समेत दुनियाभर में इसकी जानवरों के व्यापार पर रोक लगानी होगी। 
हाल ही में चीन में एक लिस्ट वायरस हुई थी, जिसमें वुहान के बाजार में जानवरों से तैयार होने वाले उत्पादों की कीमते लिखी थीं। लिस्ट में लोमड़ी, मगरमच्छ, भेड़िए के बच्चे, सांप, चूहे, मोर, ऊंट के मांस समेत 112 जानवरों से बने उत्पादों का जिक्र था। 

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