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दिलचस्प खोज / दुनिया का पहला जीव जो सांस नहीं लेता, इसे जिंदा रहने के लिए ऑक्सीजन की भी जरूरत नहीं

यह इंसानों और दूसरे जीवों के लिए नुकसानदायक नहीं है। फोटो प्रतीकात्मक। यह इंसानों और दूसरे जीवों के लिए नुकसानदायक नहीं है। फोटो प्रतीकात्मक।
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यह इंसानों और दूसरे जीवों के लिए नुकसानदायक नहीं है। फोटो प्रतीकात्मक।यह इंसानों और दूसरे जीवों के लिए नुकसानदायक नहीं है। फोटो प्रतीकात्मक।

  • इजरायल की तेल-अवीव यूनिवर्सिटी ने खोजा जेली फिश जैसा दिखने वाला जीव
  • शोधकर्ताओं का दावा, इसमें दूसरे जीव की तरह माइटोकॉन्ड्रिल जीनोम नहीं जो सांस लेने के लिए जरूरी है

दैनिक भास्कर

Feb 26, 2020, 01:04 PM IST

हेल्थ डेस्क. वैज्ञानिकों ने जेलीफिश जैसा दिखने वाला ऐसा जीव (परजीवी) खोजा है जो सांस नहीं लेता। यह ऐसा पहला बहुकोशिकीय जीव है जिसमें माइट्रोकॉन्ड्रियल जीनोम नहीं है। यही वजह है कि जीव को जीवित रहने के लिए ऑक्सीजन की जरूरत नहीं है। लाल रुधिर कणिकाओं को छोड़कर इंसानों में मौजूद सभी कोशिशकाओं में काफी संख्या में माइट्रोकॉन्ड्रिया पाई जाती हैं जो सांस लेने की प्रक्रिया के लिए बेहद अहम हैं।

इसे इजरायल की तेल-अवीव यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं की टीम ने खोजा है। इसका वैज्ञानिक नाम हेन्नीगुया साल्मिनीकोला है। शोध के प्रमुख डयाना याहलोमी के मुताबिक, यह इंसानों और दूसरे जीवों के लिए नुकसानदायक कतई नहीं है।
 

जब तक मछली जिंदा तब तक ये जीवित

शोधकर्ता डोरोथी ह्यूचन के मुताबिक, अब तक रहस्य है कि यह जीव कैसे विकसित हुआ। यह साल्मन फिश में एक परजीवी के तौर पर पाया जाता है। मछली से ऊर्जा प्राप्त करता है लेकिन बिना उसे नुकसान पहुंचाए। दोनों के बीच ऐसा रिश्ता है जिसमें कोई किसी को नुकसान नहीं पहुंचाता। जब तक मछली जिंदा रहती है यह तब तक जीवित रहता है।

फ्लोरेसेंट माइक्रोस्कोप से देखने पर ऐसा दिखता है जीव।

जीव पर रिसर्च के दौरान वैज्ञानिकों ने इसे फ्लोरेसेंट माइक्रोस्कोप से देखा। इस दौरान हरे रंग के न्यूक्लिस तो दिखे लेकिन माइटोकॉन्ड्र्रियल डीएनए नहीं दिखा। एक ऐसा ही मामला 2010 में सामने आया था। इटली की पॉलिटेक्निक यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता रॉबर्टो डेनोवोरो इससे मिलता-जुलता जीव खोजा था। जब माइक्रोस्कोप से उसे देखा गया तो साफतौर पर माइटोकॉन्ड्रिया नहीं दिखाई दी लेकिन रिसर्च के दौरान पता चला कि वह गहरे समुद्र में सालों तक रह सकता है। उसकी ऊर्जा का सोर्स हाइड्रोजन सल्फाइड है। जबकि नए मिले जीव को हाइड्रोजन सल्फाइड की भी जरूरत नहीं है।

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