टिप्स / आ‌वाज़ में भारीपन से हैं परेशान तो बस अपनाएं ये आसान तरीके

If you are troubled by the heaviness in voice, just follow these simple methods
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If you are troubled by the heaviness in voice, just follow these simple methods

  • चाय और कॉफी का अधिक सेवन भी आपकी वोकल कोर्ड को कर सकता है खराब
  • वोकल नोड्यूल्स और पोलिप होने की आशंका पुरुषों की तुलना में महिलाओं में ज्यादा होती है

Dainik Bhaskar

Feb 13, 2020, 05:25 PM IST

लाइफस्टाइल डेस्क. आवाज व्यक्तित्व की पहचान होती है। तभी तो हम सभी चाहते हैं कि आवाज मीठी, मधुर और स्पष्ट हो। यदि आप ऐसे प्रोफेशन में हैं, जहां आपकी आवाज अहम भूमिका अदा करती है, जैसे टीचर, एडवोकेट, सेल्सपर्सन, गायक आदि तो आपकी आवाज में मधुरता बरकरार रखने के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है। आवाज में भारीपन के दो कारण हो सकते हैं। वोकल नोड्यूल्स और वोकल पोलिप। वोकल कॉर्ड में होने वाली ये दोनों समस्याएं आवाज खराब कर सकती हैं, उसमें भारीपन ला सती हैं। वोकल कॉर्ड नोड्यूल्स की समस्या पुरुषों की तुलना में महिलाओं में ज्यादा देखी जाती है। यह आमतौर पर 20 से 50 वर्ष की महिलाओं में होती है।

कैसे काम करती है हमारी वोकल कॉर्ड

हमारे गले में स्थित स्वरयंत्र में दो तारनुमा वोकल कॉर्ड होते हैं, जिनके आपस में मिलने से आवाज पैदा होती है। इनके सही कार्य करने से ही आवाज में मधुरता आती है। ये नाजुक संरचना है जो ज्यादा बेरुखी सहन नहीं कर पाती। लगातार और तेज बोलने से इनमें सूजन आ सकती है और वोकल नोड्यूल बन सकते है। जिससे आवाज खराब हो जाती है।

क्या है वोकल नोड्यूल और पोलिप

ये वोकल कोर्ड पर बनने वाले छोटे-छोटे दाने जैसे होते हैं, जो इसके अगले और मध्य भाग के जुड़ाव बिंदु पर प्रायः दोनों तरफ बनते हैं। नई या पुरानी समस्या के रूप में किशोरों और महिलाओं में ज्यादा होते हैं। विशेषकर ऐसे पेशे में जहां लगातार और तेज बोलने की जरूरत पड़ती है। जैसे टीचर्स। इसलिए इन्हें टीचर्स नोडयूल भी कहते हैं। आवाज में भारीपन का अन्य कारण वोकल पोलिप भी हो सकता है। इस अवस्था में आवाज में भारीपन के साथ-साथ बोलने में दर्द, बोलते हुए आवाज में जल्दी थकान महसूस होना या बीच-बीच में आवाज का फटना, गले में चुभन और असहज लगना जैसे लक्षण भी हो सकते हैं।

इन समस्याओं से ऐसे बचें

वोकल हाइजीन से जुड़ी कुछ ऐसी अच्छी आदतें हैं, जो आवाज की मधुरता बनाए रखने में सकारात्मक भूमिका अदा करती है। लंबे समय तक लगातार बोलने से बचें और चिल्लाएं नहीं। अगर ज्यादा बोलने का काम है तो बीच-बीच कुछ घूंट पानी पीते रहें। अनावश्यक गले को खांस-खांसकर साफ करने की आदत से भी बचना चाहिए। पर्याप्त पानी पीएं। संतुलित और संयमित खानपान रखें। पेट का एसिड रिफ्लेक्स भी गले में पहुंचकर वोकलकाॅर्ड को नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए एसिडिटी का ख्याल रखना भी जरूरी है। जब बहुत सारे लोगों को संबोधित करना है, तो बेहतर यह है कि आप माइक का प्रयोग जरूर करें। यदि बैकग्राउंड में कोई तेज शोर हो रहा है तो अपनी बात पहुंचाने के लिए उसका मुकाबला न करें। कैफीन युक्त पदार्थ जैसे चाय काॅफी और कोला आदि का जरूरत से ज्यादा मात्रा में सेवन भी वोकल नोड्यूल्स और पोलिप की आशंका बढ़ाता है। भाप का प्रयोग भी इस अवस्था में लाभकारी है। स्पीच थैरेपी से उचित ढंग से बोलने का अभ्यास भी कराया जाता है। समस्या ज्यादा होने पर कई बार नोडयूल्स को माइक्रोलेरिंजियल सर्जरी से हटाया जाता है।

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