पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • Happylife
  • Health Trend In 2020 Sugar Will Control New Combination Therapy, Robots Will Not Need Surgeon On Console For Surgery

शुगर नियंत्रित करेगी नई कॉम्बिनेशन थैरेपी, रोबोट्स को सर्जरी के लिए कंसोल पर सर्जन की जरूरत नहीं रहेगी

2 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक

डॉ. वेदप्रकाश मिश्रा, मेडिकल क्षेत्र के वरिष्ठ शिक्षाविद्
अगर व्यक्तिगत स्तर पर देखें तो सबसे ज्यादा जागरूकता बीते वर्षों में अगर किसी क्षेत्र में आई है तो वह स्वास्थ्य क्षेत्र ही है। यही वजह है कि सेल्फ यूज डिवाइसेज का बाजार लगातार बढ़ता जा रहा है। यह पहल तो परिवार के स्तर की है। सरकार भी आयुष्मान योजना के जरिये इसे बढ़ावा देने में जुटी है।
दरअसल, अभी तक आयुष्मान योजना का एक पक्ष ही ज्यादा चर्चित हुआ है। योजना के तहत अभी तक देश की करीब 40 फीसदी आबादी यानी 50 करोड़ लोगों को पांच लाख रुपए तक का कैशलेस इलाज सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों के जरिये दिया जा रहा है। लेकिन, इस योजना के तहत 2022 के लिए एक अहम लक्ष्य भी रखा गया है।
2020 में इसी लक्ष्य पर सबसे ज्यादा जोर देखा जाएगा। 2022 तक देश के सभी उप स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) को हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के रूप में बदला जाएगा। यानी यहां तैनात स्वास्थ्य विभाग का अमला घर-घर जाकर 30 से अधिक आयु के लोगों में ब्लडप्रेशर व डायबिटीज जैसी पांच प्रमुख बीमारियों का परीक्षण करेगा। देश में अभी ऐसे 26 हजार केंद्र हैं। 2020 में यह संख्या 60 हजार तक पहुंच जाएगी। 
भारत यूं भी लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियों की राजधानी बनता जा रहा है। भारत में चीन के बाद डायबिटीज के सर्वाधिक मरीज हैं। इंटरनेशनल डायबिटीज फेडरेशन के आंकड़ों के अनुसार-भारत में 2020 तक डायबिटीज के आठ करोड़ मरीज और बढ़ जाएंगे। हालांकि, एक बड़ी उपलब्धि भी इस क्षेत्र में देखने को मिल सकती है। डायबिटीज के इलाज में सबसे असरदार इंसुलिन है। इसके अलावा एक हारमोन जीएलपी1 शुगर लेवल को कंट्रोल करने में अहम भूमिका निभाता है। 2020 में इन दोनों के कॉम्बिनेशन वाली थैरेपी सबसे असरदार रहेगी।
इतना ही नहीं, मरीज अपने शुगर लेवल को मोबाइल पर नियमित ग्लूकोज मॉनिटरिंग सिस्टम के जरिए लाइव चेक कर पाएंगे। यह तकनीक अब जेब के दायरे में आने लगी है। इंसुलिन पर निर्भर मरीजों को हाइपोग्लाइसिमिया यानी अचानक ब्लड शुगर गिरने का डर बना रहता है। उनके लिए एक नैसल ड्रॉप आने वाली है, यानी नाक में दवा की बूंद डाली और ग्लूकोज लेवल नॉर्मल हो जाएगा।
2020 में सरकार स्टैम सेल थैरेपी के लिए गाइडलाइन लाने वाली है। सरकार री-जेनेरेटिव मेडिसीन्स को दो भागों में बांटने वाली है। पहली- स्टेम सेल से बनी दवाएं। दूसरा- मरीज के ही सेल्स के जरिये होने वाली मेडिसनल प्रोसीजर्स। इसमें मरीजों के ही सेल्स को एक भाग से लेकर दूसरे भाग में ट्रांसफर किया जाएगा। इससे कैंसर, थैलेसीमिया जैसी कई बीमारियों के इलाज में मदद मिलेगी। सरकार ने नवंबर 2019 में ही जीन थैरेपी के लिए गाइडलाइंस जारी की हैं।
स्टार यानी स्मार्ट टिश्यू ऑटोनॉमस रोबोट्स। ये 2020 का सबसे बड़ा इनोवेशन साबित होंगे। यानी रोबोट्स को अब सर्जरी के लिए कंसोल पर सर्जन की भी जरूरत नहीं रहेगी। वे आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के जरिये जटिल सर्जरी भी कर पाएंगे। इनफर्टिलिटी के लिए भी रोबोटिक सिस्टम आने वाला है। यह साल एआई के नाम रहने वाला है।
रोबोटिक सर्जरी में तो यह मदद कर ही रही है। इसके अलावा बीमारियों की पहचान, लक्षणों को समझने, इलाज, मॉनिटरिंग, क्लीनिकल ट्रायल जैसी प्रक्रियाओं में यह ट्रेंड बनने वाला है। सर्जिकल रोबोट्स ऑपरेशन थिएटर्स में अपनी जगह पक्की कर ही चुके हैं। स्मार्ट वॉच, वियरेबल टेक डिवाइसेज के जरिये हार्ट मॉनिटरिंग, ईसीजी और ब्लड प्रेशर जैसे काम लिए जा रहे हैं। एक्सरे और रेटिना के परीक्षण में भी इसका इस्तेमाल बढ़ने वाला है। 
टीकाकरण अभियान के तहत सरकार दो टीकों पर सबसे ज्यादा जोर देने वाली है। पहला- रोटावायरस।  क्योंकि चालीस हजार जानें हर साल सिर्फ डायरिया की वजह से जाती हैं। दूसरा-न्यूमोकोक्कोल। निमोनिया से बचाने के लिए 2020 में 2.6 करोड़ बच्चों को ये दवा दी जाएगी। 
2020 में सेल्फ यूज डिवाइसेज यानी बीपी, शुगर मापने वाले उपकरणों का बाजार बढ़ सकता है। माना जा रहा है कि 2022 तक भारत का हेल्थकेयर 372 अरब अमेरिकी डॉलर का हो जाएगा। ऐसा स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ने, मेडिकल बीमा कवर और लाइफ स्टाइल से उपजी बीमारियों के कारण होगा। सिर्फ मेडिकल टूरिज्म की ही बात करें तो 2020 में करीब 20 से 25 फीसदी तक वृद्धि होने का अनुमान है। यानी लगभग नौ अरब अमेरिकी डॉलर देश में आएंगे। 
21वीं सदी का 20वां साल बच्चों की सेहत को लेकर भी फिक्रमंद नजर आएगा। प्रभावी टीकाकरण अभियान के जरिये सरकार ने स्माल पॉक्स और पोलियाे पर तो लगाम लगा दी, लेकिन डेंगू और इंफ्ल्यूएंजा अभी भी नियंत्रण से बाहर हैं।
उम्मीद की जा सकती है कि इन दोनों बीमारियों की रोकथाम पर इस साल सबसे ज्यादा मेहनत की जाएगी। जेनेटिक डिसऑर्डर पर पहले से मॉनिटरिंग की कवायद के चलते बच्चे ज्यादा सेहतमंद हो पाएंगे।

खबरें और भी हैं...