नौकरी दिलाने में दोस्तों के परिचित दोगुने मददगार:आपस में भले सीधा संबंध न हो, पर उनमें भी ताकत; 2 करोड़ लोगों पर हुई रिसर्च

सिडनी5 दिन पहले
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नई नौकरी पाने में आपके दोस्तों से ज्यादा उनके दोस्त या परिचित मददगार होते हैं। वे लोग जिनसे आपकी जान-पहचान तो होती है, लेकिन वे आपके अच्छे दोस्तों की लिस्ट में नहीं होते, नौकरी दिलाने में उनका योगदान सबसे ज्यादा होता है। 2 करोड़ से ज्यादा लोगों पर हुई स्टडी में यह बात सामने आई है।

साइंस जर्नल में प्रकाशित एक रिसर्च के मुताबिक, ऑनलाइन जॉब सर्च प्लेटफॉर्म पर अपने दोस्तों से ज्यादा उन्हें अप्रोच करना चाहिए जो आपसे महज थोड़ा-बहुत परिचित हों। शोध से पता चला है कि कमजोर या दूर के संबंधों में भी एक खास तरह की ताकत होती है।

दूर के परिचित ज्यादा मददगार होते हैं
1973 में अमेरिकन समाजशास्त्री मार्क ग्रैनोवेटर ने सोशल नेटवर्क के सिलसिले में यह टर्म दिया। उनका तर्क था कि दो व्यक्तियों के बीच जितनी ज्यादा बॉन्डिंग रहेगी, उनके परिचितों की संख्या उतनी ही ज्यादा बढ़ती जाएगी। वे उदाहरण देते हैं- आपके दोस्तों के दोस्तों से ज्यादा बातचीत नहीं होती और उनके दोस्त तो मुश्किल से आपके परिचित हो पाते हैं।

आपके दोस्तों की क्षमताओं और पहुंच आपको पता होती है, लेकिन आपके परिचितों के पास कई मौके होते हैं, जिनका आपको पता नहीं होता। जॉब प्लेटफॉर्म पर वे परिचित आपकी ज्यादा मदद कर पाते हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी, सिडनी के बिहेवियरल डेटा साइंस के वरिष्ठ लेक्चरर मेरियन आंद्रेई रीजोऊ कहते हैं, अब तक समझा जाता रहा है कि दोस्त नौकरी दिलाने में सबसे ज्यादा योगदान देते हैं, लेकिन यह सही नहीं है।

ऐसे हुई रिसर्च
जॉब सर्च प्लेटफॉर्म पर वे ज्यादा मददगार होते हैं, जिनसे ज्यादा बातचीत नहीं होती। लिंक्डइन, हार्वर्ड बिजनेस स्कूल, स्टैनफोर्ड और मेसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के रिसर्चर्स ने कमजोर संबंधों की ताकत जानने के लिए शोध किया।

उन्होंने इंजीनियर्स की नौकरी तलाशने की प्रक्रिया को स्टडी किया। इसके लिए ‘पीपल यू मे नो’ एलगोरिदम का इस्तेमाल किया। दो वर्ग बनाए। एक जो ऑनलाइन भी अपने दोस्तों से ही कनेक्ट हुए और दूसरे वे जो अपने परिचितों और अपरिचितों से कनेक्ट हुए।

नौकरी की तलाश पर शोध में तीन फैक्ट्स सामने आए

  • परिचितों से लिंक्डइन पर भी गहरे संबंध नहीं बने। इसका नुकसान होने की बजाय फायदा ही हुआ। जिनसे अच्छे संबंध थे, उनसे मजबूत संबंधों का कोई खास फायदा नहीं हुआ।
  • नई नौकरी ढूंढ़ने में दोस्तों की तुलना में परिचितों से दोगुनी मदद मिली। जिनसे शायद ही कभी बात की हो या फिर ज्यादा से ज्यादा 10 म्यूचुअल फ्रेंड हैं, उन्होंने ज्यादा नौकरी दिलाई।
  • जिस सेक्टर में डिजिटलीकरण हुआ है, वहां कमजोर संबंधों का फायदा मिला। लेकिन कम डिजिटलीकरण वाले सेक्टर में मजबूत संबंध यानी करीबी दोस्तों ने नौकरी दिलाने में मदद की।
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