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अंटार्कटिका में आए 85,000 भूकंप:ये अंटार्कटिका में आने वाले अब तक के सबसे खतरनाक भूकंप, पानी के नीचे का ज्वालामुखी है वजह

7 महीने पहले
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अंटार्कटिका में साल 2020 में 4 महीने के अंतराल में लगभग 85 हजार भूकंप आए थे। यह खुलासा GFZ जर्मन रिसर्च सेंटर फॉर जियोसाइंस ने अपनी एक नई रिसर्च में किया है। दरअसल, अंटार्कटिका में पानी के नीचे एक सोया हुआ ज्वालामुखी जाग गया था, जिससे वहां की धरती कांप उठी थी।

दो बड़े भूकंप से कांपी अंटार्कटिका की धरती

वैज्ञानिकों का कहना है कि ये भूकंप अगस्त 2020 में शुरू हुए और नवंबर 2020 तक आते रहे।
वैज्ञानिकों का कहना है कि ये भूकंप अगस्त 2020 में शुरू हुए और नवंबर 2020 तक आते रहे।

वैज्ञानिकों का कहना है कि ये भूकंप अगस्त 2020 में शुरू हुए और नवंबर 2020 तक आते रहे। इनमें सबसे बड़े दो भूकंप की तीव्रता 5.9 और 6 थी। इन भूकंप की वजह से अंटार्कटिका में स्थित किंग जॉर्ज आइलैंड अपनी जगह से 4.3 इंच खिसक गया है। ये अंटार्कटिका में रिकॉर्ड किए गए अब तक के सबसे खतरनाक भूकंप हैं। रिसर्चर्स की मानें तो ऐसी आपदाएं पृथ्वी के कई हिस्सों में देखी जा चुकी हैं, लेकिन पहली बार ये एक्टिविटी अंटार्कटिका में हुई।

पृथ्वी पर एक साथ ऐसी एक्टिविटीज होना दुर्लभ

रिसर्च में शामिल डॉ. समोन चेस्का ने लाइव साइंस वेबसाइट से बातचीत में बताया कि धरती पर होने वाली ऐसी एक्टिविटीज इंसान को अपने जीवनकाल में मुश्किल से देखने को ही मिलती है। चेस्का के मुताबिक, हम बहुत भाग्यशाली हैं जो अंटार्कटिका में आए हजारों भूकंप को देखने में कामयाब रहे।

अंटार्कटिका की धरती में पैदा हो रहे फॉल्ट जोन्स​​​​​​​

वैज्ञानिकों के अनुसार, धरती पर होने वाली ऐसी एक्टिविटीज इंसान को अपने जीवनकाल में मुश्किल से देखने को ही मिलती है।
वैज्ञानिकों के अनुसार, धरती पर होने वाली ऐसी एक्टिविटीज इंसान को अपने जीवनकाल में मुश्किल से देखने को ही मिलती है।

बता दें कि ये भूकंप ओर्का सीमाउंट ज्वालामुखी के आसपास के इलाकों में आए थे। यह ज्वालामुखी ब्रेंसफील्ड जलसंधि (Bransfield Strait) के समुद्र तल से 900 मीटर की ऊंचाई पर है। यह अंटार्कटिका के उत्तर पश्चिमी छोर पर पड़ता है।

पोलर साइंस जर्नल में प्रकाशित 2018 की एक रिसर्च के अनुसार, अंटार्कटिक महाद्वीप की टेक्टोनिक प्लेट के नीचे फीनिक्स टेक्टोनिक प्लेट तैर रही है। इसके चलते ही इलाके में फॉल्ट जोन्स बन रहे हैं और कुछ हिस्सों में दरारें पैदा होकर खिंचाव आ रहा है।

रिसर्च के लिए लोकल भूकंप स्टेशंस के आंकड़े देखे

रिसर्च टीम ये जानना चाहती थी कि अंटार्कटिका के किंग जॉर्ज आइलैंड पर किस तरह की गतिविधियां हो रही थीं। मगर जगह दूर होने के चलते चेस्का और उनके साथियों ने ग्लोबल सैटेलाइट नैविगेशन सिस्टम के लिए दो लोकल भूकंप स्टेशंस समेत दूसरे भूकंप स्टेशंस के आंकड़ों का इस्तेमाल किया।

ज्वालामुखी पर विस्फोट हुआ, ये बता पाना मुश्किल

धरती पर होने वाली ऐसी एक्टिविटीज इंसान को अपने जीवनकाल में मुश्किल से देखने ही मिलती है।
धरती पर होने वाली ऐसी एक्टिविटीज इंसान को अपने जीवनकाल में मुश्किल से देखने ही मिलती है।

वैज्ञानिकों का कहना है कि पानी के अंदर ज्वालामुखी के जागने पर कोई विस्फोट हुआ है कि नहीं, फिलहाल ये बता पाना मुश्किल है। माना जा रहा है कि अंटार्कटिका के पानी के नीचे का ज्वालामुखी अभी केवल विस्फोट की कगार पर है।

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