बच्चे दो ही अच्छे:रिसर्च में दावा- तीन या ज्यादा बच्चे होने पर जल्दी बूढ़े होते हैं पेरेंट्स; इसकी 2 बड़ी वजहें

7 महीने पहले
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अगर आप दो से ज्यादा बच्चों के पेरेंट्स हैं तो आप दो या कम बच्चों वाले माता-पिता के मुकाबले ज्यादा तेजी से बूढ़े हो रहे हैं। कोलंबिया यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने रिसर्च में दावा किया है कि 3 या उससे ज्यादा बच्चों वाले अभिभावक अपनी असल उम्र से 6.2 साल ज्यादा बूढ़े हो जाते हैं। रिसर्च में तेजी से बूढ़ा होने की वजह बच्चों को पालने की चिंता और आर्थिक भार को बताया गया है।

65 प्लस उम्र वालों पर हुई रिसर्च

नतीजे कहते हैं कि तनाव और आर्थिक भार की वजह से पेरेंट्स की एजिंग प्रोसेस तेज हो जाती है।
नतीजे कहते हैं कि तनाव और आर्थिक भार की वजह से पेरेंट्स की एजिंग प्रोसेस तेज हो जाती है।

इस रिसर्च के लिए वैज्ञानिकों ने यूरोप के हेल्थ, एजिंग और रिटायरमेंट सर्वे (SHARE) के डेटा को एनालाइज किया। इस डेटाबेस में 65 साल या उससे ज्यादा की उम्र के हजारों लोगों का डेटा मौजूद है। ये सभी लोग कम से कम दो बच्चों के पेरेंट्स हैं और यूरोप के 20 देशों या इजराइल के रहने वाले हैं।

रिसर्च के नतीजे कहते हैं कि अतिरिक्त बच्चे होने से मां-बाप पर भी ज्यादा जिम्मेदारियां आ जाती हैं। बढ़ते तनाव और आर्थिक भार की वजह से उनकी एजिंग प्रोसेस तेज हो जाती है, जिससे वे जल्दी बूढ़े हो जाते हैं।

मेमोरी और फैसला लेने की क्षमता पर पड़ता है असर

पेरेंट्स की कॉग्निटिव फंक्शनिंग पर तीन या उससे ज्यादा बच्चे होने का नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
पेरेंट्स की कॉग्निटिव फंक्शनिंग पर तीन या उससे ज्यादा बच्चे होने का नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

फ्रांस की पैरिस डौफीन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डॉ. एरिक बोनसांग के मुताबिक, पेरेंट्स की कॉग्निटिव फंक्शनिंग पर तीन या उससे ज्यादा बच्चे होने का नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। कॉग्निटिव फंक्शनिंग का मतलब माता-पिता की मेमोरी, फोकस करने की क्षमता, बुद्धि, फैसले लेने की क्षमता आदि से है। यह असर पुरुषों और महिलाओं में एक जैसा ही होता है।

ज्यादा बच्चों की वजह से लिविंग स्टैंडर्ड प्रभावित होता है

ज्यादा बच्चे होने से फैमिली इनकम घटती है, जिससे मेंटल हेल्थ भी खराब हो सकती है।
ज्यादा बच्चे होने से फैमिली इनकम घटती है, जिससे मेंटल हेल्थ भी खराब हो सकती है।

रिसर्चर्स का मानना है कि अतिरिक्त बच्चा होने से पेरेंट्स का ज्यादा खर्चा होता है, जिससे उनकी फैमिली इनकम घटती है। यह उन्हें गरीबी रेखा के नीचे भी ला सकता है। जीवन का स्तर इस तरह गिरने के कारण ही उनकी कॉग्निटिव फंक्शनिंग धीमी होने की आशंका होती है। इसके अलावा आराम न कर पाने और मेंटल हेल्थ को बेहतर बनाने की एक्टिविटीज में शामिल न होने से पेरेंट्स का बुढ़ापा जल्दी आता है।

तीन बच्चे बुढ़ापे का खर्च भी बढ़ाते हैं

दो से ज्यादा बच्चे कॉग्निटिव हेल्थ खराब करते हैं, जिससे सेहत पर खर्च बढ़ता है।
दो से ज्यादा बच्चे कॉग्निटिव हेल्थ खराब करते हैं, जिससे सेहत पर खर्च बढ़ता है।

रिसर्च में कहा गया है कि बुढ़ापे में सोशली एक्टिव रहने और अपनी स्वतंत्रता बनाए रखने के लिए कॉग्निटिव हेल्थ का ख्याल रखना जरूरी है। हालांकि, दो से ज्यादा बच्चे कॉग्निटिव हेल्थ खराब करते हैं, जिससे सेहत पर खर्च बढ़ता है। बूढ़े लोगों की काम करने की क्षमता को बढ़ाने और हेल्थकेयर के खर्चे को कम करने के लिए उनकी कॉग्निटिव हेल्थ पर ध्यान देना चाहिए।

फिलहाल वैज्ञानिक यह भी जानने की कोशिश कर रहे हैं कि लोगों पर एक बच्चा होने या न होने का क्या असर पड़ता है।

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