ज्यादा महत्वाकांक्षी होने से अशांति बढ़ती है:छोटे लक्ष्य तय करें, ये आपको खुशी देंगे और लंबे वक्त में तरक्की भी

वॉशिंगटन7 दिन पहले
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लेखक: जैमी दुचारमे

अगर 8 घंटे की नौकरी में 12-15 घंटे गुजरने लगें, परिवार और रिश्तेदारों के लिए समय न हो, आप अपने शौक भी पूरे न कर पा रहे हों, तो समझिए आप अति महत्वाकांक्षा का शिकार हो चुके हैं। ऐसे लोग पेशेवर सफलता के लिए मानसिक शांति और शारीरिक स्वास्थ्य दोनों खो देते हैं।

अमेरिका में मानसिक स्वास्थ्य पर इसी साल यूएस सर्जन जर्नल की अक्टूबर में आई रिपोर्ट कहती है- अब ज्यादातर अमेरिकियों को लगता है कि पेशेवर सफलता के लिए की जा रही भागदौड़ से जिंदगी खराब हो रही है। कोरोना महामारी के बाद लोगों में काम के प्रति सोच बदली है। इसलिए कोई बड़ा लक्ष्य तय करके उसके पीछे भागते जाने और अपने परिवार को भी भुला देने से बेहतर है कि जीवन के छोटे-छोटे लक्ष्य तय करें। उन्हें हासिल करने का सुख महसूस करें।

क्लिनिकल मनोविज्ञानी रिचर्ड रेयान कहते हैं, किसी चीज को पाने की महत्वाकांक्षा तब तक तो ठीक है, जब तक उससे आपकी निजी जिंदगी के दूसरे पहलू प्रभावित नहीं होते। पेशेवर लोग पद की चाह में इतनी भागदौड़ करते हैं कि जिंदगी में मायने रखने वाली दूसरी जरूरी चीजें भूल जाते हैं। इससे वे डिप्रेशन का शिकार भी होते हैं।

रुचि देखिए, मिलने वाला रिवॉर्ड नहीं

शोध कहते हैं, किसी चीज के लिए मिलने वाला इनाम जैसे कैश रिवॉर्ड्स उसके लिए आंतरिक प्रेरणा खत्म कर देती है। जैसे साइकिल चलाने के लिए अगर कोई ऐप रिवॉर्ड दे रहा है और साइकिल चलाना आपकी हॉबी है तो धीरे-धीरे आप इसमें रुचि खो देंगे।

विकास के साथ सुकून भी होना चाहिए
टीम जज कहते हैं, जीवन में तरक्की जरूरी है। आगे बढ़ने की कोशिश करते रहना भी जरूरी है। नई चीजें सीखिए, लेकिन किसी खास नौकरी या सैलरी या जगह को तरक्की मान लेने की सोच बदलिए। आप विकास भी करेंगे और सुकून से भी रहेंगे।

अपने परिवार और रिश्तों को महत्व दें
रेयान कहते हैं, पेशेवर जिंदगी की उपलब्धियां बांटने के लिए भी रिश्तों की जरूरत होती है। इसलिए परिवार को समय दें। जो दूर हैं, उन्हें फोन करें। उन्हें बताएं कि आपको उनकी फिक्र है। पारिवारिक रिश्ते खराब कर मिली सफलता आपको मानसिक तनाव ही देगी।

प्रमोशन-सैलरी के लिए काम मत कीजिए
शोध बताते हैं कि आप अपना काम पूरा करने पर ध्यान दें, बजाय ये सोचने के कि उससे आपको क्या मिलेगा तो आप ज्यादा संतुष्ट रहेंगे। प्रमोशन या सैलरी बढ़ाने के लिए किया गया काम पूरा होने के बाद भी आपको संतुष्टि नहीं मिलेगी।

ध्यान करिए और शुक्रमंद रहिए
कई अलग-अलग शोध से पता चला है कि जो लोग रोज ध्यान करते हैं, वे खुद से संतुष्ट रहते हैं। ऐसे लोग सुकून के साथ तरक्की हासिल करते हैं। हमेशा शुक्रमंद रहिए।

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