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वायरस का कॉकटेल रोकेगा ओमिक्रॉन:एक्सपर्ट्स ने सुझाया फॉर्मूला- वुहान का वाइल्ड वायरस और ओमिक्रॉन को मिक्स करके बनाएं सुपर वैक्सीन

9 महीने पहले

कोरोनावायरस के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन को रोकने के लिए एक्सपर्ट ने सुपर वैक्सीन का फॉर्मूला सुझाया है और इसे नाम दिया है बाईवेलेंट वैक्सीन। एक्सपर्ट का मानना है कि ओमिक्रॉन की संक्रामकता और म्यूटेशन को देखते हुए बूस्टर डोज भी इसे रोक नहीं पाएगी। जरूरत एक ऐसी वैक्सीन की है, जिसमें वुहान का वाइल्ड वायरस हो और ओमिक्रॉन वैरिएंट भी।

एक्सपर्ट ने तर्क दिया कि अमेरिका से भारत लौटा एक व्यक्ति ओमिक्रॉन से संक्रमित हो गया। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि उसने कोरोना की दोनों डोज के अलावा बूस्टर डोज भी ले रखी थी।

अमेरिका की फाइजर कंपनी ने तो वैक्सीन के चौथे डोज यानी दूसरे बूस्टर की पेशकश कर दी है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि ओमिक्रॉन के लिए बूस्टर से बेहतर बाईवेलेंट वैक्सीन है, जो एक साथ दो वायरस पर अटैक करने में सक्षम होती है। यह चर्चा तब शुरू हुई है, जब विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने चेताया है कि कम्युनिटी ट्रांसमिशन के चलते ओमिक्रॉन के केस 3 दिनों में दोगुने हो रहे हैं।

तीन डोज के बाद भी ओमिक्रॉन से सुरक्षा क्यों नहीं?
अमेरिका से मुंबई लौटा 29 साल का युवक जब ओमिक्रॉन से संक्रमित मिला तो उससे जुड़ी एक बात ने विशेषज्ञों को चौंका दिया। युवक ने वैक्सीन के दो डोज के साथ-साथ बूस्टर डोज भी ले रखा था। इससे यह सवाल उठता है कि वैक्सीन के तीन डोज लेने के बाद भी वह वायरस से सुरक्षित क्यों नहीं था?

दुनिया में मौजूद ज्यादातर वैक्सीन कोरोना वायरस के मूल रूप के स्पाइक प्रोटीन को ध्यान में रखकर बनाई गई थीं। पिछले दो साल में इस प्रोटीन में कई म्यूटेशंस हो चुके हैं। सिर्फ ओमिक्रॉन वैरिएंट के स्पाइक प्रोटीन में ही 36 म्यूटेशंस हैं।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि इन म्यूटेशंस के कारण पुरानी वैक्सीन्स हमें ओमिक्रॉन से नहीं बचा सकतीं। ये केवल गंभीर लक्षणों को कम करने और इम्यूनिटी को थोड़ा सा बढ़ाने में कारगर हैं। दूसरी लहर में भी डेल्टा वैरिएंट के साथ यही हुआ था। चूंकि ये कोरोना का मूल रूप नहीं था, वैक्सीन इसका संक्रमण नहीं रोक पाई थीं।

बाईवेलेंट पर एक्सपर्ट का जोर क्यों है?

एक्सपर्ट्स के अनुसार, वैक्सीन इंडस्ट्री को बूस्टर शॉट्स की जगह एक ऐसी बाईवेलेंट वैक्सीन बनानी चाहिए, जो कोरोना वायरस के मूल रूप (SARS-CoV-2) और ओमिक्रॉन वैरिएंट दोनों पर एक साथ कारगर हो। बाईवेलेंट ऐसी वैक्सीन होती है, जो दो अलग-अलग बैक्टीरिया या वायरस के खिलाफ शरीर की इम्यूनिटी बढ़ाती है। इसके इस्तेमाल से इंसान की इम्यूनिटी तेजी से बढ़ेगी और ओमिक्रॉन संक्रमण को रोकने में आसानी होगी।

मिड-डे अखबार से बात करते हुए एक्सपर्ट डॉ. विकार शेख ने बताया कि खबरों के उलट, डेल्टा की तरह कोरोना का नया वैरिएंट भी मरीजों को अस्पताल पहुंचाता है। इससे मौतें होने का खतरा भी है। साथ ही, ओमिक्रॉन डेल्टा वैरिएंट की तुलना में ज्यादा तेजी से फैलता है और मरीज के शरीर की एंटीबॉडीज से बचकर निकलने में सक्षम है।

डॉ. शेख कहते हैं कि वैक्सीन के बूस्टर डोज की चर्चा बेतुकी है। तीसरा शॉट ओमिक्रॉन से बचाएगा ही, इसका कोई वैज्ञानिक सबूत नहीं है। न ही इसके लिए ठीक से ट्रायल किए गए हैं। WHO ने भी अब तक बूस्टर डोज का समर्थन नहीं किया है।

कंपनियों ने ओमिक्रॉन के लिए नई वैक्सीन पर काम शुरू किया
वैक्सीन बनाने वाली फाइजर, मॉडर्ना, एस्ट्राजेनेका और जॉनसन एंड जॉनसन कंपनियों ने ओमिक्रॉन पर काम करना शुरू कर दिया है। डॉ. शेख के मुताबिक यदि बूस्टर डोज कारगर होता तो ये कंपनियां नई वैक्सीन बनाने पर जोर नहीं देतीं। उनके अनुसार आने वाले समय में कोरोना वैक्सीन को हर एक साल में लगाने की सलाह दी जा सकती है।

बूस्टर डोज पर क्या कहती है भारत सरकार?
भारत सरकार ने भी अब तक वैक्सीन के तीसरे डोज यानी बूस्टर को हरी झंडी नहीं दी है। नीति आयोग के एक हालिया बयान के मुताबिक सबसे पहले भारत में सभी लोगों को पूरी तरह वैक्सीनेट करना सरकार की प्राथमिकता है।