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घर पर कोरोना मरीजों की होगी मॉनिटरिंग:वैज्ञानिकों ने बनाया 'पैच', इसे सीने पर लगाएं और मोबाइल में देखें ऑक्सीजन लेवल और हार्ट रेट; हॉस्पिटल से डॉक्टर मरीजों की करेंगे देखरेख

11 दिन पहले
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  • शिकागो यूनिवर्सिटी और डिजिटल मेडिसिन स्टार्टअप PhysIQ ने मिलकर तैयार पैच
  • कहा, शरीर में ऑक्सीजन का लेवल गिरने पर डॉक्टर्स को अलर्ट भेजता है

अमेरिकी वैज्ञानिकों ने खास तरह का सेंसर विकसित किया है जो कोरोना के मरीजों को घर बैठे ही लक्षणों पर नजर रखने में मदद करेगा। सेंसर को खास तरह के पैच में कंवर्ट किया गया है। जिसे मरीज सीने पर लगाता है। पैच एक मोबाइल से कनेक्ट रहता है, जिससे रियल टाइम में ऑक्सीजन लेवल और हार्ट रेट स्क्रीन पर देखा जा सकता है।

हालत बिगड़ने से पहले डॉक्टर्स कर सकेंगे अलर्ट
इस सेंसर को अमेरिका की शिकागो यूनिवर्सिटी और डिजिटल मेडिसिन स्टार्टअप PhysIQ ने मिलकर तैयार किया है। यह सेंसर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लैस है।

रिसर्च के मुताबिक, इस सेंसर की मदद से मरीज की देखरेख दूर हॉस्पिटल में बैठे डॉक्टर कर सकते हैं। शरीर में बदलाव दिखने पर हालत बिगड़ने से पहले मरीज को अलर्ट कर करते हैं। उन्हें समय पर हॉस्पिटल में भर्ती किया जा सकेगा। इससे मरीज बेवजह भीड़भाड़ से बचेंगे और संक्रमण बढ़ने से हालत बिगड़ने का खतरा भी घटेगा।

ऐसे काम करता है सेंसर वाला पैच
रिपोर्ट के मुताबिक, रिसर्च में शामिल हर मरीज को यह सेंसर पैच दिया गया। इसमें पल्स ऑक्सीमीटर और सेंसर है। सेंसर मोबाइल फोन में मौजूद ब्लूटूथ से कनेक्ट रहता है। ऑक्सीजन या हार्ट रेट में होने वाले बदलाव को मोबाइल पर देखा जा सकता है। इसमें गड़बड़ी होने पर डॉक्टर्स के पास मैसेज जाता है।

हालत बिगड़ने पर मरीज को मिला अलर्ट
59 साल की एंजेला मिशेल पेशे से फार्मेसी टेक्नीशियन हैं। एंजेला जुलाई, 2020 में कोरोना से संक्रमित हुई। उन्हें आइसोलेट किया गया और यह पैच लगाया गया।

एंजेला कहती हैं, दो रातों तक आइसोलेशन में रहने के बाद सांस लेने में दिक्कत हुई। सुबह उठने पर उन्हें सांस लेने में दिक्कत हुई। जब बाथरूम में नहाने गईं तो पसीना छूटने लगा। ऐसी हालत में बाथरूम में ही बैठ गईं। तभी फोन बजा। हॉस्पिटल से फोन आया कि उनकी हालत को मॉनिटर किया जा रहा है। डॉक्टर्स ने उन्हें तत्काल इमरजेंसी में भर्ती होने की सलाह दी।

एंजेला के हॉस्पिटल न पहुंचने पर अगले दिन फिर डॉक्टर का कॉल आया। बताया गया कि अगर वो हॉस्पिटल नहीं आ सकतीं तो उन्हें लेने के लिए एम्बुलेंस भेजी जाएगी। हॉस्पिटल में भर्ती होने पर पता चला कि उनका ऑक्सीजन लेवल गंभीर स्तर तक नीचे गिर गया है।

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