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लॉन्ग कोविड का खतरा अभी टला नहीं:क्या ओमिक्रॉन के माइल्ड लक्षणों के साथ भी हो सकता है लॉन्ग कोविड? जानिए विशेषज्ञों की राय

21 दिन पहले
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भारत में कोरोना की तीसरी लहर आ गई है। इसका कारण ओमिक्रॉन वैरिएंट के तेजी से फैलते संक्रमण को माना जा रहा है। वैसे तो इस वैरिएंट को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने खतरनाक बताया है, पर ये डेल्टा वैरिएंट की तरह मरीजों को गंभीर रूप से बीमार नहीं करता। ऐसे में ये सवाल उठ रहा है कि क्या ओमिक्रॉन से संक्रमित व्यक्ति को लॉन्ग कोविड होने का खतरा है? विशेषज्ञों के अनुसार, इस सवाल का जवाब हां है।

पहले जान लें, क्या होता है लॉन्ग कोविड?

लॉन्ग कोविड या पोस्ट-कोविड सिंड्रोम कोरोना से संक्रमित हुए लोगों को 4 से 5 हफ्ते बाद होता है। इस स्थिति में लोगों को कोरोना से रिकवर होने के बाद भी थकान, बुखार, गंध न आना, सिर दर्द आदि की शिकायत होती है। यानी भले ही शरीर से वायरस निकल गया हो, उसके लक्षण खत्म नहीं होते। दोबारा कोरोना की जांच करवाने पर भी टेस्ट रिजल्ट नेगेटिव आता है। लॉन्ग कोविड से होने वाली परेशानियां कुछ महीने या साल भर भी लोगों को परेशान कर सकती हैं।

लॉन्ग कोविड में लोगों को कोरोना रिकवरी के बाद भी थकान, बुखार, सिर दर्द आदि की शिकायत होती है।
लॉन्ग कोविड में लोगों को कोरोना रिकवरी के बाद भी थकान, बुखार, सिर दर्द आदि की शिकायत होती है।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?

अमेरिका के टॉप डॉक्टर एंथनी फौसी का कहना है कि कोरोना का वैरिएंट चाहे कोई भी हो, कैसा भी हो, उससे लॉन्ग कोविड होने की संभावना कभी खत्म नहीं होगी। अब तक मिली जानकारी के मुताबिक, ओमिक्रॉन होने के बाद लॉन्ग कोविड नहीं हो सकता, इस बात का कोई सबूत मौजूद नहीं है। फौसी का कहना है कि कोरोना के माइल्ड केसेस में भी 10-30% लोगों को आगे जाकर लॉन्ग कोविड होता है। साथ ही, वैक्सीनेशन होने के बाद भी ये सिंड्रोम होने की आशंका बनी रहती है।

अमेरिकी हेल्थ एजेंसी सेंटर्स फॉर डिसीज कंट्रोल (CDC) के अनुसार, बिना लक्षण वाले मरीजों को भी भविष्य में लॉन्ग कोविड हो सकता है।

ओमिक्रॉन का संक्रमण कितना माइल्ड है?

डेल्टा के बाद अब ओमिक्रॉन पूरे विश्व में कोरोना की सबसे डोमिनेंट स्ट्रेन बन गई है। भले ही इसका इन्फेक्शन रेट ज्यादा है, लेकिन इसके लक्षण काफी माइल्ड हैं। अधिकतर मामलों में तो इसके कोई लक्षण हैं ही नहीं। अभी तक मिले डेटा के मुताबिक, ओमिक्रॉन के मरीजों को जुकाम जैसे लक्षणों का अनुभव होता है। इनमें हल्का बुखार, गले में खराश और खुजली, सर्दी, खांसी, हरारत, भूख न लगना, उल्टी और दस्त होने जैसी समस्याएं शामिल हैं।

भले ही ओमिक्रॉन का इन्फेक्शन रेट ज्यादा है, लेकिन इसके लक्षण काफी माइल्ड हैं।
भले ही ओमिक्रॉन का इन्फेक्शन रेट ज्यादा है, लेकिन इसके लक्षण काफी माइल्ड हैं।

ओमिक्रॉन के बाद लॉन्ग कोविड होने पर आ सकते हैं ये लक्षण

यदि आपको ओमिक्रॉन संक्रमण होने पर लक्षण नहीं भी आए थे, तो भी लॉन्ग कोविड होने पर आप लक्षणों का अनुभव कर सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, कोरोना रिकवरी के बाद भी आप थकान, ब्रेन फॉग, सांस लेने में परेशानी, फोकस करने में दिक्कत और नींद की समस्या का सामना कर सकते हैं।

लॉन्ग कोविड से बचने के उपाय

कोरोना के मरीजों को रिकवरी के समय और उसके बाद भी अपना ख्याल अच्छी तरह रखना चाहिए। सही डाइट, रेगुलर एक्सरसाइज और जरूरी आराम के साथ लॉन्ग कोविड से बचा जा सकता है। यदि आप इंटेंस वर्क आउट करने के शौकीन हैं, तो भी आपको रिकवरी के बाद सरल एक्सरसाइज से ही शुरुआत करनी चाहिए। जंक फूड और ड्रिंक्स से जितना बचेंगे, उतना आपकी सेहत के लिए बेहतर होगा।

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