फफूंद से देंगे कैंसर को मात:हिमालय में उगने वाली खास किस्म की फफूंद से होगा कैंसर का इलाज, यह 40% तक असरदार, जानिए यह कैसे काम करती है

8 दिन पहले
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हिमालय में पाई जाने वाली फफूंद से कैंसर का इलाज किया जा सकेगा। इस फफूंद को वैज्ञानिक भाषा में कॉर्डिसेप्स साइनेसिस कहते हैं। इसमें कैंसर से लड़ने और कैंसर वाली कोशिकाओं को रोकने की क्षमता है। यह बात ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और बायोफार्मा कंपनी न्यूकाना की जॉइंट रिसर्च में साबित भी हुई है।

यह फफूंद है क्या, यह कैसे कैंसर के इलाज में मदद करेगा और क्यों खास है, जानिए इन सवालों के जवाब...

यह फफूंद है क्या, पहले इसे समझें?
यह हिमालय में पाई जाने वाली फफूंद है। चीनी औषधि तैयार करने में सैकड़ों सालों से इसका इस्तेमाल किया जा रहा है। इसे कैटरपिलर फंगस भी कहते हैं। यह खासतौर पर हिमालय के नेपाल और भूटान वाले हिस्से में पाई जाती है। इसमें कॉर्डिसेप्सिन और एडिनोसिन केमिकल पाया जाता है। कॉडिसेप्सिन ही इस फफूंद की सबसे बड़ी खूबी है। यही कारण है कि इस फफूंद को चीनी चिकित्सा पद्धति में मेडिसिनल मशरूम का दर्जा दिया गया है।

अब जानिए, इससे कैंसर का इलाज कैसे होगा?

इस फफूंद से ही वैज्ञानिकों ने ऐसी दवा विकसित की है जिसका इस्तेमाल कीमोथैरेपी ड्रग के तौर पर किया जाएगा। ड्रग का नाम NUC-7738 रखा गया है। रिसर्च के दौरान पाया गया है कि एंटी-कैंसर ड्रग है यानी इसमें कैंसर को हराने की क्षमता है। यह कैंसर कोशिकाओं को रोकने में मदद करता है और 40 फीसदी तक असरदार है।

शोधकर्ताओं के मुताबिक, फफूंद में पाया जाना वाला केमिकल कॉर्डिसेप्सिन शरीर में पहुंचकर ब्लड में घुलने लगता है। यह ADA नाम के एंजाइम की मदद से टूट जाता है। इसके बाद यह कैंसर वाली कोशिकाओं तक पहुंचकर अपना असर दिखाता है। शुरुआती क्लीनिकल ट्रायल में यह बात साबित भी हो चुकी है।

यह फफूंद सूखने पर कीड़े की तरह दिखता है, इसलिए इसे कीड़ा जड़ी भी कहते हैं।
यह फफूंद सूखने पर कीड़े की तरह दिखता है, इसलिए इसे कीड़ा जड़ी भी कहते हैं।

पहले चरण का ट्रायल सफल
क्लीनिकल कैंसर रिसर्च जर्नल में पब्लिश स्टडी कहती है, फार्मा कंपनी न्यूकाना इस ड्रग का इस्तेमाल NUC-7738 नाम से कर रही है। क्लीनिकल ट्रायल फेज-1 के नतीजे असरदार रहे हैं। क्लीनिकल ट्रायल के फेज-2 की तैयारी की जा रही है। जल्द ही बड़े स्तर पर इसके अगले चरण का ट्रायल किया जाएगा।

देश में कैंसर के 14 लाख मरीज:ICMR

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) के मुताबिक, देश में कैंसर के 13.9 लाख मरीज हैं। 2025 तक इनकी संख्या बढ़कर 15.7 लाख तक पहुंच सकती है।

2020 में 6,79,421 भारतीय पुरुषों में कैंसर के मामले सामने आए। यह आंकड़ा 2025 तक 7,63,575 तक पहुंच सकता है। वहीं, 2020 में 7,12,758 महिलाएं कैंसर से परेशान हुईं। 2025 तक ये मामले 8,06,218 तक पहुंच सकते हैं। ICMR की रिपोर्ट कहती है, 2025 तक ब्रेस्ट कैंसर इस बीमारी का सबसे कॉमन कैंसर बन जाएगा। दूसरे पायदान पर फेफड़ों का कैंसर होगा।

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