कैंसर का खतरा घटाने की कोशिश:वैज्ञानिकों ने जेनेटिकली मोडिफाइड गेहूं की खास प्रजाति विकसित की, इसमें से वो तत्व हटाया जो कैंसर की वजह बन सकता है

3 महीने पहले
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ब्रिटिश वैज्ञानिकों ने कैंसर का खतरा घटाने के लिए गेहूं की नई किस्म विकसित की है। वैज्ञानिकों ने जीन एडिटिंग तकनीक से गेहूं की नई प्रजाति से एसपर्जिन नाम के अमीनो एसिड की मात्रा को घटा दिया है।

ब्रिस्टल यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक हर्टफोर्डशायर में गेहूं की जेनेटिकली मोडिफाइड किस्म उगा रहे हैं। यह प्रोजेक्ट 5 साल तक चलेगा। यह पहली बार है जब जीन एडिटिंग (CRISPR) तकनीक से यूके या यूरोप में गेहूं की फसल उगाई गई है। चीन और अमेरिका में ऐसा पहले हो चुका है।

कैंसर को कैसे रोकेंगे, अब इसे समझिए
शोधकर्ताओं का कहना है, जब आम गेहूं से तैयार ब्रेड को बेक्ड या रोस्ट किया जाता है तो इसमें मौजूद एसपर्जिन कैंसर फैलाने वाले तत्व एक्रेलामाइड में बदल जाता है। यह कैंसर की वजह बन सकता है। शोधकर्ताओं ने जीन एडिटिंग करके गेहूं की नई प्रजाति से इसी एसपर्जिन को हटा दिया है।

ब्रिस्टल यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता 1990 से जेनेटिकली मोडिफाइड फसल उगा रहे हैं। शोधकर्ता इससे पहले ऐसी कई फसलें उगा चुके हैं। शोधकर्ता निगेल हाफोर्ड कहते हैं, 2002 में एक्रेलामाइड की खोज हुई थी। चूहे में हुई रिसर्च में यह साबित हो चुका है कि यह कैंसर की वजह बनता है। इंसानों में भी इससे कैंसर का खतरा जताया गया है। गेहूं की नई फसल की क्वालिटी के स्तर पर कोई बदलाव नहीं आया है।

वैज्ञानिकों ने इन गेहूं से एसपर्जिन से जुड़े जीन को हटा दिया है, जो एक्रेलामाइड बनने की वजह बनता है।
वैज्ञानिकों ने इन गेहूं से एसपर्जिन से जुड़े जीन को हटा दिया है, जो एक्रेलामाइड बनने की वजह बनता है।

कैंसर की वजह बनने वाला अमीनो एसिड 90 फीसदी कम था
प्रो. हाफोर्ड कहते हैं, नई प्रजाति की जांच करने पर इसमें से एक्रेलामाइड की मात्रा दूसरी सामान्य गेहूं की प्रजाति से 90 फीसदी तक कम था। नई प्रजाति की मदद से धीरे-धीरे लोगों के खान-पान और पैकेज फूड से एक्रेलामाइड का खतरा कम होगा। हालांकि, इसमें काफी समय लगेगा।

शोधकर्ता डॉ. साराह रफान के मुताबिक, यह प्रोजेक्ट 2026 तक चलेगा। लैब में तैयार जेनेटिकली मोडिफाइड पौधों की बुआई हर साल सितम्बर और अक्टूबर में की जाएगी। इस फसल से तैयार गेहूं को ट्रायल में शामिल इंसान टेस्ट करेंगे। इससे क्वालिटी और एसपर्जिन का लेवल चेक कर सकेंगे।

ये फूड कैंसर का खतरा बढ़ाते हैं

इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल के कैंसर एक्ससपर्ट डॉ. प्रवीण गर्ग कहते हैं, हमारे गलत खानपान से भी कैंसर का खतरा बढ़ता है। कुछ खास तरह की चीजों को डाइट से दूर करके इस खतरे को घटा सकते हैं। जानिए, ऐसी ही 5 चीजें जो कैंसर का खतरा बढ़ाती हैं...

1. प्रोसेसिंग मीट: मीट को प्रोसेसिंग के जरिए लम्बे समय तक खाने लायक बनाया जाता है। इसके लिए मीट में कई तरह के फ्लेवर और केमिकल का प्रयोग किया जाता है। इसके कारण कोलोन कैंसर का खतरा बढ़ता है। एक्सपर्ट कहते हैं, अगर डाइट में इस तरह के खाने को कम करते हैं तो कैंसर का खतरा घटता है। इसके अलावा अधिक नमक वाले खाने से भी दूरी बनानी चाहिए।

2. मैदा: यह ऐसी चीज है जिसे घरों में सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है। बहुत कम लोग जानते हैं कि इसे तैयार करने में फफूंद को खत्म करने वाले फंगिसाइड और कीटनाशक का प्रयोग किया जाता है। इतना ही नहीं, मैदा को सफेद रखने के लिए क्लोरीन ऑक्साइड मिलाया जाता है। ये सभी केमिकल कैंसर का खतरा बढ़ाते हैं।

3. सोडा: इसमें अधिक मात्रा में शुगर होती है जो वजन बढ़ाने के साथ शरीर में सूजन की वजह भी बनती है। इसके अलावा इसमें कई तरह के केमिकल और आर्टिफिशियल रंगों (4-मिथाइलिमिडेजोल) का प्रयोग किया जाता है जो कैंसर का खतरा बढ़ाते हैं।

4. हाइड्रोजेनेटेड ऑयल्स: वनस्‍पति तेल में आमतौर पर हाइड्रोजेनेटेड ऑयल मिलाया जाता है। इसका कैंसर से सीधा कनेक्शन है। इसमें ट्रांस-फैट्स काफी मात्रा में होता है। ये मोटापा बढ़ाते हैं और रोगों से लड़ने की क्षमता को घटाते हैं। कई रिसर्च में यह साबित हो चुका है कि मोटापे से कैंसर का खतरा बढ़ता है।

5. माइक्रोवेव पॉपकार्न: ये ऐसे पॉपकॉर्न होते हैं जो केमिकल वाले पैकेट में आते हैं। इन्हें माइक्रोवेव में तैयार किया जाता है। ये जिस बैग में रखे होते हैं उसमें परफ्लोरो-ऑक्टेनॉयक एसिड होता है जो लिवर, ब्लैडर, किडनी और टेस्टिस के कैंसर का खतरा बढ़ाता है। कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी की रिसर्च कहती है, यह केमिकल महिलाओं की फर्टिलिटी पर भी बुरा असर डालता है।

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