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साल का पहला सूर्य ग्रहण:शुक्र-बृहस्पति का भी दिखा अनूठा मिलन; 1075 साल बाद चार ग्रह एक कतार में

4 महीने पहले

रविवार देर रात सौरमंडल में कई बदलाव दिखे। एक तरफ जहां साल का पहला सूर्यग्रहण देखने को मिला। हालांकि, भारत में इसका असर नहीं रहा। वहीं, चार ग्रह एक साथ एक कतार में दिखाई दिए। देर रात सौरमंडल का चमकदार ग्रह शुक्र (वीनस) और सबसे बड़ा ग्रह बृहस्पति (जुपिटर) आसमान में एक-दूसरे में समाते नजर आए थे। वहीं, मंगल (मार्स) और शनि (सैटर्न) ग्रह भी इनके साथ एक ही कतार में दिखाई दिए। यह अनूठी और दुर्लभ घटना सौरमंडल में 1,075 साल बाद देखने को मिली।

ये नजारा कितना दुर्लभ?

इससे पहले चारों ग्रहों के एक कतार में आने की घटना तकरीबन 1,075 साल पहले 947 ईस्वी में हुई थी।
इससे पहले चारों ग्रहों के एक कतार में आने की घटना तकरीबन 1,075 साल पहले 947 ईस्वी में हुई थी।

पठानी सामंत तारामंडल के उप निदेशक डॉ. एस. पटनायक ने न्यूज एजेंसी ANI से बातचीत में बताया कि इससे पहले चारों ग्रहों के एक कतार में आने की घटना तकरीबन 1,075 साल पहले 947 ईस्वी में हुई थी। इस नजारे को 'ग्रह परेड' (Planet Parade) के नाम से भी जाना जाता है। इसकी कोई वैज्ञानिक परिभाषा नहीं है, यह शब्द केवल इस घटना को बताने के लिए खगोल विज्ञान में इस्तेमाल किया जाता है।

BBC की रिपोर्ट के मुताबिक, इनके संयोजन का अगला नजारा अब साल 2039 में देखने मिलेगा।

शुक्र-बृहस्पति नग्न आंखों से देखे गए

शुक्र और बृहस्पति के मिलने की यह घटना नग्न आंखों या सामान्य दूरबीन की मदद से हर कोई देख पाया।
शुक्र और बृहस्पति के मिलने की यह घटना नग्न आंखों या सामान्य दूरबीन की मदद से हर कोई देख पाया।

दोनों ग्रहों का मिलन असली नहीं
शुक्र और बृहस्पति का करीब आना व मंगल और शनि का कतारबद्ध होना एक असल घटना नहीं है। यह मात्र पृथ्वी से दिखने वाली स्थिति है। असलियत में शुक्र और बृहस्पति एक-दूसरे से लगभग 43 करोड़ मील की दूरी पर हैं।

साल का पहला सूर्य ग्रहण

30 अप्रैल की रात सूर्य ग्रहण था। ये ग्रहण भारत में नहीं दिखा।
30 अप्रैल की रात सूर्य ग्रहण था। ये ग्रहण भारत में नहीं दिखा।

भारतीय समय के अनुसार शनिवार, 30 अप्रैल की रात सूर्य ग्रहण होगा। सूर्य ग्रहण दक्षिण अमेरिका, पश्चिमी अमेरिका, अटलांटिक पेसिफिक और अंटार्कटिका में दिखाई दिया। ये ग्रहण भारत में नहीं दिखा। इस वजह से भारत में इस ग्रहण का सूतक भी नहीं रहेगा। पूरे दिन शनिश्चरी अमावस्या से जुड़े शुभ काम किए जा सकेंगे। भारतीय समय के अनुसार, सूर्य ग्रहण 30 अप्रैल की रात 12.15 बजे से शुरू हुआ और 1 मई की सुबह 4.08 बजे ग्रहण खत्म हो गया।