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कोरोना वायरस / पांच साल से बड़े बच्चों पर खतरा कम, लेकिन ये संक्रमण के वाहक हो सकते हैं

Children older than five years are less at risk, but they may be carriers of infection
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Children older than five years are less at risk, but they may be carriers of infection

  • हल्के लक्षण नजर आते ही बच्चे को तुरंत हॉस्पिटल नहीं ले जाएं

दैनिक भास्कर

Mar 29, 2020, 01:44 PM IST

लाइफस्टाइल डेस्क. कोरोनावायरस से कोई भी संक्रमित हो सकता है, बच्चे-बूढ़े से लेकर जवान तक। लेकिन बच्चों के मामले में एक बात का विशेष ध्यान रखना जरूरी है। अगर बच्चे में कोरोनावायरस के शुरुआती लक्षण जैसे सर्दी, खांसी और बुखार दिखें तो उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाने की जल्दबाजी न दिखाएं। पहले किसी डॉक्टर से फोन पर या अपने राज्य की हेल्पलाइन पर परामर्श करें और बच्चे के बारे में पूरी जानकारी दें। अन्य सार्वजनिक स्थानों की ही तरह अस्पतालों में भी संक्रमण हो सकता है और खासकर पांच साल से छोटे बच्चे इसके ज्यादा आसानी से शिकार हो सकते हैं। इसलिए बेहद जरूरी होने पर ही बच्चे को अस्पताल ले जाना चाहिए।


रिसर्च के मुताबिक
चीन में कोरोनावायरस से संक्रमित लोगों के अध्ययन में यह सामने आया है कि बच्चे और किशोर इसका शिकार अपेक्षाकृत कम हुए हैं। ज्यादा खतरा सिर्फ पांच साल से कम उम्र के बच्चों और शिशुओं के लिए है। इसलिए अगर आपके बच्चे को सर्दी-खांसी या बुखार है, तो सबसे पहले उसकी केस हिस्ट्री पर ध्यान दीजिए। अगर उसे सर्दी-खांसी की शिकायत पहले भी होती रही है, अगर बच्चा कहीं बाहर नहीं गया है, किसी बाहरी व्यक्ति से मिला-जुला नहीं है, घर का कोई सदस्य कहीं बाहर नहीं गया है या कहीं यात्रा से वापस नहीं आया है, तो इसका मतलब है कि उसे कोरोनावायरस होने की आशंका कम है।

वायरस के वाहक हो सकते हैं बच्चे
लेकिन इसका मतलब यह भी नहीं है कि बच्चे को लेकर हम असावधान हो जाएं। बच्चों पर वायरस का असर भले ही कम नजर आता हो, लेकिन वे वायरस के वाहक हो सकते हैं, यानी उनसे दूसरे लोग संक्रमित हो सकते हैं। इसलिए बच्चों में भी हाइजीन का पूरा ख्याल रखें। उनके हाथ बार-बार धुलाते रहें। बच्चों को इस दौरान खांसने और छींकने के एटीकेट्स सिखाने की भी जरूरत है।

गर्भस्थ शिशु को खतरा नहीं
कोरोनोवायरस के कारण गर्भवती स्त्रियों के भ्रूण में पल रहे शिशु को कोई ख़तरा नहीं है। चीन में हुए अध्ययन में यह बात सामने आई है। यह अध्ययन फ्रंटियर इन पेडियाट्रिक्स जर्नल में प्रकाशित हुआ है। इस अध्ययन में कहा गया है कि अगर किसी गर्भवती महिला को कोरोना संक्रमण (कोविड 19 पॉजिटिव) भी है, तब भी गर्भस्थ शिशु को इसका कोई जोखिम नहीं है। इसके अलावा नई मां बनी महिलाएं अपने बच्चे को स्तनपान कराना जारी रखें। बस इतना ध्यान रखें कि बच्चे को स्तनपान कराते समय अपनी खुद की साफ-सफाई अच्छी होनी चाहिए। अपने मुंह पर मास्क बांधने के साथ हाथों को सैनेटाइज करके ही दूध पिलाएं।

गर्भवती महिलाएं पानी पीती रहें, धूप में बिताएं 30 मिनट
देश में अगले और 16 दिन लॉकडाउन जारी रहेगा। लेकिन शिशुओं और गर्भवती महिलाओं के लिए अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है। छोटे बच्चे और गर्भवती महिलाओं के लिए इस क्वारेंटीन अवधि को स्वयं ही आगे बढ़ाना चाहिए। कुछ और टिप्स :

  • बच्चों और गर्भवती महिलाओं को घर के आसपास भी नहीं जाने दें।
  • घर में हर व्यक्ति अपने हाथों को हमेशा साफ रखें और मास्क का इस्तेमाल करें। दिन में कम से कम छह बार 20-20 सेकंड तक हाथ धोने की जरूरत है।
  • अभी बच्चों को किसी के साथ खेलने न दें। घर में अगर बुज़ुर्ग हैं और किसी को सर्दी-खांसी है, तो उनसे दूरी बनाकर रखना जरूरी है।
  • बच्चों को पौष्टिक आहार दें। गर्भवती महिलाएं अपने पोषण पर खास ध्यान दें, शरीर को हाइड्रेट रखें और बीच-बीच में पानी पीती रहें।
  • सुबह के समय घर के बरामदे या बालकनी में बच्चे और गर्भवती महिला 30 मिनट धूप में बिताएं।
  • बच्चों को छूने से पहले व बाद में हाथों की अच्छी तरह सफाई करें। स्पर्श करने वाली सभी सतहों की सफाई करें।
  • अगर बच्चा थोड़ा बड़ा है तो उसे हल्की-फुल्की कसरत और योग करने के लिए प्रेरित करें।

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