2 साल तक के बच्चों से खूब बात करें:इससे उनका दिमाग तेज होता है, रीडिंग स्किल बेहतर होती है, शब्द भंडार बढ़ता है

6 दिन पहले
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छोटेे बच्चों से खूब बात करें, उन्हें प्यार-दुलार दें। वे जल्दी बोलने लगेंगे। उच्चारण बेहतर होगा। रीडिंग स्किल अच्छी होगी। शब्द भंडार बढ़ेगा और आईक्यू लेवल ऊंचा होगा। एक स्टडी से यह बात सामने आई है कि जिन बच्चों से उनके 18 से 24 महीने की उम्र तक प्यार-दुलार के साथ खूब बातें की गई हैं, उनका दिमाग ज्यादा तेज होता है। यहां तक कि उनकी रीडिंग स्किल भी बेहतर होती है। हालांकि, यह जरूरी है कि इसका ख्याल स्कूल से पहले परिवार के स्तर पर रखा जाए। बच्चे की खास तरह की परवरिश की जाए, जिसमें उन्हें अक्षर ज्ञान देने के साथ बोलने की आदत डाली जाए।

मां-बाप बच्चों के दिमाग को पहली खुराक देते हैं
पीडियाट्रिक सर्जन डैना सुसकिंड कहती हैं- माता-पिता बच्चों के पहले शिक्षक हैं। वे बच्चे के दिमाग को पहली खुराक देते हैं। एनाटॉमिकल, साइकोलॉजिकल और जीन स्टडी के अनुसार, एक बच्चे का दिमाग 2 साल तक काफी विकसित हो जाता है। वह अपने आसपास की चीजों को समझने लगता है। शोध में यह भी पता चला है कि 6 साल की उम्र तक बच्चे के बौद्धिक विकास के लिए परिवार और स्कूल बराबर जिम्मेदार हैं।

अमेरिका में बच्चों की रीडिंग स्किल कमजोर
नेशनल एसेसमेंट ऑफ एजुकेशनल प्रोग्रेस की रिपोर्ट में यह बात सामने आई कि अमेरिका के बच्चे किताब पढ़ने में बहुत कमजोर हैं। उन्हें उच्चारण में कठिनाई आ रही है। कोरोना के दौर में अकेलेपन ने उनके लिए और मुश्किल पैदा कर दी है। लेकिन अकेले कोरोना इसके लिए जिम्मेदार नहीं है। चौथी ग्रेड तक के छात्र मुश्किल से ही किताब पढ़ पा रहे हैं। यही हाल रहा तो वे जल्द ही अमेरिका के कम पढ़े-लिखे 3 करोड़ 60 लाख वयस्कों में शामिल हो जाएंगे।

बच्चों की पढ़ाई के लिए सरकार बदल रही नीतियां
बच्चों के शिक्षा स्तर में इस स्तर तक आई गिरावट के बाद सरकार ने कई कदम उठाए हैं। रीडिंग करिकुलम में बदलाव किया गया है। शिक्षकों की नए सिरे से ट्रेनिंग कराई जा रही है। माता-पिता को जागरूक किया जा रहा है। अमेरिका अपनी जीडीपी का सिर्फ 0.03% खर्च कर रहा है, जो रोमानिया और साइप्रस जैसों देशों के बराबर है। वहीं आइसलैंड और स्वीडन जैसे देश बच्चों की शिक्षा पर बहुत ध्यान देते हैं। वे अपनी जीडीपी का 1.5% से ज्यादा खर्च करते हैं।

उठाने होंगे कदम ताकि समझदार हो अगली पीढ़ी

  • माता-पिता को बच्चा होने के बाद लंबी अवधि के लिए पेड पैरेंटल लीव दी जाए।
  • छोटे बच्चों के परिवार को टैक्स में छूट देकर प्रोत्साहित किया जाए।
  • छोटे बच्चों की घर में ही बेहतर शिक्षा का प्रबंध सरकार को करना चाहिए।
  • माता-पिता को बच्चों की परवरिश के लिए बेहतर ट्रेनिंग की व्यवस्था की जाए।
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