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कोरोना और कोलेस्ट्रॉल:हार्ट और डायबिटीज के मरीजों में कोरोना होने पर बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल मौत का खतरा बढ़ाता है, इसे कंट्रोल करें

7 महीने पहले
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  • चाइनीज एकेडमी ऑफ मिलिट्री साइंस के वैज्ञानिकों का रिसर्च में दावा
  • 50% मरीज हार्ट डिसीज, डायबिटीज और ब्रेन से जुड़ी बीमारी से जूझ रहे थे

हार्ट और डायबिटीज के मरीजों में कोरोना होने पर मौत का खतरा क्यों ज्यादा है, इसे चीनी वैज्ञानिकों ने अपनी रिसर्च में समझाया है। रिसर्च के मुताबिक, इसकी बड़ी वजह कोलेस्ट्रॉल है। कोरोना के मामले में अक्सर मरीज में कोलेस्ट्रॉल का लेवल बढ़ता है। यह कोरोनावायरस को संक्रमण फैलाने में मदद करता है।

संक्रमण के बाद वायरस कोलेस्ट्रॉल के कणों के साथ मिलकर खास तरह का रिसेप्टर SR-B1 तैयार करता है। ऐसा होने पर संक्रमण का लेवल और जान का खतरा दोनों बढ़ता है। आसान भाषा में समझें तो कोलेस्ट्रॉल जितना ज्यादा होगा जान का जोखिम भी उतना ही बढ़ेगा।

संक्रमण फैलाने में कोलेस्ट्रॉल कोरोना की कैसे मदद करता है
रिसर्च करने वाले चाइनीज एकेडमी ऑफ मिलिट्री साइंस के वैज्ञानिकों का कहना है, कोलेस्ट्रॉल इंसान के शरीर की हर कोशिकाओं में पाया जाता है इसकी मदद से SR-B1 रिसेप्टर टार्गेट करता है। संक्रमण फैलाने वाले कोरोना के स्पाइक प्रोटीन के दो हिस्से होते हैं- सबयूनिट-1 और सबयूनिट-2। कोलेस्ट्रॉल सबयूनिट-1 के साथ जुड़ता है और संक्रमण को गंभीर बनाता है।

हार्ट और डायबिटीज के मरीजों को खतरा ज्यादा क्यों?
वैज्ञानिकों का कहना है, हार्ट और डायबिटीज के मरीजों में कोलेस्ट्रॉल का लेवल बढ़ जाता है जो हालत को नाजुक बनाने के साथ मौत का खतरा बढ़ाता है। रिसर्च कहती है, कोरोना के लगभग 50 फीसदी मरीज हार्ट डिसीज, डायबिटीज और ब्रेन से जुड़ी बीमारी से जूझ रहे थे। ऐसे मरीज जो मोटापे से परेशान हैं, उनमें भी संक्रमण के बाद मौत का खतरा ज्यादा है।

नेशनल हेल्थ सर्विसेज के आंकड़े बताते हैं, कोरोना के 29 फीसदी मरीज हृदय रोगी और 19 फीसदी डायबिटीज से परेशान थे। इम्पीरियल कॉलेज लंदन की स्टडी में भी यह सामने आया है कि टाइप-2 डायबिटीज ये जूझने वाले कोरोना के मरीजों में मौत का खतरा टाइप-1 डायबिटीज के मुकाबले दोगुना है।

इलाज के दौरान SR-B1 को न्यूट्रल करना जरूरी
रिसर्चर्स के मुताबिक, मरीज में कोरोना का संक्रमण रोकना है तो सबसे पहले SR-B1 रिसेप्टर को ब्लॉक करके खत्म करना होगा। इलाज के दौरान इसका ध्यान रखना जरूरी है। भविष्य में कोरोना के ट्रीटमेंट का यह जरूरी हिस्सा हो सकता है।

कोलेस्ट्रॉल घटाने के लिए ये 5 बातें ध्यान रखें

डाइट एंड वेलनेस एक्सपर्ट डॉ. शिखा शर्मा से जानिए कैसे कंट्रोल में रखें कोलेस्ट्रॉल

1. सुबह की शुरुआत लहसुन से : लहसुन में ऐसे एंजाइम्स पाए जाते हैं, जो एलडीएल यानी खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मददगार साबित होते हैं। रोजाना सुबह के समय खाली पेट लहसुन की दो कलियों को चबा-चबाकर खाना फायदेमंद होगा।

2. चाय पीने से पहले बादाम खाएं : बादाम में ओमेगा-3 फैटी एसिड होते हैं, जो बुरे कोलेस्ट्रॉल को घटाते हैं। इन्हें एक रात पहले पानी में भिगोकर सुबह चाय से करीब 20 मिनट पहले खाना चाहिए। पानी में भिगोने से बादाम में फैटी तत्व कम हो जाता है। रोजाना पांच से छह बादाम खाना भी पर्याप्त है।

3. भोजन में अधिक से अधिक फाइबर हों : नाश्ते से लेकर डिनर तक, आप जब भी और जो भी खाएं, वह फाइबरयुक्त होना चाहिए। सलाद में शामिल तमाम तरह की सब्जियां जैसे प्याज, मूली, गाजर, चुकंदर फाइबर्स से युक्त होती हैं। ओट्स, स्प्राउट्स और शकरकंद में भी काफी मात्रा में फाइबर्स होते हैं। इन्हें नाश्ते में लें।

4. बाहर की तली हुई चीजों को ना कहें : ट्रांसफैट के लगातार सेवन से एलडीएल जैसा बुरा कोलेस्ट्रॉल बढ़ता है, जबकि एचडीएल जैसे अच्छे कोलेस्ट्रॉल का लेवल 20 फीसदी तक घट जाता है। ट्रांसफैट खासतौर पर डीप फ्राइड और क्रीम वाली चीजों में होता है। खासकर एक ही तेल को बार-बार गर्म करने से उसमें ट्रांसफैट की मात्रा बढ़ जाती है, इसलिए बाहर की चीजें अवॉयड करें।

5. वनस्पतिक प्रोटीन का सेवन बढ़ाएं : वनस्पतिक प्रोटीन से मतलब ऐसा प्रोटीन होता है जो वनस्पतियों यानी पेड़-पौधों से मिलता हो। यह प्रोटीन दालों, राजमा, चना, मूंगफली, सोयाबीन के जरिए हासिल किया जा सकता है। इससे बैड कोलेस्ट्रॉल के लेवल को काफी तेजी से घटाने में मदद मिलती है और गुड कोलेस्ट्रॉल का लेवल बढ़ता है।

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