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कोरोना के गढ़ वुहान में चौंकाने वाला खुलासा:कोरोना से रिकवर होने वाले 100 से 90 मरीजों के फेफड़ों में खराबी दिखी, अब इनके घरवाले साथ बैठकर खाना भी नहीं खाते

एक वर्ष पहले
  • वुहान के एक बड़े अस्पताल में कोरोना से उबरने वाले मरीजों के एक समूह की जांच की गई
  • अब तक सामने आए नतीजों के मुताबिक, 100 में से 10 मरीजों में नहीं बनी एंटीबॉडी

कोरोनावायरस के गढ़ वुहान से चौकाने वाली बातें सामने आई हैं। यहां कोरोना से रिकवर होने वाले 100 में से 90 लोगों के फेफड़ों में खराबी देखी जा रही है। सरकारी चीनी मीडिया ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक, वुहान के एक बड़े अस्पताल में कोरोना से उबरने वाले मरीजों के एक समूह की जांच की गई।

जांच में 90 मरीजों में फेफड़े खराब होने की बात सामने आई है। इसका मतलब है कि उनके फेफड़ों से ऑक्सीजन का फ्लो अब स्वस्थ लोगों की तरह नहीं हो पा रहा है। वहीं, 5 फीसदी मरीजों में दोबारा संक्रमण मिलने पर उन्हें क्वारैंटाइन किया गया है।

ऐसे मरीजों की औसत उम्र 59 साल
वुहान में रिकवर होने वाले मरीजों की स्थिति जानने के लिए लगातार चेकअप किए जा रहे हैं। जुलाई में इस अभियान का पहला चरण पूरा हुआ है। इसी क्रम में वुहान यूनिवर्सिटी के झोंगनन अस्पताल में आईसीयू यूनिट के डायरेक्टर पेंग झियोंग ने अपनी टीम के साथ ऐसे मरीजों की जांच की है। जांच में चौकाने वाली बातें सामने आईं। एक साल चलने वाले इस कार्यक्रम के पहले चरण का समापन जुलाई में हुआ। अध्ययन में शामिल मरीजों की औसत उम्र 59 साल है।

6 मिनट में 400 कदम ही चल पाए मरीज
पेंग और उनकी टीम ने रिकवर हुए मरीजों के फेफड़ों की हालत समझने के लिए उनसे 6 मिनट तक चलने को कहा। इस दौरान सामने आया कि वे 6 मिनट में केवल 400 मीटर की दूरी तय कर पाए जबकि एक स्वस्थ इंसान इतने ही समय में 500 मीटर की दूरी तक चल सकता है।

10 फीसदी मरीजों में नहीं बनीं एंटीबॉडीज
बीजिंग यूनिवर्सिटी ऑफ चाइनीज मेडिसिन के डोंगझेमिन अस्पताल के डॉ. लियांग टेंगशियाओ का कहना है कि अस्पताल से छुट्‌टी होने के बाद अगले तीन महीने में कुछ मरीजों को ऑक्सीजन मशीन की जरुरत पड़ती है। लियांग और उनकी टीम 65 साल से अधिक उम्र के मरीजों के बारे में जानकारी जुटा रही है। अब तक जो नतीजे सामने आए हैं उनके मुताबिक, 100 में से 10 मरीजों में अब तक एंटीबॉडीज नहीं बनीं।

मरीज के साथ परिजन खाना नहीं खाते
ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, कोरोना से रिकवर होने वाले मरीज डिप्रेशन से जूझ रहे हैं। ऐसे अधिकतर मरीजों का कहना है कि फैमिली मेम्बर्स अब उनके साथ एक मेज पर बैठकर खाना नहीं खाना चाहते। रिकवर हुए आधे से ज्यादा मरीज अब तक काम पर नहीं लौट पाए हैं।

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