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तंबाकू से माैतें रोकने की कवायद:दुनिया सिगरेट में निकोटिन घटाकर मौतें रोक रही, भारत में यही नहीं पता कि कौन सा केमिकल खतरनाक

नई दिल्ली12 दिन पहलेलेखक: पवन कुमार
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भारत में बनने वाली हर तरह की बीड़ी और सिगरेट कितने खतरनाक रसायनों वाली है, ये कोई नहीं जानता। इसे जांचने की व्यवस्था नहीं है। ये हालात तब है, जब दुनिया के कई देश सिगरेट से निकोटिन घटाकर मौतें रोकने वाली रणनीति पर आगे बढ़ रहे हैं।

उदाहरण के लिए, अमेरिका जोकि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के फ्रेमवर्क कन्वेंशन ऑन टोबैको कंट्रोल (FCTC) का सदस्य भी नहीं है, सिगरेट में निकोटिन की मात्रा तय करने की नीति बना रहा है। दूसरी ओर भारत FCTC का सदस्य है, फिर भी अभी तक इस दिशा में नहीं बढ़ा है।

केंद्र सरकार जल्द ले सकती है एक्शन

यही वजह है कि सिगरेट-बीड़ी बनाने वाली कंपनियों की मनमानी चल रही है। लेकिन, अब केंद्र सरकार सिगरेट एंड अदर टोबैको प्रोडक्ट एक्ट (COTPA) में बदलाव करने की प्रक्रिया में है। इसके तहत कंपनियों के लिए यह बाध्यता होगी कि वे सिगरेट के पैकेट पर खतरनाक केमिकल्स का जिक्र करें और यह भी बताएं कि उन रसायनों की मात्रा कितनी है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि सिगरेट में खतरनाक केमिकल्स की जांच के लिए तीन विश्व स्तरीय लैब तैयार कर ली गई हैं। अब एक वैज्ञानिक कमेटी बनाई जाएगी। यह कमेटी तय करेगी कि खतरनाक केमिकल की जांच कैसे की जाए। माना जा रहा है कि अगले दो-तीन महीने में जांच के स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रॉसिजर (SoP) का खाका तैयार हो जाएगा।

कानून में बदलाव के बाद ही कंपनियां बाध्य हो पाएंगी

तंबाकू निषेध पर काम करने के लिए WHO से पुरस्कार प्राप्त डॉ. एसके अरोड़ा का कहना है कि कानून में बदलाव जरूरी है। उसके बाद ही कंपनियां यह बताने के लिए बाध्य होंगी कि उनके उत्पादों में खतरनाक रसायनों की मात्रा कितनी है। कंपनियों द्वारा किए जा रहे दावों की जांच भी हो सकेगी। सिगरेट-बीड़ी में निकोटिन समेत करीब 7 हजार केमिकल होते हैं। इसमें से 200 तरह के टॉक्सिन होते हैं। 69 केमिकल ऐसे होते हैं, जो कैंसर की वजह बनते हैं। अगर इन्हीं रसायनों को नियंत्रित कर दिया जाए तो लाखों मौतें रोकी जा सकती हैं।

सिगरेट में जितनी निकोटिन घटेगी, उतनी मौतें कम होंगी

न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, अमेरिका में सिगरेट के असर से हर साल 4.8 लाख मौतें होती हैं। इसकी प्रमुख वजह निकोटिन की ज्यादा मात्रा है। अमेरिका अब निकोटिन की कम मात्रा वाली सिगरेट को ही बाजार में लाने की नीति बना रहा है। मई 2023 तक नई नीति लागू हो जाएगी। खास बात यह है कि सिगरेट में निकोटिन की मात्रा को 95% तक घटाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। अमेरिकी सरकार का मानना है कि ऐसा करने से सिगरेट से होने वाली मौतें भी 95% तक घट सकती हैं।