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मेडिकल साइंस का करिश्मा:10 साल बाद 78 वर्षीय जमाल की आंखों को मिली रोशनी, लगाया गया आर्टिफिशियल कॉर्निया इम्प्लांट

9 महीने पहले
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  • 10 साल पहले कॉर्निया में खराबी आने के कारण दिखना बंद हुआ था
  • दुनियाभर में हर साल कॉर्नियल डिसीज के 20 लाख मामले सामने आते हैं

आर्टिफिशियल कॉर्निया की मदद से 78 वर्षीय जमाल फुरानी की आंखों की रोशनी लौट आई है। अब तक वह पूरी तरह ब्लाइंड थे। इजरायल के रहने वाले जमाल की आंखों में सीधे तौर पर आर्टिफिशियल कॉर्निया इम्प्लांट लगाया गया। एक घंटे चली सर्जरी के बाद अब वो फैमिली मेम्बर्स को देख पा रहे और पढ़ पा रहे हैं।

इसलिए गई थी आंखों की रोशनी
जमाल कॉर्नियल डिसीज से जूझ रहे थे, जिसके कारण 10 साल पहले उन्हें दिखना बंद हो गया था। जमाल की सर्जरी 11 जनवरी को इजरायल में रेबिन मेडिकल सेंटर में प्रो. इरित बहार ने की। वैज्ञानिकों का कहना है, यह बड़ी उपलब्धि है क्योंकि दुनियाभर में हर साल कॉर्नियल डिसीज के 20 लाख मामले सामने आते हैं।

क्या होता है कॉर्निया
कॉर्निया आंख का वो ट्रांसपेरेंट हिस्सा है जिस पर बाहर की रोशनी पड़ती है। पुतली और लेंस कॉर्निया का ही हिस्सा होते हैं। कॉर्निया की मदद से बाहर की रोशनी पुतली में पहुंचती है। इस रोशनी को पुतली लेंस में भेजती है। इस तरह हम चीजों को देख पाते हैं।

कॉर्निया डैमेज होने पर सीधा असर आंखों की रोशनी पर पड़ता है। स्थिति गंभीर होने पर इंसान को दिखना बंद हो जाता है, इसे ही कॉर्नियल डिसीज कहते हैं।

इस तरह पुतली के ऊपर लगाया गया आर्टिफिशियल कॉर्निया इम्प्लांट।
इस तरह पुतली के ऊपर लगाया गया आर्टिफिशियल कॉर्निया इम्प्लांट।

10 मरीजों में लगाया जाना है इम्प्लांट
आंखों में लगाए गए आर्टिफिशियल कॉर्निया इम्प्लांट को नैनो टिश्यू से बनाया गया है। कॉर्नियल डिसीज से जूझ रहे 10 मरीजों पर इस इम्प्लांट का ट्रायल किया जाना है। जमाल पहले इंसान हैं जिन्हें इम्प्लांट लगाया गया है। इजरायल ने पिछले साल जुलाई में ट्रायल की अनुमति दी थी।

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