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ब्रिटिश शोधकर्ताओं की रिसर्च:खांसी और बदन दर्द वाले मरीजों को सबसे कम वेंटिलेंटर की जरूरत पड़ी, 6 समूहों में 1653 मरीजों पर हुई रिसर्च से पता चला

एक वर्ष पहले
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  • लंदन किंग्स कॉलेज के शोधकर्ताओं ने अपनी रिसर्च में किया दावा, कहा-79 फीसदी परिणाम सटीक आए
  • कोरोना के 1653 मरीजों पर हुई रिसर्च में सामने आया कि खांसी और बदन दर्द वाले मरीजों को सबसे कम वेंटिलेंटर की जरूरत पड़ी

कोरोना के मरीजों को वेंटिलेटर की जरुरत होगी या नहीं, इसे समझने के लिए लंदन किंग्स कॉलेज के शोधकर्ताओं ने रिसर्च की है। शोधकर्ताओं ने कोरोना पीड़ितों को उनके लक्षणों के मुताबिक, अलग-अलग 6 ग्रुप में रखकर स्टडी की। शोधकर्ताओं ने इनके लक्षणों पर बताया इन्हें वेंटिलेटर की कितनी जरूरत पड़ेगी।

शोधकर्ताओं का कहना है कि अगर लक्षणों के आधार पर इस बात काे समझ लें तो मरीज की हालत नाजुक होने से रोका जा सकता है। यह रिसर्च कोरोना के 1653 मरीजों पर की गई।

कोविड-19 के लक्षणों के 6 ग्रुप और उसका सटीक अनुमान

  • ग्रुप 1 : इस ग्रुप में रहे मरीजों में अपर रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट से जुड़े लक्षण दिखे। जैसे लगातार खांसी और शरीर का दर्द। इस ग्रुप में से सिर्फ 1.5% मरीजों को ही वेंटिलेटर सपोर्ट की जरूरत पड़ी। 16% मरीजों को एक या उससे ज्यादा बार ही अस्पताल जाने की नौबत आई। स्टडी में शामिल 1653 में से सबसे ज्यादा 462 मरीजों को इस ग्रुप में शामिल किया गया था।
  • ग्रुप 2: यह ग्रुप मरीजों को भी अपर रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट यानी की सांस की नली के ऊपरी हिस्से में तकलीफ थी लेकिन उन्हें बुखार आता था और खानापान भी सामान्य नहीं था। ऐसे 4.4% मरीजों को वेंटिलेटर सपोर्ट की जरुरत पड़ी थी और 17.5% लोगों को अस्पताल जाना पड़ा था।
  • ग्रुप 3: इस ग्रुप में मरीजों को अन्य लक्षणों के साथ साथ डायरिया जैसी गेस्ट्रोइंटेस्टाइनल यानी की पेट की बीमारी देखी गई थी। ऐसे 3.7% मरीजों को वेंटिलेटर सपोर्ट की जरुरत लगी थी और 24% मरीजों को कम से कम एक बार अस्पताल इलाज के लिए जाना पड़ा था।
  • ग्रुप 4: अधिक थकावट, सीने में लगातार दर्द और खांसी जैसे लक्षण मरीजों में दिखे थे। 8.6% मरीजों को वेंटिलेटर की जरूरत पड़ी जबकि 23.6% लोगों को एक या उससे ज्यादा बार अस्पताल जाना पड़ा।
  • ग्रुप 5: इस ग्रुप में घबराहट, अधिक थकावट और खाना खाने की इच्छा न करने जैसे लक्षण थे। इस ग्रुप के 9.9% मरीजों को वेंटिलेटर सपोर्ट की जरूरत पड़ी। 24.6% मरीजों को अस्पताल जाना पड़ा।
  • ग्रुप 6: सांस चढ़ना, सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द, थकावट और पेट की बीमारी जैसे लक्षण इस ग्रुप के मरीजों में देखे गए। इस ग्रुप के लगभग 20% मरीजों को आर्टिफिशियल ब्रीदिंग सपोर्ट लेने की जरूरत पड़ी जब की 45.5% लोगों को अस्पताल इलाज के लिए जाना पड़ा। हालांकि इस ग्रुप में शामिल लोगों की संख्या सबसे कम 167 ही थी।

पहले दो ग्रुप को बेहद हल्के लक्षण दिखे
शोधकर्ताओं ने दूसरे 1047 कोविड - 19 के मरीजों पर ऐसा ही अध्ययन किया तब भी इसी तरह के ग्रुप बनाए गए। इस बार भी ऐसे ही परिणाम सामने आए। दूसरी स्टडी में शोधकर्ताओं ने सिरदर्द और सुगंध-स्वाद के चले जाने के लक्षणों को भी सभी ग्रुप में देखा गया। जिन्हे कोरोना का हल्का संक्रमण हुआ उनमें स्वाद और सुगंध चले जाने की शिकायत लम्बे समय तक रही थी।

79% सटीक परिणाम
शोधकर्ता प्रोफ़ेसर टिम स्पेकटरे ने कहा कि पहले पांच दिन में दिखते लक्षणों और उम्र पर नजर रखी जाए तो बताया जा सकता है कि मरीज को वेंटिलेटर की जरूरत पड़ेगी या नहीं। शोधकर्ता का दावा है कि रिसर्च के दौरान 79 फीसदी परिणाम सटीक साबित हुए।

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