ब्लड टेस्ट से होगी कोरोना मरीजों की इम्युनिटी चेक:संक्रमण के बाद शरीर में एंटीबॉडीज बढ़ीं या नहीं? अब 24 घंटे में मिलेगा जवाब

11 दिन पहले
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कोरोना से बचाव के लिए अब तक वैक्सीन को ही सबसे अचूक हथियार माना जाता है। कोरोना संक्रमण के बाद पैदा हुई इम्युनिटी को जानने का एकमात्र जरिया एंटीबॉडी टेस्ट होता है, लेकिन वह भी सटीक रूप से नतीजे नहीं देता है।

अमेरिका और ब्रिटिश शोधकर्ताओं की टीम ने हाल में इम्युनिटी की सटीक जांच के लिए नई टेस्ट किट ईजाद की है। ये किट ब्लड सैंपल के जरिए शरीर में मौजूद टी-सेल (सफेद रक्त कोशिकाओं) की जांच से इम्युनिटी का पता लगाएगी। नेचर बायोटेक्नोलॉजी में प्रकाशित इस रिसर्च के अनुसार किट से महज 24 घंटे से भी कम समय में शरीर की इम्युनिटी के स्तर का पता चल सकेगा। आपको बूस्टर डोज वैक्सीन की जरूरत है या नहीं, इसके बारे में भी जानकारी मिलेेगी। इस आधार पर वैक्सीनेशन अभियान भी चलाया जाएगा।

कोरोना मरीजों में इम्युनिटी बढ़े, ये जरूरी नहीं

वैसे कोरोना से इम्युनिटी जांच के लिए टी-सेल टेस्ट पूरी तरह से नया नहीं है। अमेरिका के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने पिछले साल एक टी-सेल परीक्षण को अनुमति दी थी। न्यूयॉर्क शहर के माउंट सिनाई में टिश कैंसर इंस्टीट्यूट में ऑन्कोलॉजिकल विज्ञान के प्रोफेसर अर्नेस्टो गुचिओन कहते हैं- कोरोना से उबरे हर मरीज में एंटीबॉडी विकसित नहीं होती है। हो भी तो अधिकांश मरीजों में 8 सप्ताह से ज्यादा नहीं रहती है। मगर टी-सेल्स की याददाश्त वर्षों तक रहती है। टी-सेल्स मेमोरी सेल्स का उत्पादन करते हैं, जो कई साल तक एंटीजन के बारे में जानकारी संग्रहित करने में सक्षम है।

बूस्टर डोज लगवाना है या नहीं, ये भी पता चलेगा

कई लोग ऐसे होते है जिनमें बार-बार वैक्सीन लगने के बाद भी इम्युनिटी विकसित नहीं हो पाती है। ऐसे लोगों के लिए टी-सेल से पता लगाया जा सकेगा कि शरीर में कोरोना से लड़ने के लिए इम्युनिटी है या नहीं। उन्हें बूस्टर डोज लगवाने की जरूरत है या नहीं।