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कोरोना और खानपान के बीच कनेक्शन:शाकाहारी हैं तो कोरोना होने पर हालत नाजुक होने का खतरा 73% कम रहता है, मांसाहारी हैं तो रिस्क ज्यादा

9 दिन पहले
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कोविड से हालत बिगड़ने का एक कनेक्शन आपके खानपान से भी है। वैज्ञानिकों का कहना है, शाकाहारी और सीफूड खाने वालों में कोरोना का संक्रमण होने के बाद हालत बिगड़ने का खतरा कम रहता है। वहीं, शाकाहार के मुकाबले मीट खाने वालों में हालत नाजुक होने का रिस्क ज्यादा है। यह दावा मैरीलैंड के जॉन हॉप्किंस ब्लूमबर्ग स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ ने अपनी हालिया रिसर्च में किया है।

वैज्ञानिकों का कहना है, शाकाहारियों में कोविड से हालत बिगड़ने का खतरा 73 फीसदी तक कम रहता है। वहीं, सी-फूड जैसे मछली खाने वालों में रिस्क 59फीसदी तक घट जाता है, लेकिन मांसाहारियों में इसके उलट हालत नाजुक होने का खतरा ज्यादा रहता है।

2,884 संक्रमित फ्रंटलाइन वर्कर्स पर हुई रिसर्च
शोधकर्ताओं ने खानपान और कोरोना की गंभीरता के बीच कनेक्शन समझने के लिए 2,884 फ्रंटलाइन डॉक्टर्स और नर्सेस पर रिसर्च की। ये सभी जुलाई और सितम्बर में संक्रमित हुए थे। इन्हें फ्रांस, जर्मनी, इटली, स्पेन, ब्रिटेन और अमेरिका से शामिल किया गया था।

रिसर्च के दौरान उनका संक्रमण का स्तर, खानपान और मेडिकल हिस्ट्री के बारे में जाना गया। रिसर्च में सामने आया कि मांसाहार खाने वालों में हालत बिगड़ने का खतरा कम था।

इसलिए शाकाहार लेने वालों में खतरा कम
शोधकर्ताओं का कहना है, प्लांट बेस्ड वेजिटेरियन डाइट में कई तरह के विटामिंस, मिनिरल्स और न्यूट्रिएंट्स होते है। खतरा कम होने की एक वजह यह भी हो सकती है। ये पोषक तत्व रोगों से लड़ने वाले बेहतर इम्यून सिस्टम के लिए जरूरी हैं।

4 वजह: वेजिटेरियन खाना क्यों बेहतर है

1. वायरल डिसीज का खतरा कम हो जाता है

2013 में आई यूनाइटेड नेशंस की संस्था फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गनाइजेशन की रिपोर्ट कहती है, दुनियाभर में 90% से ज्यादा मांस फैक्ट्री फार्म से आता है। इन फार्म्स में जानवरों को ठूंस-ठूंसकर रखा जाता है और यहां साफ-सफाई का भी ध्यान नहीं रखा जाता। इस वजह से वायरल डिसीज फैलने का खतरा बढ़ जाता है। हाल ही में गुजरात में फैली वायरल डिसीज कांगो फीवर में भी संक्रमित जानवरों से इंसान को खतरा बताया गया है।

2. दिल ज्यादा खुश रहता है और बीमार कम होता है

नॉनवेज के मुकाबले वेजिटेरियन डाइट आपको ज्यादा स्वस्थ रखती है, इस पर रिसर्च की मुहर भी लग चुकी है। अमेरिकन जर्नल ऑफ क्लिनिकल न्यूट्रिशन में प्रकाशित रिसर्च कहती है, हृदय रोगों का खतरा घटाना है तो शाकाहारी खाना खाइए।

इंग्लैंड और स्कॉटलैंड में 44,561 लोगों पर हुई रिसर्च हुई। इसमें सामने आया कि नॉन-वेजिटेरियन के मुकाबले जो लोग वेजिटेरियन डाइट ले रहे थे उनमें हृदय रोगों के कारण हॉस्पिटल में भर्ती करने की आशंका 32 फीसदी तक कम है। इनमें कोलेस्ट्रॉल का लेवल और ब्लड प्रेशर दोनों ही कम था।

3. फल-सब्जियों की मात्रा बढ़ाते हैं तो कैंसर का खतरा घटता है

अब तक सैकड़ों ऐसी रिसर्च सामने आ चुकी हैं जो कहती हैं, खाने में अगर फल और सब्जियों की मात्रा बढ़ाते हैं तो कैंसर का खतरा कम हो जाता है। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में हुई रिसर्च के मुताबिक, अगर डाइट से रेड मीट को हटा देते हैं तो कोलोन कैंसर होने का खतरा काफी हद तक घट जाता है।

4. डायबिटीज कंट्रोल करना है तो 50% तक फल-सब्जियां खाएं

मेडिकल न्यूट्रिशनिस्ट कहते हैं, अगर ब्लड शुगर कंट्रोल करना चाहते हैं तो दिनभर की डाइट में 50 फीसदी से ज्यादा फल और सब्जियां लें। इसके बाद ही अनाज शामिल करें। नॉनवेज, अंडा, मछली, मक्खन और रिफाइंड फूड लेने से बचें। ऐसा करते हैं तो ब्लड शुगर काफी हद तक कम किया जा सकता है।

क्या होगा अगर सभी वेजिटेरियन बन जाएं?

  • 2016 में नेशनल एकेडमी ऑफ साइंस की एक स्टडी आई थी। इसमें कहा गया था कि अगर दुनिया की सारी आबादी मांस छोड़कर सिर्फ शाकाहार खाना खाने लगे तो 2050 तक ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में 70% तक की कमी आ सकती है।
  • अंदाजन दुनिया में 12 अरब एकड़ जमीन खेती और उससे जुड़े काम में इस्तेमाल होती है। इसमें से भी 68% जमीन जानवरों के लिए इस्तेमाल होती है। अगर सब लोग वेजिटेरियन बन जाएं तो 80% जमीन जानवरों और जंगलों के लिए इस्तेमाल में लाई जाएगी।
  • इससे कार्बन डाय ऑक्साइड की मात्रा कम होगी और क्लाइमेट चेंज से निपटने में मदद मिलेगी। बाकी बची हुई 20% जमीन का इस्तेमाल खेती के लिए हो सकेगा। जबकि, अभी जितनी जमीन पर खेती होती है, उसके एक-तिहाई हिस्से पर जानवरों के लिए चारा उगाया जाता है।