साइंटिस्ट का दावा- वुहान लैब से लीक हुआ कोरोना:अमेरिका ने चीन को वायरस बनाने का प्रोजेक्ट दिया, सुरक्षा में चूक हुई

वॉशिंगटन6 महीने पहले
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लगभग तीन साल पहले चीन के वुहान से फैला कोरोना वायरस लैब में बनाया गया था। यह दावा हाल ही में अमेरिकी वैज्ञानिक एंड्रू हफ ने अपनी किताब 'द ट्रुथ अबाउट वुहान' में किया है। उनका कहना है कि अमेरिकी सरकार चीन में कोरोना वायरस बनाने के प्रोजेक्ट को फंड कर रही थी। हफ इस लैब में काम भी कर चुके हैं।

गौरतलब है कि दिसंबर 2019 में फैले कोरोना से अब भी पूरी दुनिया जूझ रहे है। संक्रमण के अब तक 65 करोड़ मामले सामने आ चुके हैं। वहीं, 66 लाख लोगों की मौत हो चुकी है।

चीन और कोरोना के लिंक का खुलासा करने का दावा करने वाले वैज्ञानिक एंड्रू हफ।
चीन और कोरोना के लिंक का खुलासा करने का दावा करने वाले वैज्ञानिक एंड्रू हफ।

लैब से लीक हुआ वायरस
न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, हफ का कहना है कि वैज्ञानिकों द्वारा बनाया गया कोरोना वायरस वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (WIV) से लीक हुआ था। इस लैब को चीनी सरकार फंड करती है। हफ का दावा है कि सुरक्षा में चूक होने की वजह से वायरस लीक हुआ, जिसके बाद महज कुछ दिनों में यह पूरी दुनिया में फैल गया।

बता दें कि कोरोना महामारी की शुरुआत से ही वुहान लैब से कोरोना लीक होने की कई थ्योरी आ चुकी हैं। यहां काम करने वाले रिसर्चर्स विशेष रूप से कोरोना वायरस की प्रजातियों को स्टडी करते हैं। ऐसे में किसी वैज्ञानिक के जरिए इसका संक्रमण फैलने की आशंका है। हालांकि हमेशा से ही चीनी सरकार और वुहान लैब ने इन आरोपों को खारिज किया है।

महामारी के लिए अमेरिका जिम्मेदार
कोरोना महामारी के लिए हफ अमेरिकी सरकार को जिम्मेदार ठहराते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि उनके मुताबिक कोरोना वायरस पर हो रही रिसर्च को अमेरिका की मेडिकल रिसर्च एजेंसी नेशनल इंस्टीट्यूट्स ऑफ हेल्थ (NIH) का सपोर्ट था। इसने ही चीन को वायरस बनाने की तकनीक दी। यह किसी बायोवेपन टेक्नोलॉजी से कम नहीं था।

महामारी की शुरुआत से ही वुहान लैब से कोरोना लीक होने की कई थ्योरी आ चुकी हैं।
महामारी की शुरुआत से ही वुहान लैब से कोरोना लीक होने की कई थ्योरी आ चुकी हैं।

चीन को पहले दिन से खबर थी
हफ का कहना है कि चीन को पहले दिन से यह पता था कि कोरोना कोई नेचुरल वायरस नहीं है, बल्कि इसे जेनेटिकली मॉडिफाई कर बनाया गया है। तभी यह लैब से लीक हुआ है। इसके बावजूद सुरक्षा और लोगों को आगाह करने में ढील दी गई। चीन ने न सिर्फ बीमारी के आउटब्रेक के बारे में झूठ बोला, बल्कि उसे प्राकृतिक साबित करने की हर कोशिश की। हैरानी की बात यह है कि अमेरिकी सरकार ने भी दुनिया से झूठ बोला।

वायरस बनाने वाली कंपनी में कम कर चुके हफ
हफ ने 2014 से 2016 तक इको-हेल्थ अलायंस में वाइस प्रेसिडेंट के तौर पर काम किया है। यह कंपनी पिछले 10 सालों से NIH से फंडिंग लेकर चमगादड़ों में मिलने वाले कई तरह के कोरोना वायरस पर रिसर्च कर रही है। हफ का दावा है कि कंपनी और वुहान लैब के गहरे रिश्ते हैं। महामारी की शुरुआत से इको-हेल्थ अलायंस कह रही है कि वायरस नेचुरल तरीके से जानवर से इंसान में ट्रांसफर हुआ है। इस थ्योरी को NIH भी समर्थन दे रहा है।