कोरोना से पीछा छुड़ाना बेहद मुश्किल:रिसर्च में दावा- रिकवरी के 2 साल बाद भी 55% लोगों में कम से कम एक लक्षण मौजूद

लंदन9 दिन पहले

कोरोना से ठीक होने के दो साल बाद भी अस्पताल में भर्ती हुए 55% लोगों में कम से कम एक लक्षण मौजूद है। यह दावा लैंसेट रेस्पिरेटरी मेडिसिन जर्नल में पब्लिश एक हालिया रिसर्च में किया गया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि वायरस शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य पर भी बुरा असर डालता है। इससे मरीजों के जीवन का स्तर पहले की तुलना में काफी खराब हो जाता है।

रिकवर हुए मरीजों में कौन से लक्षण मौजूद?

लंबे समय तक रहने वाले लक्षणों में थकान, सांस लेने में कठिनाई, मांसपेशियों में दर्द और नींद से जुड़ी परेशानियां शामिल हैं।
लंबे समय तक रहने वाले लक्षणों में थकान, सांस लेने में कठिनाई, मांसपेशियों में दर्द और नींद से जुड़ी परेशानियां शामिल हैं।

वैज्ञानिकों के अनुसार लंबे समय तक रहने वाले लक्षणों में थकान, सांस लेने में कठिनाई, मांसपेशियों में दर्द और नींद से जुड़ी परेशानियां शामिल हैं। इन्हें लॉन्ग कोविड के लक्षणों के तौर पर देखा जा रहा है। इसका मतलब, भले ही शरीर से वायरस निकल गया हो, पर उसके लक्षण खत्म नहीं होते। ये लक्षण कुछ हफ्तों, महीनों या सालों तक भी बने रह सकते हैं।

ब्रिटेन के नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ एंड केयर रिसर्च की रेचल इवांस का कहना है कि अस्पताल में भर्ती होने के बाद रिकवर हुए कोरोना मरीजों की एक्सरसाइज करने की क्षमता, मेंटल हेल्थ, ऑर्गन फंक्शनिंग और जीवन स्तर बुरी तरह प्रभावित होते हैं।

चीन में बीमार हुए लोगों पर हुई रिसर्च

रिसर्च के मुताबिक कोरोना से रिकवरी के 6 महीने बाद 68% लोगों में लॉन्ग कोविड का कम से कम एक लक्षण पाया गया।
रिसर्च के मुताबिक कोरोना से रिकवरी के 6 महीने बाद 68% लोगों में लॉन्ग कोविड का कम से कम एक लक्षण पाया गया।

इस रिसर्च में 1,192 ऐसे लोगों को शामिल किया गया, जिन्हें चीन में कोरोना आउटब्रेक के दौरान संक्रमण हुआ था। यानी, ये महामारी के पहले चरण में बीमार हुए थे। इनका इलाज 7 जनवरी 2020 से 29 मई 2020 के बीच वुहान शहर के जिन यिन-टैन अस्पताल में हुआ था। अस्पताल से डिस्चार्ज होते समय मरीजों की औसत उम्र 57 साल थी और इनमें 54% पुरुष थे।

कोरोना होने के 6 महीने बाद 68% लोगों को लॉन्ग कोविड

वैज्ञानिकों ने प्रतिभागियों की सेहत का आकलन 6 महीने, 1 साल और 2 साल के अंतराल में किया। स्टडी में कई तरह के टेस्ट्स शामिल किए गए, जैसे- 6 मिनट वॉकिंग, कोरोना लक्षणों की जांच, मेंटल हेल्थ टेस्ट, काम से जुड़े सवाल आदि। नतीजों के मुताबिक कोरोना से रिकवरी के 6 महीने बाद 68% लोगों में लॉन्ग कोविड का कम से कम एक लक्षण पाया गया। वहीं दो साल बाद 55% लोगों में एक लक्षण पाया गया।

हरारत, मांसपेशियों में कमजोरी सबसे कॉमन लक्षण

ध्यान देने वाली बात यह है कि कोरोना से ठीक होने के दो साल बाद भी मरीजों की सेहत अच्छी न हो सकी।
ध्यान देने वाली बात यह है कि कोरोना से ठीक होने के दो साल बाद भी मरीजों की सेहत अच्छी न हो सकी।

हरारत और मांसपेशियों में कमजोरी जैसे लक्षण 6 महीने में 52% से गिरकर 2 साल में 30% पर आ गए। वहीं गंभीर संक्रमण हो चाहे न हो, रिकवरी के बाद 89% लोग अपने काम पर वापस लौट गए। ध्यान देने वाली बात यह है कि कोरोना से ठीक होने के दो साल बाद भी मरीजों की सेहत अच्छी न हो सकी। जहां 31% लोगों की मांसपेशियां अब भी कमजोर हैं, वहीं 31% लोग नींद की परेशानी से जूझ रहे हैं। कई लोगों को जोड़ों में दर्द, दिल की धड़कन तेज होना, चक्कर आना और सिर दर्द जैसी समस्याएं बनी हुई हैं।

लॉन्ग कोविड ने बढ़ाया डिप्रेशन

मेंटल हेल्थ की बात करें तो 19% लोगों को एंग्जाइटी और डिप्रेशन के लक्षण आ रहे हैं।
मेंटल हेल्थ की बात करें तो 19% लोगों को एंग्जाइटी और डिप्रेशन के लक्षण आ रहे हैं।

मेंटल हेल्थ की बात करें तो 35% लोगों को सिर दर्द और 19% लोगों को एंग्जाइटी और डिप्रेशन के लक्षण आ रहे हैं। लॉन्ग कोविड के ज्यादातर मरीजों को मोबिलिटी और एक्टिविटी से जुड़ी परेशानियां भी होती हैं।

रिसर्च में वैज्ञानिकों ने सुझाव दिया है कि लॉन्ग कोविड के खतरे को कम करने के लिए इन लक्षणों पर और ज्यादा रिसर्च करनी चाहिए। इससे पहले ब्रिटेन में हुई एक स्टडी में कहा गया था कि हॉस्पिटलाइज होने वाले हर 4 में से केवल 1 मरीज ही 1 साल बाद खुद को पूरी तरह ठीक मानता है।

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