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सवाल-जवाब / कितने दिनों तक जिंदा रहता है कोरोनावायरस, क्या बार-बार हाथ धोना ही बेहतर विकल्प; जानें क्या है सच

Coronavirus Safety Tips| How many days does the coronaviorus remain alive on a surface, is washing hands again a better option
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Coronavirus Safety Tips| How many days does the coronaviorus remain alive on a surface, is washing hands again a better option

दैनिक भास्कर

Mar 11, 2020, 06:57 PM IST

स्टोरी इनपुट-बीबीसी

लाइफस्टाइल डेस्क. दुनियाभर में कोरोनावायरस या COVID-19 से अबतक 4 हजार से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं। भारत में इसके 62 मामले सामने आ चुके हैं, वहीं एक संदिग्ध की मौत हो चुकी है। सरकार समेत स्वास्थ्य संगठन इससे बचाने के लिए एडवाइजरी जारी कर चुके हैं। अगर आप भी इस बिमारी के बढ़ते प्रकोप को लेकर चिंतित है और या इस वायरस को लेकर कोई कंफ्यूजन है, तो सवाल-जवाब में समझिए क्या हैं कोरोना और इससे कैसे बचा जा सकता है.....

1. कोरोना वायरस से बचने के लिए मास्क पहनना क्यों जरुरी है?

इंसानों को जानवरों से अलग करने वाली चीजों में एक चीज ये भी है कि बीमारियों के फैलने की स्थिति में इंसान अपनी सुरक्षा के लिए चिंतित रहते हैं। इंसान सिर्फ एक ऐसी जाति है जो कि बिना जाने अपने हाथों से चेहरे छूने के लिए जानी जाती है। ये चीज नए कोरोनावायरस (कोविड-19) जैसी बीमारियों को फैलने में मदद करती है। लेकिन हम ये क्यों करते हैं और क्या हम अपनी इस आदत को रोक सकते हैं।

2. चेहरा छूने की आदत

  • हर व्यक्ति दिन में कई बार अपना चेहरे को छूता है और यहीं इस वायरस के फैलने की सबसे बड़ी वजह है। साल 2015 में ऑस्ट्रेलिया के मेडिकल स्टूडेंट्स पर एक स्टडी की गई, िजसमें ये सामने आया कि मेडिकल स्टूडेंट्स भी खुद को इससे नहीं बचा सके।
  • शायद मेडिकल स्टूडेंट्स को इससे पैदा होने वाले ख़तरों को लेकर ज़्यादा सतर्क रहना चाहिए था लेकिन उन्होंने भी एक घंटे में कम से कम 23 बार अपने चेहरे को छुआ, इसमें मुंह, नाक और आंखें शामिल हैं। सामाजिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम करने वाली संस्थाएं और पेशेवर जिसमें विश्व स्वास्थ्य संगठन भी शामिल हैं, कहती हैं कि ये मुंह छूने की आदत खतरनाक है। कोविड-19 से जुड़ी सलाह में हाथों को साफ रखना और उन्हें बार-बार धोने पर जोर दिया गया है।

3. लेकिन हम ऐसा क्यों करते हैं?

  • इंसान और कुछ स्तनपायी जीव खुद को ऐसा करने से नहीं रोक पाते हैं। यह कहना गलत नहीं होगा कि ये हमारे विकास क्रम का हिस्सा है। कुछ जातियां अपने चेहरों को छूकर कीड़ों को हटाने की कोशिश करते हैं, लेकिन हम और दूसरे अन्य स्तनपायी जीव दूसरे कारणों की वजह से भी बार-बार अपने मुंह को छूते हैं।
  • अमरीका स्थित यूसी बार्कले यूनिवर्सिटी में मनोविज्ञान के प्रोफ़ेसर डाचर केल्टनर बताते हैं, "कभी-कभी ये एक तरह से खुद को सहलाने जैसा काम होता है. वहीं, कभी-कभी हम अंजाने में अपने हाथों से मुंह छूकर अपने हाथों का इस्तेमाल कुछ इस तरह करते हैं जैसे कि एक थिएटर के स्टेज पर पर्दे को इस्तेमाल किया जाता है. जिसमें एक पहलू से होकर दूसरे पहलू में जाने के लिए पर्दा डालते और हटाते हैं। बिहेवियरल साइंस के क्षेत्र से जुड़े दूसरे विशेषज्ञ मानते हैं कि खुद को छून अपने भावों को नियंत्रित करने और ध्यान खींचने से जुड़ा होता है। जर्मनी की लिपज़िग यूनिवर्सिटी के मनोवैज्ञानिक मार्टन ग्रनवाल्ड कहते हैं कि ये हमारी जाति का मूल व्यवहार है। ग्रनवाल्ड ने बताया कि "खुद को छूना अपने आप के नियमन जैसी हरकतें होती है, ये सामान्य तौर पर संवाद करने के लिए बनीं हरकतें नहीं होती हैं और बिना जाने ही इन हरकतों को अंजाम दिया जाता है।
  • "ये हरकतें सभी भावनात्मक और संज्ञानात्मक प्रक्रियाओं में अहम भूमिका निभाती हैं. ये सभी लोगों में होती हैं। खुद को छूने से समस्या ये होती है कि इससे हर तरह की ख़राब चीज हमारी आँखों, नाक और मुंह से होते हुए हमारे शरीर के अलग-अलग अंगों में पहुंचती हैं। उदाहरण के लिए, कोविड-19 संक्रमित व्यक्ति के मुंह से निकले पानी के छींटों से होकर दूसरे लोगों में पहुंचता है। लेकिन अगर हम किसी ऐसी चीज को छूते हैं जिस पर वायरस गिरा हो तो इससे भी वायरस हो सकता है। विशेषज्ञ अभी भी वायरस के इस नए स्ट्रेन पर शोध कर रहे हैं लेकिन ऐसा माना जा रहा है कि कोरोना वायरस किसी जगह पर गिरने के बाद 9 दिनों तक ज़िंदा रहते हैं।

4. वायरस की लंबी उम्र का ख़तरा

  • वायरस के इतने दिनों तक ज़िंदा रहने की वजह से हमारा अपने चेहरे को छूना खतरनाक हो जाता है। साल 2012 में अमरीका और ब्राज़ील के शोधकर्ताओं ने पाया कि आम लोग सार्वजनिक जगहों पर चीजों को एक घंटे में तीन से ज़्यादा बार छूते हैं। ये लोग अपने हाथों को अपने मुंह और नाक तक हर घंटे में 3.6 बार ले गए। ये ऑस्ट्रेलियाई मेडिकल स्टूडेंट्स पर किए गए अध्ययन से काफ़ी कम था क्योंकि मेडिकल छात्रों पर जब अध्ययन किया गया तब वे एक क्लास में बैठे थे और ये संभव है कि ऐसा इसी वजह से हुआ हो क्योंकि बाहर आपके भटकाव की तमाम चीजें मौजूद होती हैं। 
  • कुछ स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक़, बार-बार मुंह छूना फेस मास्क पहनने की बड़ी वजह है क्योंकि इस तरह से आपको एक तरह का सुरक्षाकवच मिलता है। लीड्स यूनिवर्सिटी की प्रोफ़ेसर स्टेफ़ेन ग्रिफ़िन समझाती हैं, "मास्क पहनने से लोगों के अपने चेहरों को छूने की संभावनाएं कम हो जाती हैं और गंदे हाथों से चेहरों को छूना संक्रमित होने की एक बड़ी वजह है।

5. हम क्या कर सकते हैं?

  • वे कौन से क़दम हैं जिनसे हम कम से कम अपने हाथों से चेहरे को छूने की संख्या को कम करते हैं। ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री डेविड कैमरन के सहयोगी रहे कोलंबिया यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर और बिहेवियरल साइंस के विशेषज्ञ माइकल हॉलस्वर्थ मानते हैं कि ये कहना आसान है कि ऐसा न किया जाए लेकिन असल में इस सलाह को अमल में लाना मुश्किल है। हॉलस्वर्थ बताते हैं कि "लोगों को कुछ ऐसा करने के लिए कहना जो अनजाने में होता है एक बड़ी समस्या है, इससे ज़्यादा आसान ये है कि लोग अपने हाथों को बार-बार धोते रहें, ताकि वे अपने चेहरे को कम बार छू सकें। अगर आप किसी से वो काम करने को कहेंगे जो कि वो अंजाने में करता हो तो ऐसी सलाह देने से कोई फ़ायदा नहीं होगा।
  • हालांकि, हालस्वर्थ मानते हैं कि कुछ चीजें हैं जो आपकी मदद कर सकती हैं। इनमें से एक यह है कि हमें ये पता हो कि हम अपने चेहरों को कितनी बार छूते हैं। "जब यह (चेहरा छूना) खुजली मचाने की ज़रूरत जैसी शारीरिक मांग बन जाए तो हम सजग रहकर अपने बचाव में क़दम उठा सकते हैं, जैसे कि हम अपने उल्टे हाथ का इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे जोख़िम कम होता है चाहें ये समस्या का समाधान हो या न हो।

6. पता करें कि चेहरा छूने की ज़रूरत कब होती है?

  • बिहेवियरल साइंस विशेषज्ञ इस बात की सलाह भी देते हैं कि हमें ये पता करना चाहिए कि हम अपने चेहरों को क्यों छूते हैं। हॉलस्वर्थ इसे समझाते हुए कहते हैं, "अगर हम उन स्थितियों को पहचान जाएं जब हमें चेहरा छूने की ज़रूरत महसूस होती है तो हम ऐसे मौक़ों पर जरुरी क़दम उठा सकते हैं। जो लोग अपनी आंखों को छूते हैं, वे धूप का चश्मा पहन सकते हैं, या जब लगे कि अब वे चेहरा छूने जा रहे हैं तो हाथों को दबाया जा सकता है। उदाहरण के लिए, हम अपने हाथों को व्यस्त रखने के तरीक़ों का सहारा ले सकते हैं। इसमें मुलायम गेंदों जैसे खिलौनों का इस्तेमाल कर सकते हैं जिनसे हाथ व्यस्त रहते हैं।
  • लेकिन आपको उन्हें अक्सर कीटाणुरहित करना पड़ सकता है। इसके साथ-साथ आप खुद को याद दिलाने के लिए नोट भी बना सकते हैं। हॉलस्वर्थ मानते हैं, "अगर कोई जानता है कि उनकी एक आदत ऐसी है जिसे वे चाहकर भी नहीं रोक पाते हैं तो वे अपने दोस्तों या रिश्तेदारों को ऐसा करने पर टोकने के लिए कह सकते हैं।

7. दस्ताने कैसे विकल्प हैं?

लेकिन एक सवाल ये उठता है कि क्या खुद को याद दिलाने के लिए दस्ताने पहने जाने चाहिए? इसका आसान जवाब है कि ये एक गलत तरीक़ा है, जब तक कि दस्तानों को बार-बार साफ करके कीटाणुमुक्त ना किया जाए, नहीं तो वे भी हानिकारिक बन जाएंगे।

8. हाथ धोना सबसे बेहतर विकल्प
आखिर में सही ढंग से हाथ धोने से अच्छा विकल्प कोई नहीं होता है और इसके साथ-साथ सजगता भी जरुरी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक टेड्रोस एडहोम घेब्येयियस ने बीती 28 फ़रवरी को एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, "हमें टीकों और चिकित्सा विज्ञान के लिए इंतज़ार करने की ज़रूरत नहीं है, इन चीजों की मदद से हर व्यक्ति खुद की और दूसरों की सुरक्षा कर सकता है।

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