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दुनिया का पहला ऐसा मामला:कोविड के बाद 77 वर्षीय जापानी बुजुर्ग के लिए चलना, बैठना और आराम करना हुआ मुश्किल, बॉडी में मूवमेंट होने पर हालत और बिगड़ रही, पढ़ें पूरा मामला

14 दिन पहलेलेखक: अंकित गुप्ता
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कोविड के बाद मरीजों को आराम करने की सलाह दी जाती है, लेकिन जापान में एक ऐसा मामला भी सामने आया है जिसमें मरीज न बैठ पा रहा है, न आराम कर पा रहा है और न ही ठीक-से चलफिर पा रहा है।

जापान में 77 साल के बुजुर्ग में कोरोना का संक्रमण होने के बाद 'रेस्टलेस एनल सिंड्रोम' का पता चला है। मरीज की रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद उसे जापान के टोक्यो मेडिकल यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल में भर्ती किया गया था।

डॉक्टर्स का कहना है, कोविड होने के बाद 'रेस्टलेस एनल सिंड्रोम' होने का दुनिया का यह पहला ऐसा मामला है। इस सिंड्रोम के कारण मरीज का आराम करना मुश्किल हो गया है। चलने-फिरने और आराम करने पर मरीज की स्थिति और बिगड़ रही है। इस मामले की केस स्टडी बीएमसी इंफेक्शियस डिजीज जर्नल में पब्लिश की गई है, पढ़ें क्या है पूरा मामला...

पूरा मामला समझने से पहले जानिए, रेस्टलेस एनल सिंड्रोम आखिर है क्या?

मरीजों में रेस्टलेस लेग सिंड्रोम के मामले में देखे जाते हैं। यह समस्या नर्वस सिस्टम से जुड़ी है। ऐसी स्थिति में मरीज के पैर में एक अलग तरह सनसनी या हलचल महसूस होती है। इसके कारण उसे बार-बार पैर हिलाने की इच्छा होती है। नतीजा, वो आराम नहीं कर पाता। इसलिए एक जगह बैठने या आराम करने पर स्थिति और बिगड़ती है। खासतौर पर शाम को मरीज के लिए परेशानी बढ़ जाती है।

एक्सपर्ट कहते हैं, इसकी सटीक वजह अब तक पता नहीं चल पाई है। कई परिवारों में पीढ़ी-दर-पीढ़ी इसके मामले सामने आते हैं, लेकिन जापानी बुजुर्ग के मामले ऐसा नहीं था। दवाओं और रूटीन में एक्सरसाइज का टाइम बढ़ाकर मरीज का इलाज किया जाता है। इसके साथ मरीज की स्थिति के आधार पर लाइफस्टाइल में बदलाव करने को कहा जाता है।

रेस्टलेस लेग सिंड्रोम फाउंडेशन कहता है, अमेरिका में 7 से 8 फीसदी आबादी इसी बीमारी से जूझ रही है। यह लोगों में क्यों कॉमन होता जा रहा है, इसकी वजह अब तक सामने नहीं आ पाई है। मेडिकल रिकॉर्ड और जर्नल्स में भी इस बीमारी का जिक्र बहुत कम किया गया है। जापानी मरीज को जो परेशानी हुई वो इसी रेस्टलेस लेग सिंड्रोम का ही एक रूप है। इसमें अतिरिक्त तौर पर मामला पैरों के साथ एनस यानी गुदाद्वार से भी जुड़ा हुआ है, जो हालत को और बिगाड़ रहा है। मरीज की गुदा में सेनसेशन होने के कारण उसके लिए बैठना और चलना मुश्किल हो जाता है।

अब समझिए बुजुर्ग को कौन-सी दिक्कतें आ रहीं?
डॉक्टर्स के मुताबिक, चौंकाने वाली बात है कि उम्र के इस पड़ाव पर भी बुजुर्ग मरीज को ऑक्सीजन की जरूरत नहीं पड़ी। इलाज के 21 दिन बाद मरीज पहले ही तरह सांस लेने लगा। मरीज की हालत सामान्य होने पर उसे अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया। इसके कुछ दिन बाद सिंड्रोम के लक्षण सामने आए। मरीज के गुदाद्वार में सनसनी महसूस होने के कारण उसे कहीं पर भी न बैठने की तीव्र इच्छा हो रही थी। इसका इलाज कराने वो वापस हॉस्पिटल पहुंचा।

इलाज करने वाले डॉ. इतारू नाकामुरा कहते हैं, मरीज की कोलोनोस्कोपी करके इसकी वजह जानने की कोशिश की गई। जांच में गुदाद्वार में गांठ मिली है लेकिन किसी और तरह का डैमेज सामने नहीं आया है। आमतौर पर मरीज ऐसे सिंड्रोम में पैरों को मूव करने कोशिश करता है, लेकिन जापानी शख्स को चलने-फिरने में भी दिक्कत हो रही है। चलने-फिरने पर उसके लक्षण और गंभीर हो रहे हैं।

अब तक समझ नहीं आया कोरोना का नर्वस सिस्टम से कनेक्शन
डॉ. नाकामुरा कहते हैं, कोविड के मरीजों में नर्वस सिस्टम तक वायरस का असर कैसे पहुंच रहा है, यह अब तक समझा नहीं जा सका है। कोविड मरीजों का खुशबू और स्वाद को न समझ पाना भी नर्वस सिस्टम से ही जुड़ा लक्षण है।

मरीज को 1.5 mg क्लोनाजेपम नाम की दवा दी जा रही है। उसका कहना है, करीब 10 महीने तक दवा लेने के बाद उसकी हालत में सुधार हुआ है। जापान के हर 4 में से एक इंसान को रेस्टलेस लेग सिंड्रोम होता है। वहीं, UK में हर 10 में से एक इंसान इससे परेशान होता है।

डॉ. नाकामुरा कहते हैं, इससे पहले कोविड के दो मरीजों में रेस्टलेस लेग सिंड्रोम की पुष्टि हो चुकी है। दोनों ही मामले 50 साल की उम्र वाली महिलाओं में सामने आए थे। एक महिला पाकिस्तान से थी और दूसरी इजिप्ट की रहने वाली थी, लेकिन गुदाद्वारा से जुड़ा यह सिंड्रोम दुनिया का पहला ऐसा मामला है।

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