छोटी बच्चियों में आ रही प्यूबर्टी:8 साल से पहले ही आ रहे सेक्शुअल लक्षण, दिनभर स्मार्ट गैजेट्स चलाने से हो रहा हॉर्मोनल इम्बैलेंस

अंकारा5 दिन पहले
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कोरोनाकाल में दुनियाभर के लोगों ने कई तरह की शारीरिक और मानसिक बीमारियों का सामना किया। इसी दौरान छोटी बच्चियों में एक अजीबोगरीब बदलाव देखा गया। इनमें समय से पहले प्यूबर्टी आने के मामले सामने आए। यह पैटर्न खासतौर पर लॉकडाउन के वक्त कई देशों में नोटिस किया गया। इस असामान्य घटना को इडियोपैथिक प्रेकोशियस प्यूबर्टी कहा जाता है।

अर्ली प्यूबर्टी और कोरोना संक्रमण का रिश्ता नहीं
कोरोना की शुरुआत से बच्चियों में आ रहे शारीरिक परिवर्तन की वजह वायरस के संक्रमण को माना जा रहा था। इस विषय पर कई स्टडीज भी हुईं। लेकिन, हाल ही में रोम में हुई 60वीं यूरोपियन सोसाइटी फॉर पीडियाट्रिक एंडोक्रिनोलॉजी मीटिंग में एक रिसर्च पेश की गई। इसमें कहा गया है कि लड़कियों की अर्ली प्यूबर्टी से कोरोना इन्फेक्शन का कोई लेना-देना नहीं है।

ब्लू लाइट एक्सपोजर से प्यूबर्टी का कनेक्शन
प्यूबर्टी आने की प्रमुख वजह लॉकडाउन के दौरान अपने स्मार्ट गैजेट्स के सामने ज्यादा समय बिताना है। इसे साबित करने के लिए तुर्की की गाजी यूनिवर्सिटी और अंकारा सिटी हॉस्पिटल के वैज्ञानिकों ने 18 मादा चूहों पर रिसर्च की। इन्हें तरह-तरह की LED लाइट से कम या ज्यादा वक्त के लिए एक्सपोज किया गया। रिसर्चर्स ने पाया कि जिन चूहों ने लाइट के सामने ज्यादा वक्त बिताया, वे दूसरों के मुकाबले जल्दी मैच्योर हुए।

वैज्ञानिकों की मानें तो हमारे डिवाइस की स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू लाइट शरीर में मेलाटोनिन हॉर्मोन की मात्रा को घटा सकती है। ये हॉर्मोन हमारे दिमाग में रिलीज होता है और नींद को रेगुलेट करता है। इसके साथ ही रिप्रोडक्शन में काम आने वाले हॉर्मोन्स की मात्रा भी बढ़ सकती है, जिससे प्यूबर्टी समय से पहले ही आ सकती है।

क्या है प्यूबर्टी आने की नॉर्मल एज?
लड़कों में प्यूबर्टी 9 से 14 साल के बीच तो लड़कियों में 8 से 13 साल के बीच आती है। लेकिन, अगर 8 की उम्र से पहले ही लड़कियों में सेकंडरी सेक्शुअल लक्षण (जैसे स्तन का आकार बढ़ना, प्राइवेट पार्ट्स में बाल आना इत्यादि) आते हैं, तो उसे प्रेकोशियस प्यूबर्टी कहा जाता है। ऐसे मामलों में अचानक से हॉर्मोनल इम्बैलेंस होने की वजह अब भी अज्ञात है। अभी इस पर और रिसर्च की जरूरत है।

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