स्निफर डॉग्स करेंगे कोरोना मरीज की पहचान:फिनलैंड के वैज्ञानिकों का कमाल, कुत्तों को वायरस सूंघने की ट्रेनिंग दी, नतीजे 98% तक सही

2 महीने पहले
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कोरोना को fफैलने से रोकने के लिए दुनिया भर के वैज्ञानिक नए-नए तरीके अपना रहे हैं। हाल ही में BMJ ग्लोबल हेल्थ जर्नल में प्रकाशित एक रिसर्च के अनुसार, एयरपोर्ट यात्रियों में कोरोना का पता लगाने के लिए कुत्तों का इस्तेमाल किया जा सकता है। ये कोई ऐसे-वैसे कुत्ते नहीं, बल्कि ट्रेन किए गए स्निफर डॉग्स हैं।

कुत्ते ड्रग्स, कैंसर सूंघने में माहिर

फिनलैंड की हेलसिंकी यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स ने महामारी की शुरुआत में 4 कुत्तों को SARS-CoV-2 सूंघने के लिए ट्रेन किया।
फिनलैंड की हेलसिंकी यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स ने महामारी की शुरुआत में 4 कुत्तों को SARS-CoV-2 सूंघने के लिए ट्रेन किया।

यह स्टडी फिनलैंड की हेलसिंकी यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स ने की है। उन्होंने महामारी की शुरुआत में 4 कुत्तों को SARS-CoV-2 सूंघने के लिए ट्रेन किया। ये सभी कुत्ते पहले से ड्रग्स, खतरनाक प्रोडक्ट्स और कैंसर को सूंघकर पता लगाने में ट्रेनिंग हासिल कर चुके थे।

स्निफर डॉग्स कोरोना का पता लगा पाते हैं या नहीं, ये टेस्ट करने के लिए रिसर्च में 420 लोगों को शामिल किया गया। इनमें से 114 लोग कोरोना पॉजिटिव थे और 306 कोरोना नेगेटिव। कुत्तों ने इन सभी के स्किन स्वाब सैंपल्स को 7 बार सूंघा। स्टडी में स्निफर डॉग्स कोरोना इन्फेक्शन का पता लगाने में 92% तक कामयाब रहे।

डॉग्स ने बिना लक्षण वाले मरीजों को पहचाना

रिसर्च में शामिल वैज्ञानिकों ने बताया कि 28 पॉजिटिव सैंपल्स ऐसे लोगों के थे जिन्हें कोरोना के कोई लक्षण ही नहीं थे। कुत्तों ने इनमें से केवल एक पॉजिटिव सैंपल को गलती से नेगेटिव बताया और दो सैंपल्स को सूंघा ही नहीं। यानी, स्निफर डॉग्स ने 28 में से 25 सैंपल्स को सही डिटेक्ट किया। इसका मतलब लक्षण होने या न होने से कुत्तों की कोरोना पहचानने की क्षमता पर खास असर नहीं हुआ।

98% एयरपोर्ट यात्रियों में कोरोना की सही जांच की

वैज्ञानिकों का मानना है कि एयरपोर्ट पर कोरोना जांच के लिए कुत्ते पहली स्क्रीनिंग के काम आ सकते हैं।
वैज्ञानिकों का मानना है कि एयरपोर्ट पर कोरोना जांच के लिए कुत्ते पहली स्क्रीनिंग के काम आ सकते हैं।

इस स्टडी के बाद स्निफर डॉग्स की क्षमता को हेलसिंकी-वांता इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर भी टेस्ट किया गया। 7 महीने चलने वाले इस टेस्ट में यात्रियों के PCR सैंपल्स भी लिए गए। रिसर्चर्स के मुताबिक, 98% मामलों में स्निफर डॉग्स और PCR टेस्ट के नतीजे एक जैसे थे। कुत्तों ने 99% मामलों में नेगेटिव सैंपल्स को भी सही जांचा।

वैज्ञानिकों का मानना है कि एयरपोर्ट पर कोरोना जांच के लिए कुत्ते पहली स्क्रीनिंग के काम आ सकते हैं। हर बार PCR टेस्ट करना महंगा पड़ता है, इसलिए स्निफर टेस्ट में कोरोना पॉजिटिव मिलने पर सेकंड स्क्रीनिंग में PCR टेस्ट करना बेहतर होगा।

वैरिएंट्स में भी अंतर समझ सकते हैं स्निफर डॉग्स

वैज्ञानिकों ने रिसर्च में बताया कि ये कुत्ते कोरोना की ओरिजिनल स्ट्रेन के मुकाबले अल्फा वैरिएंट को पकड़ने में कम कामयाब रहे। इसकी वजह उन्हें सिर्फ SARS-CoV-2 सूंघने के लिए ट्रेन करना है। यानी, सही ट्रेनिंग मिलने पर कुत्ते कोरोना वैरिएंट्स के अंतर को भी पहचान लेंगे।