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वॉशेबल मास्क कितना बेहतर:धोकर पहने जाने वाले कॉटन के दो लेयर वाले मास्क साल भर बाद भी कोरोना के कणों से बचाते हैं, कोलोराडो यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं का दावा

16 दिन पहले
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ऐसे मास्क जो धुलकर पहने जा सकते हैं वो सालभर बाद भी कोरोना के कणों को इंसान तक पहुंचने से रोकते हैं। कॉटन के बने दो लेयर वाले मास्क को एक साल बाद रिप्लेस करने की जरूरत नहीं है। यह दावा ऐरोसॉल एंड एयर क्वालिटी रिसर्च जर्नल में पब्लिश रिसर्च में किया गया है। रिसर्च के मुताबिक, कॉटन का मास्क अगर चेहरे की नाक और मुंह को अच्छी तरह से कवर कर रहा है तो यह कपड़े के मुकाबले कई गुना अधिक सुरक्षा देता है।

इसलिए हुई रिसर्च
रिसर्च करने वाली कोलोराडो यूनिवर्सिटी की शोधकर्ता मेरिना वेंस कहती हैं, महामारी की शुरुआत से अब तक रोजाना करीब 7200 टन मेडिकल वेस्ट निकल रहा है। इसमें डिस्पोजेबल मास्क की संख्या ज्यादा है। यह पर्यावरण के लिए खतरा बन रहे हैं। इस खतरे को कम करने के लिए यह रिसर्च की गई कि धोकर सुखाने के बाद मास्क कितनी सुरक्षा देते हैं।

टेस्टिंग के लिए मास्क को एक स्टील की नली पर लगाया गया। इसके बाद नली में एक तरफ से हवा और एयरबॉर्न पार्टिकल्स छोड़े गए। यह मास्क नमी वाले माहौल और तापमान घटने-बढ़ने पर कितने पार्टिकल्स को रोक पा रहा है, इसे भी जांचा गया।

प्रयोग के बाद रिपोर्ट में सामने आया कि कॉटन के मास्क को कई बार धोने के बाद भी इसकी फिल्टर करने की क्षमता पर कोई असर नहीं पड़ा। दर्जनों बाद धोकर इस्तेमाल करने के बाद भी यह सुरक्षा देता है।

मास्क पहनते समय ये ध्यान रखें
शोधकर्ताओं का कहना है, मास्क पहनें तो ध्यान रखें की इसकी पर्त और इंसान के चेहरे के बीच गैप नहीं होना चाहिए। यह चेहरे पर अच्छी तरह फिट होना चाहिए। अलग-अलग लोगों के चेहरे के आकार में फर्क होता है, इसलिए इसे अपने चेहरे पर फिट करते हुए पहनें।

मास्क पर हुई पिछली एक रिसर्च में सामने आया था कि ढीला मास्क पहनने पर एयरबॉर्न पार्टिक्लस 50 फीसदी तक सांस लेने के दौरान शरीर में पहुंच जाते हैं।

किस मास्क में कणों को रोकने की कितनी क्षमता
शोधकर्ताओं का कहना है, मास्क कैसा होना चाहिए यह निर्भर करता है कि इसमें इस्तेमाल कपड़ा किस हद तक वायरस के कणों को रोक सकता है। रिसर्च में सामने आया है कि कॉटन का मास्क 0.3 माइक्रॉन वाले बारीक कणों को 23 फीसदी तक रोक सकता है। वहीं, आमतौर पर चेहरे पर बांधे जाने वाले कपड़े इन कणों से मात्र 9 फीसदी तक ही सुरक्षा दे पाते हैं।

सर्जिकल मास्क में 42 से 88 फीसदी तक इन कणों को रोकने की क्षमता होती है। अगर सर्जिकल मास्क के ऊपर कॉटन मास्क को पहनते हैं तो 40 फीसदी तक सुरक्षा देने की क्षमता और बढ़ जाती है। केएन-95 और एन-95 83 से लेकर 99 फीसदी तक एयरबॉर्न कणों को रोक सकता है।

अगर आप सर्जिकल मास्क (नॉन-वॉशेबल) पहन रहे हैं तो ध्यान रखें

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