गाय के दूध पर एंटीबायोटिक का असर:हेवी डोज के चलते दूध में रिसकर आ रहीं दवाएं, इससे इम्यूनिटी कमजोर होने का खतरा

न्यूयॉर्क17 दिन पहले
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दुनिया में डेयरी प्रोडक्ट की मांग तेजी से बढ़ रही है। खासकर गाय के दूध की डिमांड सबसे ज्यादा है। इसे पूरा करने के लिए और उत्पादन बढ़ाए रखने के लिए गायों को एंटीबायोटिक के इंजेक्शन बार-बार दिए जा रहे हैं। नतीजा यह है कि एंटीबायोटिक गायों के दूध में रिसकर आने लगा है।

अमूमन ऐसा नहीं होना चाहिए, लेकिन हेवी डोज के कारण यह स्थिति बन रही है। जब इस दूध का उपयोग लोग करते हैं तो उनके शरीर में इस एंटीबायोटिक की थोड़ी-थोड़ी मात्रा पहुंच रही होती है, जो इम्यूनिटी को प्रभावित करती है। इससे बीमारी के वक्त उन्हें दिए जाने वाले एंटीबायोटिक असर नहीं करते हैं।

ऐसा दूध पीने से बीमारियों की चपेट में आएंगे
कॉर्नेल यूनिवर्सिटी की एक हालिया स्टडी में इस बात का खुलासा हुआ है। अधिकांश लोग गाय के दूध का बीमारी के वक्त ज्यादा उपयोग करते हैं। ऐसे में बीमारी से बचाव के लिए दिए जाने वाले एंटीबायोटिक का असर कम हो जाता है।

रिसर्चर डॉ रेनाटा इवानेक का कहना है कि दुनिया में ज्यादातर एंटीबायोटिक्स का उपयोग डेयरी उद्योग में ज्यादा प्रोडक्शन के लिए किया जा रहा है। वैश्विक स्तर पर एंटीबायोटिक प्रतिरोध से निपटने के लिए गोवंश में एंटीबायोटिक के उपयोग को कम करना जरूरी है।

इसके लिए अमेरिकी नागरिकों पर एक स्टडी की गई। एंटीबायोटिक वाले दूध के डिब्बे पर आरएयू-लेबल लगाया गया। इसमें सामने आया कि लोगों में लेबल वाला दूध खरीदने की इच्छा बिना लेबल वाले दूध के समान ही थी। हालांकि लेबल वाला दूूध खरीदना लोगों की पहली पसंद थी।

आंतों में पाए जाने वाले बैक्टीरिया की बढ़त कम होती है
एंटीबायोटिक की अत्यधिक मात्रा गाय की आंतों में पाए जाने वाले बैक्टीरिया की बढ़त को कम कर देते हैं। यह बैक्टीरिया जुगाली करने वाले पशुओं की आंतों में पाया जाता है। इसका असर दूध की गुणवत्ता पर पड़ सकता है।

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