• Hindi News
  • Happylife
  • Every Day 15.8% People Suffer From Headache, This Problem Is More In Women Than Men.

दुनिया की 52% आबादी सिर दर्द से परेशान:हर दिन 15.8% लोग सिर दर्द से जूझते हैं, पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में ये समस्या ज्यादा

8 महीने पहले
  • कॉपी लिंक

सिर में दर्द होना काफी सामान्य परेशानी है। हर कोई अपने जीवन में इससे कम से कम एक बार जरूर जूझता है। हालांकि दुनिया में ऐसे भी कई लोग हैं, जिन्हें नियमित रूप से गंभीर सिर दर्द होता है। हाल ही में नॉर्विजियन यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के वैज्ञानिकों ने ऐसे मरीजों के डेटा को लेकर बड़ा खुलासा किया है।

रिसर्चर्स का कहना है कि दुनिया की 52% आबादी हर साल किसी न किसी प्रकार के सिर दर्द का शिकार होती है। इसमें माइग्रेन, नॉर्मल सिर दर्द, चिंता से होने वाला सिर दर्द आदि शामिल हैं। इस रिसर्च के लिए वैज्ञानिकों ने 1961 से 2020 तक के उन शोधों को स्टडी किया, जिनमें सिर दर्द से जुड़ा डेटा मौजूद था।

माइग्रेन से 14%, चिंता वाले सिर दर्द से 26% लोग परेशान

वैज्ञानिकों ने रिसर्च में बताया है कि दुनिया में 14% लोग माइग्रेन के मरीज हैं। वहीं, 26% लोगों को इतनी चिंता होती है कि यह गंभीर सिर दर्द की वजह बन जाती है। शोध के मुताबिक, विश्व में हर दिन 15.8% लोग सिर दर्द से जूझते हैं।

महिलाओं में सिर दर्द की समस्या ज्यादा

जहां दुनिया भर में 17% महिलाएं माइग्रेन की मरीज हैं, वहीं केवल 8.5% पुरुष ही इसकी चपेट में आते हैं।
जहां दुनिया भर में 17% महिलाएं माइग्रेन की मरीज हैं, वहीं केवल 8.5% पुरुष ही इसकी चपेट में आते हैं।

रिसर्चर्स के अनुसार, पुरुषों की तुलना में महिलाओं को हर प्रकार का सिर दर्द ज्यादा होता है। माइग्रेन की बात करें तो जहां दुनिया भर में 17% महिलाएं इसकी मरीज हैं, वहीं केवल 8.5% पुरुष ही इसकी चपेट में आते हैं। करीब 6% महिलाओं को सिर दर्द लगातार 15 दिन या उससे ज्यादा रहता है, वहीं पुरुषों में ये प्रतिशत मात्र 2.9% है।

2019 में ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज द्वारा की गई एक स्टडी में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला था। उसमें पाया गया था कि पूरी दुनिया में माइग्रेन विकलांगता का दूसरा सबसे बड़ा कारण है और 50 साल से कम उम्र की महिलाओं में विकलांगता का पहला सबसे बड़ा कारण है।

लोगों में माइग्रेन बढ़ने की कई वजहें

हर साल माइग्रेन की समस्या बढ़ती चली जा रही है। रिसर्च में शामिल शोधकर्ताओं का कहना है कि इसके कई कारण हैं। ये मेंटल से लेकर फिजिकल, एनवायरनमेंटल, बिहेवियरल और साइकोलॉजिकल हो सकते हैं। हालांकि टेक्नोलॉजी का विकास भी इसमें एक अहम भूमिका निभाता है। आज ज्यादा से ज्यादा लोग टेक्नोलॉजी की मदद से अपनी परेशानियां डॉक्टर्स से साझा कर रहे हैं और हेल्थ एक्सपर्ट्स भी नई टेक्नोलॉजी के जरिए मरीजों का इलाज कर रहे हैं।

खबरें और भी हैं...