पहली बार गर्भ में पॉम्पे बीमारी का इलाज:जिस जेनेटिक रोग ने आयला की बहनों की जान ली, डॉक्टर्स ने उससे बचाया

न्यूयॉर्क3 महीने पहले
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कनाडा के ओंटारियो में रहने वाली 17 महीने की आयला बशीर की दो बहनों की जेनेटिक बीमारी पॉम्पे के चलते मौत हो गई थी, लेकिन वह खुद उससे पूरी तरह सुरक्षित है। डॉक्टरों ने आयला के जन्म से पहले ही उसका इलाज कर दिया था।

ऐसा दुनिया का पहला मामला
दुनिया में पहली बार किसी बच्चे की बीमारी का इलाज उसके जन्म के पहले किया गया था, जिसे डॉक्टरों ने अब कामयाब बताया है। अमेरिका और कनाडा के वैज्ञानिकों ने एक नई तकनीक से दुर्लभ जेनेटिक बीमारी का इलाज किया था।

17 महीने की आयला नॉर्मल बच्चों जैसे ही पूरी तरह स्वस्थ हैं।
17 महीने की आयला नॉर्मल बच्चों जैसे ही पूरी तरह स्वस्थ हैं।

क्या होती है पॉम्पे बीमारी?
आयला के परिवार में ऐसी जेनेटिक यानी आनुवंशिक बीमारी है, जिसमें शरीर के सेल्स (कोशिकाओं) में ग्लाइकोजन नाम का कॉम्प्लेक्स शुगर इकट्ठा हो जाता है। इसकी वजह से शरीर में कुछ या सभी प्रोटीन नहीं बनते, जिससे रोगी की मौत हो जाती है। डॉक्टरों ने जिस तरह आयला का इलाज किया, उसका ब्योरा न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में छपा है।

गर्भनाल के जरिए भ्रूण में खास एंजाइम दिए
ओटावा अस्पताल में भ्रूण दवा विशेषज्ञ डॉ. कैरेन फंग बताती हैं कि डॉक्टरों ने गर्भनाल के जरिए आयला को महत्वपूर्ण एंजाइम दिए। गर्भ धारण करने के 24 हफ्ते बाद यह इलाज किया गया।

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