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मौतें जो इंसानों के कारण हुईं:दुनिया में गर्मी से होने वाली 37 फीसदी मौतों के लिए इंसान जिम्मेदार, सबसे ज्यादा असर बुजुर्गों और अस्थमा के रोगियों पर

15 दिन पहले
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  • लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसिन के वैज्ञानिकों ने जारी की रिपोर्ट
  • दुनिया के 73 देशों के 732 क्षेत्रों से मौतों का इकट्ठा किया गया डाटा

दुनिया में गर्मी से होने वाली एक तिहाई मौतों के लिए इंसान जिम्मेदार है। साल 1991 से 2018 के आंकड़े बताते हैं, गर्मी से हुई 37 फीसदी मौतें इंसानों की गतिविधियों के कारण हुई हैं। इंसान के कारण ही धरती का तापमान बढ़ा है।

73 देशों का डाटा इकट्ठा किया
यह दावा लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसिन के वैज्ञानिकों ने अपनी रिपोर्ट में किया है। वैज्ञानिकों का कहना है, जलवायु परिवर्तन दुनिया की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक है। वैज्ञानिकों ने इंसान की सेहत पर अधिक तापमान और उससे होने वाली मौतों का असर देखने के लिए यह रिसर्च की है। मौतों का आंकड़ा जानने के लिए 73 देशों के 732 क्षेत्रों का डाटा इकट्ठा किया।

इसलिए बढ़ता है समय से पहले मौत का खतरा
वैज्ञानिकों के मुताबिक, जैसे-जैसे तापमान बढ़ता है, हवाएं तेज गर्म हो जाती हैं। इसका सीधा असर बुजुर्गों और अस्थमा रोगियों पर पड़ता है। नतीजा, वो समय से पहले मौत की चपेट में आ जाते हैं। नेचर क्लाइमेट चेंज जर्नल में पब्लिश रिसर्च कहती है, अध्ययन में साबित हुआ है कि ग्लोबल वार्मिंग की एक बड़ी वजह इंसानी गतिविधियां हैं।

जलवायु परिवर्तन का 50% से अधिक योगदान इन हिस्सों से
रिपोर्ट के मुताबिक, जलवायु परिवर्तन में 50 फीसदी से अधिक योगदान दक्षिण-पश्चिम एशिया, दक्षिण-पूर्व एशिया, मध्य और दक्षिण अमेरिका का है। शोधकर्ता एंटोनिया गैस्पारिनी का कहना है, रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि ग्लोबल वार्मिंग को रोकने के लिए जल्द से जल्द कदम उठाने की जरूरत है। अगर यूं ही गर्मी बढ़ती रही तो भविष्य में इसके बुरे परिणाम भुगतने होंगे।

हृदय और सांस के रोगी बढ़ने का खतरा
एक्सपर्ट कहते हैं, तापमान बढ़ने पर स्वास्थ्य से जुड़ी कई दिक्कतें बढ़ने लगती हैं। जैसे- हृदय रोग और सांस से जुड़ी बीमारियां। कई बार हालत अधिक बिगड़ने पर अस्पताल में भर्ती होने की नौबत आ जाती है।

रिसर्च से जुड़े बर्न यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता एना एम के मुताबिक, औसत ग्लोबल टेम्प्रेचर में पहले ही एक डिग्री सेल्सियस का इजाफा हो चुका है। अगर तापमान में ऐसे ही बढ़ोतरी होती रही तो मौत के आंकड़ों में इजाफा होगा।