ऑनलाइन क्लासेस का असर:55 फीसदी बच्चे तनाव, सिरदर्द, आंखों में समस्या और नींद न आने की दिक्कत से जूझ रहे, एक्सपर्ट से जानिए इससे कैसे निपटें

4 महीने पहले
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ऑनलाइन क्लासेस करने वाले 55 फीसदी बच्चे सेहत से जुड़ी कई तरह की समस्याओं से जूझ रहे हैं। महामारी में लम्बे समय ऑनलाइन क्लासेस होने के कारण कक्षा 4 से 12वीं तक के स्टूडेंट्स तनाव, आंखों में समस्या और अनिद्रा से परेशान हैं। यह बात लखनऊ की स्प्रिंग डेल कॉलेज चेन ऑफ स्कूल की ओर से किए गए सर्वे में सामने आई है।

सर्वे में 4454 लोगों को शामिल किया गया। इनमें अलग-अलग स्कूलों के 3300 स्टूडेंट्स, 1 हजार पेरेंट्स और 154 टीचर्स से ऑनलाइन क्लासेस के फायदे और नुकसान पूछे गए।

सर्वे की पांच बड़ी बातें

  • सर्वे में 54 से 58 फीसदी स्टूडेंट्स ने कहा, वो आंखों से जुड़ी दिक्कतें, पीठदर्द, सिरदर्द, थकान और मोटापा से जैसी परेशानी से जूझ रहे हैं।
  • 50 फीसदी ने कहा, वो तनाव से परेशान हैं। वहीं, 22.7 फीसदी का कहना है अनिद्रा की समस्या पीछा नहीं छोड़ रही।
  • 65 फीसदी का कहना है, मोबाइल से ऑनलाइन क्लासेस करने के दौरान वो टेक्निकल और नेटवर्क प्रॉब्लम से जूझ रहे हैं।
  • 45-47 फीसदी स्टूडेंट्स के मुताबिक, उन्हें टीचर और क्लासमेट से इंटरएक्शन करने में दिक्कत होती है। सभी लोग एक साथ नहीं दिख पाते।
  • इतना ही नहीं, स्टूडेंट्स का यह भी कहना है कि उनमें कॉन्फिडेंस की कमी हो गई है और मोटिवेशन नहीं मिल पा रहा है।

नुकसान के बीच कई फायदे भी हुए

सर्वे कहता है, ऑनलाइन क्लासेस के कारण स्टूडेंट्स और टीचर दोनों टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने में सहज हो गए हैं। 60 फीसदी स्टूडेंट्स का कहना है अब वो पढ़ाई के साथ अतिरिक्त समय भी निकाल पा रहे हैं। इस समय का इस्तेमाल वो गार्डनिंग, आर्ट और क्राफ्ट के लिए कर रहे हैं। इसके अलावा फैमिली मेम्बर्स के साथ उनकी बॉन्डिंग भी अच्छी हो रही है।

आंखों को दिनभर में 4-5 बार पानी से धोएं
बंसल हॉस्पिटल की आई स्पेशलिस्ट और ग्लूकोमा एक्सपर्ट डॉ. विनीता रामनानी कहती हैं, बच्चे मोबाइल फोन का इस्तेमाल ज्यादा करते हैं। इससे सीधा असर उनकी आंखों पर पड़ता है। इनदिनों ऑनलाइन क्लासेस के कारण बच्चों का मोबाइल के साथ अधिक समय बीत रहा है। इसलिए कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है-

  • अगर आंखों में खिंचाव, खुजली, थकावट, लालिमा, पानी आना, धुंधला दिखने जैसी समस्या हो रही है तो अलर्ट हो जाएं। ये डिजिटल आई स्ट्रेन के लक्षण हैं। ये लक्षण गैजेट को अधिक इस्तेमाल करने पर दिखते हैं।
  • डिजिटल गैजेट्स से निकलने नीली रोशनी आंखों पर लगातार पड़ने से इनमें पहले रुखापन आता है फिर मांसपेशियों पर जोर पड़ता है। ऐसे में बच्चों को उनके गैजेट का इस्तेमाल करने के दौरान पलकें झपकाने के लिए कहें।
  • मोबाइल की स्क्रीन छोटी होने के कारण आंखों पर जोर अधिक पड़ता है। इससे निकलने वाली नीली रोशनी आंखों के सबसे करीब होने के कारण ज्यादा बुरा असर छोड़ती है।
  • आंखों में सूखेपन से बचने के लिए क्लासेस के अलावा बच्चों को गैजेट और आंखों के बीच दूरी रखने के लिए कहें। इसके अलावा दिन में 4 से 5 बार आंखों को सादे पानी से धोने के लिए कहें।
  • ज्यादातर बच्चे पेरेंट्स के डर से रात में लाइट ऑफ करके मोबाइल या दूसरे गैजेट पर वीडियो गेम खेलते हैं। ये सबसे ज्यादा खतरनाक स्थिति है क्योंकि कमरे में अंधेरा होने के कारण गैजेट की नीली रोशनी का बुरा असर सीधे आंखों पर पड़ता है। पेरेंट्स इन बातों का ध्यान रखें

पीठदर्द, सिरदर्द और थकान से बचने के लिए ये बातें ध्यान रखें
एक्सपर्ट्स कहते हैं, ऑनलाइन क्लासेस के दौरान बॉडी पॉश्चर नहीं बिगड़ने देना चाहिए। इसके कारण ही थकान और पीठ में दर्द शुरू होता है। इससे बचने के लिए ऐसी कुर्सी का चुनाव करें जिससे पीठ एक सीध में रहे। गैजेट्स तरफ सिर या पीठ अधिक न झुकाएं। गैजेट्स न तो आंखों से बहुत ऊपर की तरफ होना चाहिए और न बहुत ज्यादा नीचे होना चाहिए।

सिरदर्द और थकान से बचने के लिए क्लासेस में ब्रेक होने पर कमरें या बालकनी में चलफिर सकते हैं। इससे आंखों की थकान दूर होने के साथ सिरदर्द से बचाव हो सकेगा। दिन में 7 से 8 गिलास पानी जरूर पिएं, इससे आप खुद को एनर्जेटिक पाएंगे। बेहतर बॉडी पॉश्चर के लिए पेरेंट्स को बच्चों के रूटीन में योग को शामिल करना चाहिए।

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