लद्दाख / देश का पहला आइस कैफे 14 हजार फीट ऊंचाई पर बनाया गया, मई तक सैलनियों के लिए खुला रहेगा

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  • बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन ने चार युवाओं के साथ मिलकर लद्दाख के मीरू गांव में यह कैफे बनाया है
  • गर्मियों में कैफे की बर्फ पिघलने पर निकलने वाले पानी से पौधों की सिंचाई होगी

दैनिक भास्कर

Feb 21, 2020, 06:45 PM IST

लाइफस्टाइल डेस्क.  लद्दाख में 14 हजार फीट ऊंचाई पर लेह-मनाली नेशनल हाइवे पर देश का पहला आइस कैफे बनाया गया है। यहां मसाला चाय, जिंजर-टी, बटर-टी और मसाला मैगी सर्व की जाती है। इसे बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन ने चार स्थानीय युवाओं के साथ मिलकर बनाया है। यह लद्दाख के मीरू गांव के नजदीक है।

ऐसे तैयार हुआ कैफे
इसका आइडिया मैकेनिकल इंजीनियर सोनम वांगचुक के प्रोजेक्ट से लिया गया है। इसके मुताबिक, स्तूप बनाने में पाइप का इस्तेमाल होता है। ऊंचाई से आने वाले पानी में उछाल होता है। जब पानी लाइन के अंतिम सिरे पर लगे स्प्रे से निकलता है और सर्दी में बूंद के रूप में निकलते ही जम जाता है। इस तरह वहां एक कोन के आकार का बर्फीला स्तूप तैयार हो जाता है। इस कैफे को भी ऐसे ही तैयार किया गया है। 

कोन आकार के स्ट्रक्चर पर पानी गिराया जाता है धीरे-धीरे इस पर पर्त-दर-पर्त बर्फ बनती जाती है। इसके अंदर काफी जगह की इंसान रेस्तां की तरह बैठ सकता है और चहलकदमी भी कर सकता है।

बर्फ पिघलने पर पानी से सिंचाई होगी
कैफे को एन्वायर्नमेंट फ्रेंडली बनाया गया है। सैलानी मई 2020 तक यहां आ सकते हैं। इसके बाद यह पिघलना शुरू होगा। पानी बेकार न जाए, इसकी भी व्यवस्था की गई है। बर्फ पिघलने पर पानी को स्टोर किया जाएगा और सिंचाई के काम आएगा। 

गरमा-गरम खाना जो बदलेगा जायका
कैफे में ठंड के बीच गरमागरम खाना मिलता है। हालांकि यहां खाने का मेन्यू लंबा नहीं है लेकिन ऐसे चीजें जरूर मिलेंगी जो जुबान का जायका बदल देंगी जैसे मसाला चाय, मसाला मैगी। 

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